दायां हाथ गंवाया, लेकिन हौसला नहीं, जयपुर की केसर पारीक ने जीते 5 गोल्ड
समझें क्या है पूरा मामला
- 14 साल की निशानेबाज केसर पारीक ने रचा इतिहास।
- दायां हाथ गंवाया, लेकिन हौसला नहीं, जीते 5 गोल्ड।
- सड़क हादसे ने छीना हाथ, फिर भी नहीं टूटा हौसला।
- पैरा नॉर्थ जोन शूटिंग में दिखाया अपना शूटिंग का हुनर।
- 45वीं पैरा नॉर्थ जोन शूटिंग चैंपियनशिप का आयोजन देहरादून में हुआ।
ज्योति शर्मा @ जयपुर
जिंदगी में आई एक बड़ी चुनौती ने जयपुर की 14 वर्षीय केसर पारीक का दायां हाथ छीन लिया, लेकिन उसके हौसले को नहीं तोड़ सकी। सड़क हादसे में हाथ गंवाने के बाद जहां कभी निराशा ने घेर लिया था, वहीं आज वही बच्ची एक हाथ से राइफल थामकर निशानेबाजी की दुनिया में अपनी पहचान बना रही है।
केसर ने हाल ही में देहरादून में आयोजित 45वीं पैरा नॉर्थ जोन शूटिंग चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए पांच स्वर्ण और एक रजत पदक अपने नाम किया। उसकी इस उपलब्धि ने न सिर्फ परिवार बल्कि पूरे जयपुर को गौरवान्वित किया है।
9 साल की उम्र में हादसा, फिर शुरू हुई नई जंग
केसर के जीवन में मुश्किल दौर तब आया जब महज नौ साल की उम्र में सड़क हादसे में उसका दायां हाथ चला गया। अचानक आई इस परेशानी ने उसकी जिंदगी बदल दी। शुरुआती दिनों में निराशा और मुश्किलों के बीच उसे भविष्य को लेकर कई सवालों का सामना करना पड़ा।
लेकिन केसर ने हालात के सामने हार मानने के बजाय उन्हें अपनी ताकत बनाने का फैसला किया। इसी जज्बे ने उसे निशानेबाजी की ओर आगे बढ़ाया।
मां ने बढ़ाया हौसला, राइफल बनी नई पहचान
डॉक्टर की सलाह के बाद केसर की मां ने उसे निशानेबाजी से जोड़ने का फैसला किया। शुरुआत में यह सिर्फ एक गतिविधि थी, लेकिन धीरे-धीरे केसर की दिलचस्पी बढ़ती गई और निशानेबाजी उसके जीवन का लक्ष्य बन गई।
एक हाथ से राइफल संभालना आसान नहीं था, लेकिन लगातार अभ्यास और आत्मविश्वास के दम पर उसने इस चुनौती को भी पार कर लिया। आज वह नियमित रूप से शूटिंग की प्रैक्टिस करती है और पढ़ाई के साथ अपने खेल पर भी पूरा ध्यान दे रही है।
आठवीं कक्षा की छात्रा, अब अगला लक्ष्य बड़ी चैंपियनशिप
केसर फिलहाल आठवीं कक्षा में पढ़ाई कर रही है। स्कूल की पढ़ाई के साथ वह नियमित रूप से निशानेबाजी का अभ्यास करती है।
देहरादून में पांच स्वर्ण और एक रजत पदक जीतने के बाद उसका आत्मविश्वास और बढ़ा है। अब केसर का अगला लक्ष्य 7वीं पैरा जोनल चैंपियनशिप में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना है। इसके लिए वह लगातार अभ्यास कर रही है।
केसर की कहानी देती है बड़ा संदेश
केसर पारीक की कहानी सिर्फ पदक जीतने की कहानी नहीं है। यह उस जिद और हिम्मत की कहानी है, जिसने एक बड़ी शारीरिक चुनौती को उसके सपनों के रास्ते में रुकावट नहीं बनने दिया। उसने साबित कर दिया कि निशाना साधने के लिए दोनों हाथ नहीं, बल्कि मजबूत इरादा और अटूट हौसला जरूरी होता है।
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