जोधपुर केमिकल फैक्ट्री हादसा: बिना सेफ्टी सूट आग में झोंका, प्रीतेश की इलाज के दौरान मौत

Jageshwar prasad | Sept 26, 2026, 09:52 IST
जोधपुर: ठेकाकर्मी प्रीतेश की इलाज के दौरान मौत
जोधपुर: ठेकाकर्मी प्रीतेश की इलाज के दौरान मौत
जोधपुर में केमिकल की आग बुझाने गए ठेकाकर्मी प्रीतेश की इलाज के दौरान मौत हो गई। वह 21 वर्ष का था और 90 से 95 प्रतिशत झुलस गया था। उसके पास अग्निशमन की डिग्री या अनुभव नहीं था। सेफ्टी सूट भी नहीं दिया गया था।

समझें क्या है पूरा मामला

  • नगर निगम की लापरवाही ने ली जान।
  • बिना डिग्री और अनुभव आग में झोंका।
  • ठेकाकर्मी प्रीतेश की इलाज के दौरान मौत।
  • सेफ्टी सूट तक नहीं दिया गया।
  • 12 अन्य फायरफाइटर्स की हालत गंभीर

नरेश रमेश @ जोधपुर



जोधपुर में केमिकल फैक्ट्री में लगी भीषण आग पर काबू पाने भेजे गए 13 फायरफाइटर्स में से एक ठेकाकर्मी ने दम तोड़ दिया। प्रीतेश (21 वर्ष) ने महात्मा गांधी अस्पताल में इलाज के दौरान अंतिम सांस ली। वह 90 से 95 प्रतिशत तक बुरी तरह झुलस गया था।



प्रीतेश जिंदगी और मौत की जंग हार गया। इस घटना ने नगर निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सुरक्षा इंतजामों के प्रति संवेदनहीनता का यह दर्दनाक नतीजा सामने आया है।



न डिग्री, न डिप्लोमा, न अनुभव

प्रीतेश महज एक ठेकाकर्मी थे। उनके पास अग्निशमन (Firefighting) की कोई व्यावसायिक डिग्री या डिप्लोमा नहीं था। केमिकल आग से निपटने का कोई पूर्व अनुभव भी नहीं था।



इसके बावजूद निगम प्रशासन ने उन्हें इस जानलेवा अभियान में आगे कर दिया। सुरक्षा नियमों को ताक पर रखा गया। यह साफ तौर पर लापरवाही का मामला है।



सेफ्टी सूट तक नहीं दिया गया

अत्यधिक ज्वलनशील केमिकल और विस्फोट जैसी खतरनाक स्थिति में भी कर्मचारियों के पास पर्याप्त सुरक्षा नहीं थी। उन्हें न सेफ्टी सूट दिया गया और न ही आधुनिक अग्निशमन उपकरण।



ऐसी स्थिति में किसी भी कर्मचारी को आग के करीब भेजना बेहद खतरनाक है। यह सीधे तौर पर जान जोखिम में डालने जैसा है। प्रीतेश के साथ यही हुआ।



निगम प्रशासन की चुप्पी

एक होनहार युवक की जान चली गई। 12 अन्य फायरफाइटर्स झुलस गए। इसके बाद भी नगर निगम प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया।



इस पूरी घटना और लापरवाही पर जब नगर निगम आयुक्त राहुल जैन से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने फोन कॉल का जवाब नहीं दिया। व्हाट्सएप संदेशों का भी कोई उत्तर नहीं मिला। प्रशासन की यह चुप्पी सवाल खड़े करती है।



12 अन्य की हालत गंभीर

इस भीषण हादसे में झुलसे अन्य 12 कर्मचारियों की हालत भी चिंताजनक है। इनमें से दो अभी भी वेंटिलेटर पर जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं।



छह गंभीर रूप से झुलसे दमकलकर्मियों को ग्रीन कॉरिडोर बनाकर जयपुर के एसएमएस (SMS – Sawai Man Singh) अस्पताल रेफर किया गया है। इन सभी का इलाज चल रहा है। परिवारों की हालत बेहद खराब है।



क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

अग्निशमन विशेषज्ञों के मुताबिक केमिकल आग सामान्य आग से कहीं ज्यादा खतरनाक होती है। इसमें विस्फोट का खतरा अधिक रहता है। जहरीले धुएं से सांस की नली तक जल सकती है।



ऐसी आग में बिना तैयारी काम करना आत्मघाती होता है। प्रशिक्षित और अनुभवी टीम के बिना यह काम नहीं किया जा सकता। प्रीतेश के साथ यही लापरवाही हुई।



उठते सवाल

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रीतेश की मौत की जिम्मेदारी नगर निगम प्रशासन स्वीकार करेगा। या हर बार की तरह इस मामले को भी कागजों और बयानों में दबा दिया जाएगा।



जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी या नहीं। ठेकाकर्मियों की सुरक्षा को लेकर नियम बनेंगे या नहीं। इन सवालों का जवाब आना जरूरी है। तभी आगे ऐसी घटनाएं रोकी जा सकेंगी।



पीड़ित परिवार को मुआवजा

मृतक प्रीतेश के परिवार को मुआवजा मिलेगा या नहीं। घायल कर्मियों के इलाज का खर्च कौन उठाएगा। इन मुद्दों पर भी स्पष्टता जरूरी है।



परिवार ने अपना कमाने वाला सदस्य खो दिया है। ऐसे में सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। परिवार को समय पर आर्थिक मदद मिलनी चाहिए।



ये खबरें भी पढ़ें...



जोधपुर केमिकल फैक्ट्री में भीषण आग: धमाके की चपेट में 14 फायरकर्मी



कोचिंग इंस्टिट्यूट हटाने की पैरवी करने वाले एडवोकेट आर डी रस्तोगी को जान से मारने की धमकी



गोपालपुरा में जाम से व्यापारी बेहाल, JDA से कोचिंग संस्थानों को शिफ्ट करने की मांग



जयपुर अग्निकांड: मानव अधिकार आयोग सख्त, कलेक्टर-कमिश्नर से 13 बिंदुओं पर मांगी रिपोर्ट







Tags:
  • नगर निगम की लापरवाही
  • इलाज के दौरान मौत
  • जोधपुर
  • फैक्ट्री में लगी भीषण आग
  • मुआवजा