Asian Para Games 2026 में भारत ने कैसे जीते रिकॉर्ड 114 पदक
Kaushiki | Nov 03, 2026, 12:07 IST
Asian Para Games 2026: भारत के 114 पदक की पूरी कहानी
एशियन पैरा गेम्स का सफर 2010 में चीन के ग्वांगझोऊ से शुरू हुआ। तब भारत को सिर्फ 14 पदक मिले थे। इनमें से स्वर्ण तो एक ही था। दूसरी तरफ Asian Para Games 2026 में भारत ने रिकॉर्ड 114 पदक जीते। टीम में सिर्फ 168 एथलीट थे। यानी हर 100 एथलीट पर करीब 68 पदक आए।
दरअसल खेल के नतीजे सिर्फ मेडल गिनने के लिए नहीं होते। ये बताते हैं कि देश अपने दिव्यांग एथलीटों को कितना मौका दे रहा है। सोचिए, एक स्कूल अपनी क्विज टीम आधी कर देता है। फिर भी पिछली बार से ज्यादा ट्रॉफी लौट आती हैं।
Asian Para Games 2026 में भारत ने ठीक यही कर दिखाया। जापान के Aichi-Nagoya में भारत ने 114 पदक जीते। इनमें 30 स्वर्ण, 35 रजत और 49 कांस्य शामिल हैं। यह एशियन पैरा गेम्स में भारत का अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन है। भारत ने सिर्फ 168 एथलीट भेजे, जबकि हांगझोऊ में 309 गए थे। तब भारत पदक तालिका में चौथे स्थान पर आया था।
एशियन पैरा गेम्स का सफर 2010 में चीन के ग्वांगझोऊ से शुरू हुआ। तब भारत को सिर्फ 14 पदक मिले। स्वर्ण एक ही था। आप India medal tally की रफ्तार देखिए। 2014 में 33 पदक आए, जिनमें तीन स्वर्ण थे। 2018 में जकार्ता में आंकड़ा 72 पर पहुंचा। स्वर्ण बढ़कर 15 हो गए।
Hangzhou Para Games में भारत ने 108 पदक और 27 स्वर्ण जीते। ये खेल नाम से 2022 के थे, पर असल में 2023 में हुए। पहले तालिका में 111 पदक दर्ज थे। तीन पदक डोपिंग उल्लंघन के कारण वापस ले लिए गए।
यानी 16 साल में पदक आठ गुना हो गए। लेकिन इस बार कहानी में एक नया मोड़ था। टीम करीब आधी रह गई, और पदक फिर भी बढ़ गए। अब आते हैं असली सवाल पर। टीम छोटी थी, फिर नतीजा इतना शानदार कैसे रहा?
हांगझोऊ में भारत ने 309 एथलीट भेजे थे। इस बार Aichi-Nagoya के लिए सिर्फ 168 गए। खेल भी 17 से घटकर 11 रह गए। यह भारत की मर्जी नहीं, हालात थे। एशियन पैरालंपिक कमेटी (Asian Paralympic Committee) ने हर खेल में कोटा सीमित कर दिया।
शतरंज और कैनोइंग कार्यक्रम से ही बाहर हो गए। भारत ने खुद तायक्वांडो और रोइंग में टीम नहीं उतारी। सबसे गहरी चोट पैरा एथलेटिक्स को लगी। यहां 123 एथलीट सीधे 62 पर आ गए। यानी करीब आधे। इसलिए खेल से पहले 100 पदक भी मुश्किल लग रहे थे।
अब गणित देखिए, पर आसान तरीके से। हांगझोऊ में हर तीन एथलीट पर करीब एक पदक आया था। इस बार डेढ़ से भी कम एथलीट पर एक पदक मिला। यही medals per athlete का पैमाना है और यह लगभग दोगुना हो गया। हर 100 एथलीट पर पदक 35 से बढ़कर 68 हो गए। इसे ऐसे समझिए।
एक क्विज टीम पिछली बार 100 बच्चे लेकर गई और 35 ट्रॉफी लाई। इस बार उतने ही बच्चों पर 68 ट्रॉफी आ रही हैं। टीम छोटी है, पर निशाना हर बार सटीक बैठा। स्वर्ण में भी यही कहानी रही। हर 100 एथलीट पर करीब 9 स्वर्ण से बढ़कर 18। लेकिन रुकिए।
