क्या सचिन पायलट की उपेक्षा ही बनी कर्नाटक में बदलाव की वजह, जानिए पूरी कहानी

Mukesh Sharma | May 29, 2026, 18:42 IST
Share
Ashish Bhardwaj - 2026-05-29T181819.773
Photograph: (the sootr)

लगता है कि राजस्थान में सचिन पायलट की उपेक्षा के कारण सत्ता गंवाने वाली कांग्रेस ने बड़ी सीख ले ली है। अपनी पुरानी गलतियों से सबक लेते हुए कांग्रेस ने कर्नाटक में डीके शिवकुमार को सीएम बनाने की राह खोल दी है। जानिए, क्या है पायलट का कर्नाटक कनेक्शन?

Jaipur: कर्नाटक में CM सिद्धारमैया ने गुरुवार को जब पद से इस्तीफा दिया तो यह कोई नियमित नेतृत्व परिवर्तन नहीं था। वे ऐसा करके डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के लिए सीएम बनने का रास्ता तैयार कर रहे थे।

यह उलटफेर कांग्रेस आलाकमान की लंबे सोच-विचार और सधी हुई ऐसी रणनीति का नतीजा था, जिसका जन्म सालों में मिले गहरे जख्मों से हुआ।

आखिरकार गलतियों से सबक ले रही है कांग्रेस

पिछले कई महीनों से सिद्धारमैया सीएम पद को लेकर उठ रहे कयासों पर सवाल पूछने पर बड़े ही आत्मविश्वास से कहते थे कि जब आलाकमान कहेंगे, तब पद छोड़ देंगे।

उनके इस बयान के पीछे शायद उनका यह मानना था कि राहुल गांधी कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन का जोखिम नहीं उठाएंगे। लेकिन आलाकमान ने न केवल उनसे पद छोड़ने को कहा, बल्कि इस बदलाव को सख्ती से लागू किया।

कांग्रेस ने अपनी राजनीतिक रणनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत दिया है कि पार्टी आखिरकार अपनी गलतियों से सबक ले रही है।



Sachin (1)
Sachin (1)


राजस्थान का साया, बगावत के सामने घुटने टेकने की भारी कीमत

कर्नाटक के इस कदम को समझने के लिए राजस्थान के घटनाक्रम को याद करना होगा, जहां पार्टी की अनिर्णय स्थिति ने सब कुछ तबाह कर दिया था।

साल 2018 में सचिन पायलट ने अकेले दम पर राजस्थान में बिखरी हुई पार्टी को फिर से खड़ा किया और कांग्रेस को एक शानदार जीत दिलाई।

लेकिन जब बात इनाम की आई तो उन्हें किनारे कर दिया गया था। आलाकमान ने अनुभवी और खांटी राजनीतिज्ञ अशोक गहलोत के दबाव की राजनीति के आगे घुटने टेक दिए। पायलट को उप-मुख्यमंत्री की भूमिका से संतोष करना पड़ा था।



dv4f4o4o_team-sachin-pilot_650x400_13_July_20
dv4f4o4o_team-sachin-pilot_650x400_13_July_20


विनाशकारी रहे पायलट के गुप्त समझौते के परिणाम

साल 2020 में आलाकमान के फैसले से नाखुश सचिन पायलट ने बगावत कर दी। बगावत का अंत करने के लिए एक समझौता हुआ कि सरकार के आखिरी एक साल में उन्हें सीएम बना दिया जाएगा।

वर्ष 2022 में जब कांग्रेस आलाकमान ने इस गुप्त समझौते या वादे को पूरा करने की कोशिश की तो अशोक गहलोत ने पायलट को सीएम बनने से रोकने के लिए अपने समर्थक विधायकों से इस्तीफे दिलवा दिए। पार्टी में अंदरुनी विद्रोह हो गया।

इस खुली अनुशासनहीनता पर एक्शन करने के स्थान पर डरे हुए आलाकमान ने कदम पीछे खींच लिए थे। गहलोत सीएम बने रहे। लेकिन वफादारी दिखाने तथा भाजपा में शामिल न होने के बावजूद सचिन पायलट हाथ मलते रह गए।

आलाकमान की बात पर भरोसा करने वाले अगली पीढ़ी के नेता के मुकाबले बुजुर्ग नेता को तरजीह देने की कीमत पार्टी को चुकानी पड़ी?

पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल टूट गया और आपस में बंटी कांग्रेस ने 2023 में राजस्थान की सत्ता थाली में सजाकर भाजपा को सौंप दी।



Untitled design (4)
Untitled design (4)


पुराने सबक से फूंक-फूंक कर रखे कदम

अब आलाकमान यह समझ चुका है कि चुनाव से ऐन पहले नेतृत्व परिवर्तन बेहद जोखिम भरा हो सकता है।

राजस्थान में सचिन पायलट और पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह की अनदेखी और गलत फैसलों के नतीजों से घायल कांग्रेस आलाकमान ने कर्नाटक में पूरी सावधानी और सटीकता से काम किया।

2022 में पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह को ऐन चुनाव से पहले हटाने के नतीजे याद थे। पंजाब में की गई ​जल्दबाजी के कारण कांग्रेस को जीती-जिताई बाजी गंवानी पड़ी थी।

छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल और टीएस सिंह देव के बीच ढाई-ढाई साल का फॉर्मूला था, लेकिन बघेल को हटाया नहीं जा सका। पार्टी में अंदरूनी कलह बढ़ी और कांग्रेस चुनाव हार गई।

संकटमोचक हैं डीके शिवकुमार

कर्नाटक और राजस्थान की स्थितियां करीब-करीब एक जैसी ही हैं। आलाकमान को पता है कि सिद्धारमैया कर्नाटक में पिछड़ों के सबसे बड़े नेता हैं।

