फर्जी बीमा क्लेम पर सरकारी डॉक्टर गिरफ्तार, 2 करोड़ का झूठा दावा पेश करने का है आरोप
News In Short
- चित्तौड़गढ़ में 2 करोड़ के बीमा घोटाले में डॉ. सुग्रीव मीणा को किया गिरफ्तार।
- मृतक की मौत की वजह टीबी बीमारी थी, झूठी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में करंट बताया।
- मृतक का बेटा नारायणलाल जाट भी फर्जीवाड़े में रहा था शामिल।
- पुलिस अब फर्जी बीमा क्लेम के पूरे संगठित नेटवर्क का पता लगा रही है।
- बीमा कंपनी की शिकायत और जांच के बाद मामला सामने आया।
News In Detail
राजस्थान पुलिस ने चित्तौड़गढ़ के कपासन में सरकारी डॉ. सुग्रीव मीणा को गिरफ्तार किया। उन पर करीब 2 करोड़ के फर्जी बीमा क्लेम में शामिल होने का आरोप है।
जांच में खुलासा हुआ कि मृतक की असली बीमारी को छुपाकर बिजली के करंट से हुई मौत बताई गई, ताकि बीमा कंपनियों से करोड़ों रुपए का क्लेम लिया जा सके।
इंश्योरेंस कंपनी ने दी थी शिकायत
यह मामला वर्ष 2024 में केयर हेल्थ इंश्योरेंस लिमिटेड के कॉर्पोरेट मैनेजर की शिकायत पर शुरू हुआ। जांच में पता चला कि बद्रीलाल जाट की मृत्यु टीबी और सीओपीडी जैसी गंभीर बीमारियों के कारण हुई थी।
उनके पुत्र नारायणलाल जाट ने बीमा राशि हड़पने के लिए मृत्यु का कारण करंट लगना बताया। पुलिस और बीमा कंपनियों को गुमराह करने की साजिश की गई।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में हेरफेर
जांच में सामने आया कि बद्रीलाल जाट को 23 सितंबर 2023 को सुबह 3 बजे अस्पताल लाया गया था। डॉ. सुग्रीव मीणा ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। लेकिन बाद में तैयार की गई पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत का कारण बिजली का करंट बताया गया।
लेकिन पुलिस जांच में पाया गया की रिपोर्ट में कई विरोधाभासी तथ्य पाए। इससे स्पष्ट हुआ कि बीमा क्लेम को मजबूत करने के लिए जानबूझकर झूठी रिपोर्ट तैयार की गई थी।
मृतक का बेटा पहले ही गिरफ्तार
मामले में मृतक के पुत्र नारायणलाल जाट को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। अब साक्ष्यों के आधार पर डॉ. सुग्रीव मीणा को भी सलाखों के पीछे भेजा गया है। पुलिस इस गिरोह के अन्य सहयोगियों और नेटवर्क की भूमिका की जांच कर रही है।
क्यों नहीं मिलता क्लेम
पुरानी बीमारी छिपाना
यदि पॉलिसी (Policy) लेने के समय मरीज को पहले से टीबी थी और इसे फॉर्म में सही से नहीं बताया गया, तो कंपनी क्लेम रिजेक्ट कर सकती है।
वेटिंग पीरियड
कुछ स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों में टीबी जैसी बीमारियों के इलाज के लिए 2–4 साल का वेटिंग पीरियड होता है। इस अवधि के दौरान दावा करने पर पैसा नहीं मिलता।
गलत निदान या इलाज में लापरवाही
यदि अस्पताल (Hospital) के दस्तावेज़ में टीबी के इलाज या साइड-इफेक्ट्स में बड़ी लापरवाही पाई जाती है, तो क्लेम रोक दिया जा सकता है।
टर्म प्लान में 'क्रिटिकल इलनेस' शामिल न होना
लाइफ इंश्योरेंस में सामान्य मृत्यु तो कवर होती है, लेकिन हेल्थ इंश्योरेंस में टीबी के इलाज का खर्च केवल ‘क्रिटिकल इलनेस राइडर’ लेने पर कवर होता है।
अगर क्लेम रिजेक्ट हो जाए तो क्या करें?
अधिकारों को समझें
अगर टीबी पुरानी थी, लेकिन मौत का असली कारण कोई और है, जैसे हार्ट अटैक, तो कंपनियां क्लेम रोक नहीं सकतीं। ऐसे मामलों में आप उपभोक्ता फोरम में दावा चुनौती दे सकते हैं।
अगर बीमा क्लेम खारिज हो जाये तो क्या करे
यदि कंपनी सीधे क्लेम खारिज कर देती है, तो आप बीमा लोकपाल के पास शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
स्वास्थ्य बीमा लेते समय किस बात का ध्यान रखे
भविष्य में किसी भी परेशानी से बचने के लिए, जीवन या स्वास्थ्य बीमा लेते समय अपनी सभी पुरानी और मौजूदा बीमारियों (जैसे टीबी, डायबिटीज) की जानकारी सच-सच दें।
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