क्या यह तुलना बिल्कुल बराबर की है? हांगझोऊ में भारत ने चार खेलों से 14 पदक जीते थे। शतरंज, कैनोइंग, रोइंग और तायक्वांडो। इस बार ये मैदान में ही नहीं थे। इन्हें हटा दें तो पिछली बार का आंकड़ा करीब 95 बैठता है। फिर भी 114 पदक लगभग 20 प्रतिशत ज्यादा हैं।
पैरा एथलेटिक्स भारत का इंजन है। इस बार 62 एथलीट उतरे और 65 पदक लेकर लौटे। इनमें 22 स्वर्ण थे। पदक एथलीटों से भी ज्यादा। बाकी खेलों ने भी रंग दिखाया। तैराकी से 11 पदक आए। टेबल टेनिस से सात तीरंदाजी से छह और शूटिंग से पांच। इन दोनों ने मिलकर पांच स्वर्ण जीते। 2014 में यहां से एक भी पदक नहीं आया था। जूडो और पावरलिफ्टिंग से दो-दो पदक मिले। बैडमिंटन में थोड़ी गिरावट रही।
पदक 21 से घटकर 16 रह गए। फिर भी पैरा स्पोर्ट्स में तैराकी और टेबल टेनिस अब मजबूत दावेदार बन रहे हैं। उद्घाटन समारोह में प्रमोद भगत और सिमरन शर्मा ने तिरंगा थामा था। रविवार को दिल्ली के IGI (Indira Gandhi International) हवाई अड्डे पर तस्वीर अलग थी। पावरलिफ्टर अशोक कुमार मलिक और कस्तूरी राजमणि समेत कई पदक विजेताओं का स्वागत हुआ।
2010 में टीम में महिलाएं सिर्फ 15 प्रतिशत थीं। हांगझोऊ में यह हिस्सा 37 प्रतिशत तक पहुंचा। इस बार फिर घटकर एक तिहाई रह गया। यानी 167 में से 56। पर पदकों में उनका असर इससे कहीं ज्यादा दिखा।
महिलाओं ने 36 पदक जीते। इनमें 10 स्वर्ण थे। हर 100 महिला एथलीट पर 64 पदक आए। पुरुषों के लिए यह आंकड़ा 66 बताया गया है (यह आंकड़ा अभी confirm नहीं हुआ है)। हांगझोऊ में यही फर्क 29 बनाम 35 का था। यानी फासला लगभग मिट गया।
इस कहानी में चार किरदार हैं। पहले खुद एथलीट। उन्हें पदक चाहिए, पर उससे भी ज्यादा मुकाबले चाहिए। दूसरी, एशियन पैरालंपिक कमेटी, जो कार्यक्रम और कोटा तय करती है। तीसरा चीन, जो पदक तालिका में अब भी सबसे आगे है। और चौथा देश, जो ताली बजा रहा है।
खेल खत्म होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे गर्व का क्षण बताया। IOA (Indian Olympic Association) की अध्यक्ष पीटी उषा ने भी एथलीटों की तारीफ की।
एक खेमा कहता है कि यह बदलाव असली है। कम एथलीट और ज्यादा पदक का मतलब है कि चयन और तैयारी बेहतर हुई। यह भारतीय पैरा स्पोर्ट्स की बढ़ती ताकत है।
दूसरा खेमा कहता है कि जरा रुकिए। पदक तालिका हर बार बदलते कोटा, खेलों और प्रतिद्वंद्वियों से बनती है। चीन अब भी बहुत आगे है। और छोटी टीम का मतलब है कि कम एथलीटों को विदेशी मैदान का अनुभव मिला। तो सच क्या है? शायद दोनों। पदक बढ़े हैं, पर मौके घटे हैं।
लॉस एंजिलिस पैरालंपिक अब करीब दो साल दूर है। Los Angeles Paralympics 2028 में भारत यही रफ्तार रख पाएगा या नहीं, यही असली सवाल है। अगला एशियन पैरा गेम्स 2030 में दोहा में होगा। तब देखना होगा कि कोटा बढ़ता है या नहीं, और भारत कितने एथलीट भेजता है।
हम मान लेते हैं कि ज्यादा पदक का मतलब ज्यादा एथलीट। यहां उल्टा हुआ। पैरा एथलेटिक्स में 62 एथलीटों ने 65 पदक जीते। इसका मतलब है कि कुछ एथलीट एक से ज्यादा पदक लेकर लौटे।