यह शिवकुमार ही थे, जिसने अहमद पटेल को राज्यसभा चुनाव हराने के लिए मोदी-शाह की हर चाल को फेल किया था।

राजस्थान में भी वह एक बार आलाकमान के निर्देश पर गहलोत-पायलट के संघर्ष में संकटमोचक रह चुके हैं। डी. के. शिवकुमार ने संगठन को जबर्दस्त सक्रिय बनाकर कांग्रेस को 2023 में कर्नाटक में निर्णायक जीत दिलवाई थी।

इसलिए इस बार राहुल गांधी और केंद्रीय नेतृत्व ने सचिन पायलट जैसी गलती को दोहराने से साफ इनकार कर दिया।

उन्होंने व्यावहारिक दृष्टिकोण से विकल्पों का आकलन किया और तय किया कि डीके को इनाम तो दिया ही जाएगा।



65e6de0c7f707-karnatakas-deputy-chief-minister-dk-shivakumar-055539317-16x9
65e6de0c7f707-karnatakas-deputy-chief-minister-dk-shivakumar-055539317-16x9


वफादारी और मेहनत का सम्मान

पिछले कई सालों में कांग्रेस के कई बड़े और युवा नेता भाजपा में शामिल हुए हैं। क्योंकि उन्हें लग रहा था कि पुराने क्षत्रपों के दबाव में आलाकमान को उनकी परवाह नहीं है।

डीके शिवकुमार हर मुश्किल वक्त में पार्टी के साथ खड़े रहे। ईडी, आईटी और सीबीआई तक का सामना किया और अपनी पूरी ताकत झोंक दी।

आलाकमान को यह समझ चुका था कि यदि शिवकुमार को उनका हक नहीं मिला तो पूरे देश के कार्यकर्ताओं में एक गलत संदेश जाएगा।

भविष्य की रणनीति

दरअसल, सिद्धारमैया पहले ही घोषणा कर चुके थे कि वह 2028 में विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। इसलिए पार्टी ने माना कि सिद्धारमैया को जब अगले चुनाव से कुछ पाने की आशा ही नहीं है तो उन पर दांव लगाना राजनीतिक भूल होगी।

इसलिए शिवकुमार जैसे ऊर्जावान नेता को कमान सौंपना बेहतर है जो 2028 में अपने मुख्यमंत्री पद को बचाए रखने के लिए पूरी जान लगा देंगे।

आलाकमान ने राजस्थान के विपरीत कर्नाटक में सख्त रुख अपनाया। सिद्धारमैया को फैसले की जानकारी दी गई और बेहद अनुशासित तरीके से नेतृत्व परिवर्तन सुनिश्चित किया।

राहुल गांधी की आक्रामक रणनीति हैरान करने वाली

कर्नाटक का नेतृत्व परिवर्तन राहुल गांधी के आक्रामक और तेजी से फैसले लेने की रणनीति से पार्टी नेता और राजनीतिक विश्लेषक हैरान हैं।

तमिलनाडु में द्रमुक (DMK) के साथ अपना पुराना गठबंधन तोड़कर अभिनेता से राजनेता बने विजय की पार्टी टीवीके (TVK) से हाथ मिलाने से लेकर, केरल में केसी वेणुगोपाल के स्थान पर जनता की पसंद माने जाने वाले वीडी सतीशन को तरजीह देने में आलाकमान अब फैसलों में गजब की तेजी दिखा रहा है।



2039489-aa-7185977
2039489-aa-7185977


गलतियों के साये से बाहर निकली कांग्रेस

डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाकर कांग्रेस ने आखिरकार यह तो स्वीकार कर लिया है कि अपने अतीत को प्रसन्न रखने के लिए भविष्य को दांव पर नहीं लगाया जा सकता। और न ही कोई राजनीतिक दल ऐसा करके लंबे समय तक जिंदा रह सकता है।

अब देखना यह होगा कि क्या यह सोची-समझी रणनीति कर्नाटक में कांग्रेस को मजबूत बनाए रखेगी? लेकिन पार्टी के इस फैसले ने यह जरूर साबित कर दिया है कि पार्टी अब राजस्थान की गलतियों के साये से बाहर निकल चुकी है।

ये खबर भी पढे़:-

अमेरिका में बैठी महिला को कोर्ट में हाजिर होने का दिया सिर्फ 8 दिन का वक्त, यह कैसा समन?

असफलता की पांच सीढ़ियां चढ़कर IPS बने इंदौलिया, हिन्दी के युवाओं के लिए प्रेरणा के प्रतीक

राजस्थान में NEET परीक्षा को लेकर हाई-अलर्ट, वायु सेना संभालेगी पेपर की कमान

SOG की बड़ी कार्रवाई, फर्जी ताइक्वांडो सर्टिफिकेट मामले में एक और अभ्यर्थी गिरफ्तार







Tags:
  • सचिन पायलट
  • राहुल गांधी
  • भूपेश बघेल
  • CM सिद्धारमैया
  • अशोक गहलोत
  • टीएस सिंह देव
  • डीके शिवकुमार
  • अहमद पटेल
  • DMK
  • कैप्टन अमरिंदर सिंह
  • कर्नाटक का नेतृत्व परिवर्तन
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग

By Atul Dwivedi

MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री

By Ramanand Tiwari

एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा

By Ramanand Tiwari

मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन

By Jitendra Shrivastava

मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें

By Sanjay Dhiman

mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे

By Sanjay Gupta

झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा

By Arun Tiwari

बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा