जयपुर में करणी सेना की रैली पर लाठीचार्ज: UGC के नए नियमों को वापस लेने की मांग
समझें क्या है पूरा मामला
- जयपुर में यूजीसी के नए नियम वापस लेने की मांग को लेकर करणी सेना ने रैली निकाली।
- रैली के दौरान प्रदर्शनकारियों और डीसीपी वेस्ट प्रशांत किरण के बीच धक्का-मुक्की हुई।
- भीड़ को काबू में करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया और वाटर कैनन चलाई।
- करणी सेना अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना ने पुलिस पर बल प्रयोग के आरोप लगाए।
- यह रैली 24 दिन पहले शुरू हुई 'सवर्ण न्याय यात्रा' का हिस्सा थी, जो रविवार को जयपुर पहुंची।
यूजीसी के नए नियमों के विरोध में सोमवार को जयपुर में निकली श्री राजपूत करणी सेना की रैली के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हो गया। हालात बिगड़ने पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया, जिससे कई कार्यकर्ता घायल हो गए। इससे पहले, रैली में शामिल प्रदर्शनकारियों और डीसीपी वेस्ट प्रशांत किरण के बीच धक्का-मुक्की हुई। पुलिस ने भीड़ को काबू में करने के लिए वाटर कैनन भी चलाई।
रैली कहां से कहां तक निकली
रैली रावण गेट यानी कालवाड़ रोड से शुरू हुई। इसका अंतिम पड़ाव कलेक्ट्रेट सर्किल था। यूजीसी रोल बैक और सवर्ण समाज की कई मांगों को लेकर यह रैली आयोजित की गई थी।
कलेक्टर को ज्ञापन देने के बजाय प्रदर्शनकारी बीजेपी कार्यालय की ओर बढ़ने लगे। पुलिस ने उन्हें खासाकोठी पुलिया के नीचे रोक लिया। इससे पहले कालवाड़ पुलिया पर भी बैरिकेड्स लगाए गए थे। प्रदर्शनकारियों ने इसे हटाकर आगे की ओर कूच किया।
पुलिस और कार्यकर्ताओं में झड़प
चौमूं पुलिया पर भी कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई। रैली का नेतृत्व श्री राजपूत करणी सेना के अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना कर रहे थे। कलेक्ट्रेट सर्किल पहुंचने पर ज्ञापन सौंपा जाना था, लेकिन यह संभव नहीं हो सका।
इसके बाद भीड़ बीजेपी कार्यालय की तरफ बढ़ने लगी। पुलिस ने भीड़ को रोकने की कोशिश की। इसी दौरान महिपाल सिंह मकराना की भी पुलिस के साथ धक्का-मुक्की हुई। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया। इसके बावजूद भीड़ आगे बढ़ती रही।
एक पुलिसकर्मी महिपाल सिंह मकराना को कॉलर से पकड़कर ले जाता हुआ भी नजर आया। लाठीचार्ज के विरोध में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी खासाकोठी पुलिया के नीचे सड़क पर बैठ गए।
महिपाल सिंह मकराना का बयान
महिपाल सिंह मकराना ने कहा कि उन्होंने 800 किलोमीटर की यात्रा पूरी तरह अहिंसात्मक तरीके से की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी बहन-बेटियों पर वाटर कैनन चलाई गई और डंडे भी मारे गए। उन्होंने यह भी कहा कि एक साथी का पैर टूट गया।
24 दिन पहले शुरू हुई थी यात्रा
यूजीसी के नए नियमों को वापस लेने की मांग को लेकर यह यात्रा करीब 24 दिन पहले शुरू हुई थी। महिपाल सिंह मकराना जयपुर से रवाना होकर बीकानेर के देशनोक स्थित करणी माता मंदिर पहुंचे थे। वहीं से 'सवर्ण न्याय यात्रा' की शुरुआत हुई थी।
यह यात्रा कई जिलों से गुजरते हुए रविवार को जयपुर पहुंची। शनिवार को जयपुर आने से पहले महिपाल सिंह मकराना की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी और वे बेहोश हो गए थे। इसके बावजूद उन्होंने यात्रा बीच में नहीं छोड़ी और व्हीलचेयर पर बैठकर आगे बढ़ते रहे।
क्यों हो रहा है यूजीसी नियमों का विरोध
यूजीसी के नए नियमों के तहत हर कॉलेज में इक्वल ऑपर्च्युनिटी सेंटर (Equal Opportunity Centre) और इक्वलिटी कमेटी बनानी होगी। किसी छात्र के साथ भेदभाव की शिकायत आने पर 24 घंटे के भीतर बैठक करनी होगी। 15 दिन में जांच रिपोर्ट तैयार करनी होगी।
अगर कोई कॉलेज इन नियमों का पालन नहीं करता है तो यूजीसी उसकी ग्रांट रोक सकता है। ऑनलाइन और डिस्टेंस कोर्स भी बंद किए जा सकते हैं। गंभीर मामलों में कॉलेज की मान्यता तक रद्द हो सकती है।
कई छात्र और सामाजिक संगठन इन नियमों का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि सभी वर्गों को इसमें बराबर जगह नहीं दी गई है। झूठी शिकायत करने वालों के खिलाफ कार्रवाई का भी कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है। विरोध करने वालों का मानना है कि इन नियमों से कॉलेजों पर अनावश्यक दबाव बढ़ सकता है।
आखिरकार सोमवार को यात्रा जयपुर में खत्म हुई। प्रदर्शनकारियों ने सफलतापूर्वक कलेक्टर और पुलिस कमिश्नर को ज्ञापन सौंप दिया है।
FAQ
- सवाल 1: जयपुर में श्री राजपूत करणी सेना की रैली पर लाठीचार्ज क्यों हुआ?
जवाब: प्रदर्शनकारी UGC के नए नियमों की वापसी की मांग कर रहे थे। रैली के दौरान पुलिस और कार्यकर्ताओं में कई बार धक्का-मुक्की हुई। इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया। - सवाल 2: श्री राजपूत करणी सेना की सवर्ण न्याय यात्रा कब शुरू हुई थी?
जवाब: यह यात्रा 24 दिन पहले बीकानेर के देशनोक से शुरू हुई थी। यात्रा कई जिलों से गुजरते हुए रविवार को जयपुर पहुंची। - सवाल 3: यूजीसी के नए नियमों का विरोध क्यों हो रहा है?
जवाब: राजपूत करणी सेना का कहना है कि नियमों में सभी वर्गों को बराबर जगह नहीं दी गई। झूठी शिकायत पर कार्रवाई का प्रावधान भी साफ नहीं।
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