जोजरी-लूनी नदी प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, 306 फैक्ट्रियां होंगी बंद, दो अधिकारी सस्पेंड
News In Short
सुप्रीम कोर्ट ने जोधपुर के सीईटीपी और 306 उद्योगों को जांच तक बंद रखने के निर्देश दिए।
कैमिकलयुक्त पानी की निकासी के लिए अवैध पाइपलाइन मिलने पर कोर्ट ने नाराजगी जताई।
राज्य सरकार ने दो अधिकारियों को निलंबित और एक वरिष्ठ अधिकारी को किया एपीओ।
विशेष जांच दल (SIT) गठित कर उद्योगों और अधिकारियों की निष्पक्ष जांच शुरू की गई।
नदी में जमा विषैले कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण और संरक्षण जरूरी बताया गया।
News In Detail
पश्चिम राजस्थान में उद्योगों के कैमिकल से जहरीली हो रही जोजरी-लूनी नदी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती दिखाई है। शीर्ष कोर्ट ने जोधपुर औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाले जहरीले पानी के ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) और उससे जुड़े 306 वस्त्र उद्योगों को सुधारात्मक कार्रवाई पूरी होने तक बंद रखने के निर्देश दिए है।
अदालत ने जोजरी नदी में बिना उपचारित कैमिकलयुक्त पानी छोड़ने वाली चार किलोमीटर लंबी अवैध पाइपलाइन मिलने पर गहरी नाराजगी जताई।
अवैध डिस्चार्ज पर सवाल
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने सवाल किया कि इतनी बड़ी अवैध जल प्रणाली संचालकों और सरकारी एजेंसियों की जानकारी के बिना कैसे काम कर रही थी।
उन्होंने यह भी पूछा कि लगातार निगरानी के बावजूद राज्य सरकार और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के स्थानीय अधिकारी क्या कर रहे थे।
सरकार ने तुरंत कार्रवाई शुरू की
अतिरिक्त महाधिवक्ता शिवमंगल शर्मा ने बताया कि 27 मई को समिति के निरीक्षण के दौरान अवैध डिस्चार्ज का मामला सामने आते ही कार्रवाई शुरू कर दी गई।
जयपुर से विशेष टीम जोधपुर भेजी गई। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दो अधिकारियों को निलंबित किया गया है। एक वरिष्ठ अधिकारी को एपीओ किया गया है।
निलंबित अधिकारी: लैब इंचार्ज देवेंद्र सिंह, एईई कुणाल खत्री। रीजनल ऑफिसर कामिनी सोनगरा (APO)
जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई भी शुरू की गई। एफआईआर दर्ज कर विशेष जांच दल (SIT) गठित किया गया है।
जीरो टॉलरेंस नीति
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद सरकार ने स्पष्ट किया कि पर्यावरणीय उल्लंघनों के प्रति सरकार की जीरो टॉलरेंस (Zero Tolerance Policy) है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान की नदियों को पुनर्जीवित करना कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी है।
प्रदूषण नियंत्रण मंडल की अध्यक्ष अपर्णा अरोड़ा ने कहा कि भविष्य में किसी भी अवैध औद्योगिक गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
वैज्ञानिक निस्तारण की आवश्यकता
खंडपीठ ने निर्देश दिए कि अवैध डिस्चार्ज में शामिल सभी जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान कर कार्रवाई की जाए। रिपोर्टों में जोजरी-बांडी-लूनी नदी तंत्र में व्यापक प्रदूषण, नदी तल में विषैले स्लज और मानसून से पहले उसका वैज्ञानिक निस्तारण जरूरी बताया गया।
यदि समय रहते स्लज नहीं हटाया गया तो यह कृषि भूमि, भूजल और आसपास के पर्यावरण तंत्र को प्रभावित कर सकता है।
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