हाईकोर्ट भवन का गुंबद ढहने की कगार पर, कोर्ट ने लिया स्वप्रेरित प्रसंज्ञान
समझें क्या है पूरा मामला
- जोधपुर में हाईकोर्ट भवन का गुंबद ढहने की कगार पर,हाईकोर्ट ने लिया स्वप्रेरित प्रसंज्ञान
- आईआईटी बॉम्बे की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, 21 मीटर ऊंचा सेंट्रल डोम कभी भी गिर सकता है।
- 5 साल में ही जर्जर हुई इमारत,घटिया सामग्री, खारे पानी और जंग से 40% हिस्से को खतरा।
- शीर्ष अधिकारियों को समन,मुख्य सचिव,पीडब्ल्यूडी सचिव और डीजीपी 24 अगस्त को होंगे व्यक्तिगत पेश।
- तत्काल सुरक्षा के आदेश,सेंट्रल डोम क्षेत्र सील,72 घंटे में मॉक ड्रिल और 24x7 कंट्रोल रूम स्थापित।
राजस्थान हाईकोर्ट (मुख्य पीठ, जोधपुर) ने अपने ही भवन के सेंट्रल डोम (केन्द्रीय गुंबद) और अन्य ढांचागत खामियों के कारण इंसानी जान-माल पर मंडरा रहे आसन्न खतरे को लेकर एक अभूतपूर्व कानूनी कदम उठाया है। हाईकोर्ट ने इस गंभीर स्थिति पर स्व:प्रेरित लेकर जनहित याचिका दर्ज की है।
जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस प्रवीर भटनागर की खंडपीठ ने सोमवार को यह आदेश दिए हैं। कोर्ट ने मामले को राजस्थान हाईकोर्ट मुख्य पीठ,जोधपुर के भवन में स्थित सेंट्रल डोम एवं अन्य खामियों से उपजे स्ट्रक्चरल इंटेग्रिटी, सुरक्षा एवं मानव जीवन पर मंडराते आसन्न खतरे के संदर्भ में। नाम से रजिस्टर्ड करने के निर्देश दिए हैं।
आईआईटी बॉम्बे की रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा
हाईकोर्ट भवन का 21 मीटर ऊंचा सेंट्रल गुंबद बेहद जर्जर स्थिति में पहुंच चुका है। आईआईटी बॉम्बे के एक्सपर्ट के किए गए स्ट्रक्चरल ऑडिट में चेतावनी दी गई है कि गुंबद की स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि यह किसी भी क्षण गिर सकता है। इससे अदालत परिसर में मौजूद जजों, वकीलों, कर्मचारियों और याचिकाकर्ताओं की जान को गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
पांच साल में ही क्षतिग्रस्त होने लगा
गौरतलब है कि जोधपुर स्थित राजस्थान हाईकोर्ट के नए भवन का शिलान्यास 20 अप्रैल 2007 को हुआ था और 2011 से 2013 के बीच मुख्य भवन का निर्माण कार्य पूरा हुआ।
6 दिसंबर 2019 को इस भवन का उद्घाटन भारत के राष्ट्रपति, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया, केंद्रीय कानून मंत्री और मुख्यमंत्री की मौजूदगी में हुआ था। उद्धघाटन के मात्र पांच साल के भीतर ही इमारत का ढांचा बुरी तरह से क्षतिग्रस्त होने लगा है।
पिछले तीन वर्षों में हुई हादसों की श्रृंखला
हाईकोर्ट की खंडपीठ ने दर्ज किया कि यह कोई अकेली घटना नहीं है, बल्कि पिछले कुछ वर्षों में भवन में लगातार निर्माण और रखरखाव की विफलताएं सामने आई हैं। कोर्ट रूम नंबर 2, 9, 16 और जजों के चैंबरों में छत गिरने और फॉल्स सीलिंग ढहने की कई घटनाएं हो चुकी हैं।
