जोधपुर कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, बाल विवाह रद्द होने के बाद भी पत्नी को मिलेगा भरण-पोषण
News In Short
- जोधपुर पारिवारिक न्यायालय के अनुसार, बाल विवाह रद्द होने के बाद भी पत्नी को मिलेगा गुजारा भत्ता।
- कोर्ट ने 7 साल से नीट की तैयारी कर रहे छात्र की बेरोजगारी की दलील को बैंक स्टेटमेंट देखकर ठुकराया।
- पति के बैंक खाते में मात्र दो महीने में 88 हजार रुपए जमा होने से उसकी वित्तीय संपन्नता सिद्ध हुई।
- अदालत ने सुप्रीम कोर्ट की नजीर का हवाला देते हुए पत्नी के पक्ष में 8,000 रुपए प्रतिमाह का आदेश दिया।
- पीड़िता ने ससुराल पक्ष के पास पत्थर की खान और 95 बीघा जमीन होने का साक्ष्य पेश किया था।
News In Detail
Jodhpur: राजस्थान के जोधपुर स्थित पारिवारिक न्यायालय संख्या-1 ने महिलाओं के अधिकारों को सुरक्षित करने वाला एक बड़ा निर्णय दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी बाल विवाह को कानूनी रूप से शून्य भी कर दिया जाए, तो भी पति अपनी पत्नी को गुजारा भत्ता देने की जिम्मेदारी से बच नहीं सकता। पीठासीन अधिकारी सतीश चन्द्र गोदारा की अदालत ने एक NEET छात्र को अपनी पत्नी को प्रतिमाह 8 हजार रुपए भरण-पोषण देने का आदेश जारी किया है।
आटा-साटा प्रथा के तहत विवाह और दहेज प्रताड़ना
एडवोकेट हेमंत बावेजा के अनुसार, पीड़िता गुड्डी का विवाह 4 मई 2018 को बालेसर निवासी मदन गोपाल के साथ आटा-साटा प्रथा के तहत हुआ था। विवाह के समय दोनों ही पक्ष नाबालिग थे। शादी के कुछ समय बाद ही पत्नी को अनपढ़ होने के ताने दिए जाने लगे और दहेज की मांग को लेकर उसे घर से बाहर निकाल दिया गया। पत्नी ने यह भी आरोप लगाया कि उसे ससुराल में नौकरानी की तरह रखा गया और जबरन उसका गर्भपात भी करवाया गया।
पति का तर्क
पति मदन गोपाल ने अदालत में अपनी दलीलें पेश कीं। उसने कहा कि चूंकि 26 नवंबर 2025 को अदालत इस बाल विवाह को पहले ही शून्य घोषित कर चुकी है, इसलिए वह गुजारा भत्ता देने के लिए कानूनी रूप से बाध्य नहीं है। उसने दावा किया कि वह 2018 से कोटा में रहकर नीट (NEET) की तैयारी कर रहा है और पूरी तरह बेरोजगार है। उसके खर्चे उसके पिता उठाते हैं।
बैंक खातों और सुप्रीम कोर्ट की नजीर ने पलटा फैसला
अदालत ने पति की दलीलों को गहराई से परखने के बाद उन्हें खारिज कर दिया:
बैंक स्टेटमेंट का खुलासा: कोर्ट ने पाया कि पति के बैंक खातों में लाखों रुपए का लेनदेन हुआ है। मात्र 65 दिनों में करीब 88 हजार रुपए जमा हुए थे। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी की कि कोई भी विद्यार्थी लगातार 7 वर्षों तक केवल नीट की तैयारी नहीं करता; बैंक स्टेटमेंट उसकी अच्छी वित्तीय स्थिति का प्रमाण है।
कानूनी नजीर: अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के सुखदेव सिंह बनाम सुखवीर कौर मामले का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि भले ही विवाह निरस्त हो गया हो, लेकिन यदि पक्षकार पति-पत्नी के रूप में साथ रहे हैं, तो पत्नी भरण-पोषण पाने की अधिकारिणी है।
न्यायालय का आदेश
ससुराल पक्ष की 95 बीघा जमीन और पत्थर की खान जैसे तथ्यों तथा पति की वित्तीय संपन्नता को देखते हुए, अदालत ने मदन गोपाल को आदेश दिया कि वह प्रार्थना पत्र पेश करने की तिथि (6 जुलाई 2021) से अपनी पत्नी को 8,000 रुपए प्रतिमाह भरण-पोषण के रूप में भुगतान करे।
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