सालावास STP का 100 MLD पानी पहुंचेगा खेतों तक, किसानों के पास साल में 2-3 फसलें लेने का मौका
समझें क्या है पूरा मामला
- सीवरेज का पानी अब बुझाएगा किसानों के खेतों की प्यास
- जोधपुर में 100 MLD पानी से मिलेगा सिंचाई का नया रास्ता
- साल में 2-3 फसलें, किसानों के लिए बड़ी राहत का प्लान
- इजरायल दूतावास और CEEW की टीम ने किया सर्वे
- जोजरी नदी को भी मिलेगा इस योजना से बड़ा फायदा
नरेश रमेश@जोधपुर। शहर के सीवरेज से निकलने वाला पानी अब किसानों के खेतों की प्यास बुझा सकता है। जोधपुर के सालावास सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) से रोजाना करीब 100 MLD उपचारित पानी आसपास के गांवों तक पहुंचाने की योजना तैयार की जा रही है।
इसके लिए पाइपलाइन नेटवर्क विकसित करने का प्रस्ताव है। दावा है कि योजना जमीन पर उतरती है तो किसानों को सिंचाई के लिए एक वैकल्पिक जल स्रोत मिलेगा और वे साल में 2 से 3 फसलें ले सकेंगे।
इस प्रोजेक्ट पर भारत सरकार, राजस्थान सरकार, नगर निगम जोधपुर, काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (CEEW) और इजरायल दूतावास मिलकर काम कर रहे हैं। अभी परियोजना शुरुआती चरण में है। नगर निगम अगले महीने इसकी विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर राज्य सरकार को भेजेगा।
STP से गांव तक पहुंचेगा पानी
योजना का केंद्र सालावास STP है। यहां सीवरेज के पानी को ट्रीट करने के बाद निकलने वाले पानी को बेकार बहाने के बजाय खेती में इस्तेमाल करने की तैयारी है।
नगर निगम आयुक्त राहुल जैन के मुताबिक बुधवार को इजरायल दूतावास, CEEW और नगर निगम की संयुक्त टीम ने सालावास STP का निरीक्षण किया। इसके बाद टीम सालावास, किसनासर और सरेचा गांव पहुंची। यहां किसानों से बातचीत कर यह समझने की कोशिश की गई कि उन्हें सिंचाई के लिए कितना पानी चाहिए और उपचारित पानी के इस्तेमाल को लेकर उनकी क्या जरूरतें और सुझाव हैं।
नगर निगम के अनुसार किसानों ने सिंचाई के लिए पर्याप्त और नियमित पानी की जरूरत बताते हुए प्रस्ताव का स्वागत किया है।
रोज 10 करोड़ लीटर पानी का हो सकता है इस्तेमाल
100 MLD का मतलब करीब 10 करोड़ लीटर पानी प्रतिदिन है। योजना के मुताबिक इतनी क्षमता के उपचारित पानी को पाइपलाइन के जरिए कृषि क्षेत्र तक पहुंचाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
नगर निगम का कहना है कि निरीक्षण के दौरान उपचारित पानी को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के निर्धारित मानकों के अनुरूप पाया गया। निगम इसी आधार पर कृषि में इसके दोबारा इस्तेमाल की संभावनाओं पर काम कर रहा है।
हालांकि खेतों तक पानी पहुंचाने से पहले विस्तृत परियोजना, पाइपलाइन नेटवर्क, वितरण व्यवस्था और कृषि उपयोग से जुड़ी तकनीकी जरूरतें तय की जाएंगी।
पानी मिला तो 2-3 फसलों का दावा
जोधपुर के आसपास कई इलाकों में खेती के लिए पानी की उपलब्धता बड़ी चुनौती है। निगम का आकलन है कि यदि उपचारित पानी नियमित रूप से किसानों तक पहुंचने लगा तो सिंचाई के लिए नया और स्थायी विकल्प तैयार हो सकता है।
इससे किसान साल में 2 से 3 फसलें ले सकेंगे। निगम को उम्मीद है कि फसलों की संख्या बढ़ने से कृषि उत्पादन और किसानों की आय में भी बढ़ोतरी हो सकती है।
कितना कृषि क्षेत्र इस परियोजना के दायरे में आएगा, कितने किसानों को पानी मिलेगा और पाइपलाइन कितने किलोमीटर बिछाई जाएगी, इसकी तस्वीर विस्तृत कार्ययोजना बनने के बाद ही साफ होगी।
खेती के साथ जोजरी नदी को भी फायदा
प्रोजेक्ट का दूसरा बड़ा पहलू जोजरी नदी है। अभी सालावास STP से निकलने वाले उपचारित पानी का एक हिस्सा नदी की ओर जाता है। प्रस्तावित व्यवस्था में इस पानी को खेती की तरफ मोड़ने से जोजरी में जाने वाले पानी की मात्रा कम हो सकती है।
नगर निगम का मानना है कि इससे नदी में प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों को भी मदद मिलेगी। यानी परियोजना को केवल सिंचाई योजना के रूप में नहीं, बल्कि पानी के पुनः उपयोग, जल संरक्षण और पर्यावरण प्रबंधन से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
अगले महीने सरकार के पास जाएगा प्रोजेक्ट
अभी योजना को अंतिम मंजूरी नहीं मिली है। नगर निगम अगले महीने विस्तृत कार्ययोजना तैयार करेगा और इसके बाद प्रोजेक्ट राज्य सरकार को भेजा जाएगा। इसमें पानी के वितरण, पाइपलाइन और दूसरे तकनीकी पहलुओं की विस्तृत रूपरेखा सामने आने की उम्मीद है।
आयुक्त राहुल जैन का कहना है कि परियोजना सफल रही तो जोधपुर उपचारित सीवरेज पानी को बड़े स्तर पर कृषि से जोड़ने का एक मॉडल विकसित कर सकता है।
फिलहाल इस प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा आंकड़ा 100 MLD है यानी प्रतिदिन करीब 10 करोड़ लीटर उपचारित पानी। अब असली सवाल यह होगा कि इसमें से वास्तव में कितना पानी खेतों तक पहुंचता है, कितने गांव और किसान इससे जुड़ते हैं और योजना पर कितना खर्च आता है।
ये भी पढ़ें :-
10 लाख की ‘सोने की मूर्ति’ निकली अष्टधातु, ग्राहक बनकर पहुंची CID ने पकड़ा आरोपी
हाईकोर्ट भवन घोटाले में तीन और अफसर गिरफ्तार, अब तक 11 पर गिर चुकी है गाज
वेस्टर्न डेडिकेटेट फ्रेट कॉरिडोर पूरा, जानें राजस्थान को इसका कैसे होगा फायदा?
राजस्थान निकाय चुनाव, छोटे शहरों में भारी वोटिंग, अर्णोद 91.98% के साथ सबसे आगे