इसके अलावा 18 सितंबर 2024 को कोर्ट रूम नंबर 2 में भीषण आग लग गई थी। जांच में पाया गया कि आरएसआरडीसी (RSRDC) की ओर से लगाया गया फायर सेफ्टी सिस्टम हादसे के वक्त बिल्कुल भी काम नहीं कर रहा था। आईआईटी जोधपुर के निरीक्षण में फायर सिस्टम में गंभीर खामियां पाई गईं। ना तो यह तय मानकों के अनुरुप लगाया था और ना ही इसका रखरखाव हो रहा था। इस संबंध में पुलिस स्टेशन कुड़ी भगतासनी में एक एफआईआर भी दर्ज कराई गई थी।
सरियों में लग रहा जंग,प्लास्टर गिरने वाला है
आईआईटी जोधपुर,आईआईटी बॉम्बे और मैसर्स पी.टी.मासे एंड एसोसिएट्स की जांच में पता चला है कि निर्माण में इस्तेमाल सरियों में तेजी से जंग लग रहा है। इमारत के लगभग 40 प्रतिशत हिस्से में कंक्रीट का प्लास्टर गिरने की आशंका बनी हुई है।
जांच रिपोर्ट के अनुसार,बोरवेल के पानी की रासायनिक जांच में क्लोराइड की मात्रा तय सीमा से अत्यधिक पाई गई। इस कारण कंक्रीट और सरियों को नुकसान पहुंच रहा है। आरएसआरडीसी ने आईआईटी बॉम्बे और ऑडिटर्स की सिफारिशों के आधार पर इमारत की मरम्मत और रेट्रोफिटिंग के लिए 57.65 करोड़ रुपये का अनुमानित खर्च तैयार किया है। इसे तीन अलग-अलग श्रेणियों (उच्च, मध्यम और कम गंभीरता) में बांटा गया है
24 अगस्त को इनको हाजिर होने के निर्देश
कोर्ट ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्य सचिव,प्रमुख सचिव (पीडब्ल्यूडी), प्रमुख सचिव (वित्त), प्रबंध निदेशक (आरएसआरडीसी) और डीजीपी सहित आईआईटी बॉम्बे,आईआईटी जोधपुर व ऑडिट एजेंसी के प्रतिनिधियों को 24 अगस्त 2026 को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का आदेश दिया है।
अदालत ने निम्नलिखित अंतरिम सुरक्षा उपाय तुरंत लागू करने के निर्देश दिए हैं-
गुंबद क्षेत्र की घेराबंदी:- सेंट्रल गुंबद के नीचे के गोलाकार खुले क्षेत्र को तुरंत पूरी तरह से सील और घेराबंदी (cordon off) की जाए।
सूखी पोछा लगाने की हिदायत:- नमी को रोकने के लिए पूरे हाईकोर्ट भवन में केवल सूखे पोछे (dry mopping) का उपयोग किया जाए।
सुरक्षा एवं निकासी प्रोटोकॉल:- 48 घंटे के भीतर एक लिखित सुरक्षा एवं आपातकालीन निकासी योजना तैयार की जाए और 72 घंटे के भीतर मॉक ड्रिल आयोजित की जाए।
24x7 कंट्रोल रूम:- रजिस्ट्रार जनरल की देखरेख में चौबीसों घंटे चालू रहने वाला एक समर्पित कंट्रोल रूम स्थापित किया जाए।
जवाबदेही तय करना:-24 अगस्त तक सभी संबंधित अधिकारी विस्तृत हलफनामा दायर करें, जिसमें निर्माण के समय से लेकर अब तक जिम्मेदार अधिकारियों की सूची और जवाबदेही का ब्योरा हो।
न्यायमित्र (Amicus Curiae) दल का गठन
अदालत की सहायता के लिए सीनियर एडवोकेट्स की एक टीम को न्यायमित्र के रूप में नियुक्त किया है। इसमें राजस्थान हाईकोर्ट लॉयर्स एसोसिएशन और एडवोकेट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष व महासचिवों के अलावा सीनियर एडवोकेट रवि भंसाली, जी.आर. पुनिया, धीरेंद्र सिंह, जगमाल सिंह चौधरी, मनीष शिशोदिया, विकास बालिया और राजेश जोशी शामिल हैं।
कोर्ट ने चेतावनी दी है कि इंसानी जिंदगी की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और किसी भी प्रशासनिक देरी या जिम्मेदारी से बचने की कोशिश को बेहद गंभीरता से लिया जाएगा।
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