अब आप क्या करें: अपने शहर के स्टेडियम में देखिए कि पैरा एथलीटों के लिए ट्रैक, रैंप और कोचिंग हैं या नहीं।
क्यों अभी: लॉस एंजिलिस पैरालंपिक में सिर्फ करीब दो साल बचे हैं।
आगे देखें: 2030 में दोहा में होने वाला अगला एशियन पैरा गेम्स।
यह खबर सिर्फ खेल की नहीं, बराबरी के मौके की है। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 हर नागरिक को गरिमा के साथ जीने का हक देता है। दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 खेल में भागीदारी को बढ़ावा देने की बात करता है। जब कम एथलीट रिकॉर्ड नतीजे लाते हैं, तो सवाल उठता है कि सुविधाएं और अवसर कितने बढ़े। आंकड़ों को संदर्भ के साथ रखना जरूरी है, ताकि जश्न और जवाबदेही साथ चलें।
FAQs:
Asian Para Games 2026 में भारत ने ठीक यही कर दिखाया। जापान के Aichi-Nagoya में भारत ने 114 पदक जीते। इनमें 30 स्वर्ण, 35 रजत और 49 कांस्य शामिल हैं। यह एशियन पैरा गेम्स में भारत का अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन है। भारत ने सिर्फ 168 एथलीट भेजे, जबकि हांगझोऊ में 309 गए थे। तब भारत पदक तालिका में चौथे स्थान पर आया था।
पहले क्या था
Hangzhou Para Games में भारत ने 108 पदक और 27 स्वर्ण जीते। ये खेल नाम से 2022 के थे, पर असल में 2023 में हुए। पहले तालिका में 111 पदक दर्ज थे। तीन पदक डोपिंग उल्लंघन के कारण वापस ले लिए गए।
यानी 16 साल में पदक आठ गुना हो गए। लेकिन इस बार कहानी में एक नया मोड़ था। टीम करीब आधी रह गई, और पदक फिर भी बढ़ गए। अब आते हैं असली सवाल पर। टीम छोटी थी, फिर नतीजा इतना शानदार कैसे रहा?
आधी टीम, ज्यादा पदक- क्या हुआ और क्यों
शतरंज और कैनोइंग कार्यक्रम से ही बाहर हो गए। भारत ने खुद तायक्वांडो और रोइंग में टीम नहीं उतारी। सबसे गहरी चोट पैरा एथलेटिक्स को लगी। यहां 123 एथलीट सीधे 62 पर आ गए। यानी करीब आधे। इसलिए खेल से पहले 100 पदक भी मुश्किल लग रहे थे।
और फिर नतीजा आया- 114 पदक
एक क्विज टीम पिछली बार 100 बच्चे लेकर गई और 35 ट्रॉफी लाई। इस बार उतने ही बच्चों पर 68 ट्रॉफी आ रही हैं। टीम छोटी है, पर निशाना हर बार सटीक बैठा। स्वर्ण में भी यही कहानी रही। हर 100 एथलीट पर करीब 9 स्वर्ण से बढ़कर 18। लेकिन रुकिए।
क्या यह तुलना बिल्कुल बराबर की है? हांगझोऊ में भारत ने चार खेलों से 14 पदक जीते थे। शतरंज, कैनोइंग, रोइंग और तायक्वांडो। इस बार ये मैदान में ही नहीं थे। इन्हें हटा दें तो पिछली बार का आंकड़ा करीब 95 बैठता है। फिर भी 114 पदक लगभग 20 प्रतिशत ज्यादा हैं।
जहां से आए सबसे ज्यादा पदक
पदक 21 से घटकर 16 रह गए। फिर भी पैरा स्पोर्ट्स में तैराकी और टेबल टेनिस अब मजबूत दावेदार बन रहे हैं। उद्घाटन समारोह में प्रमोद भगत और सिमरन शर्मा ने तिरंगा थामा था। रविवार को दिल्ली के IGI (Indira Gandhi International) हवाई अड्डे पर तस्वीर अलग थी। पावरलिफ्टर अशोक कुमार मलिक और कस्तूरी राजमणि समेत कई पदक विजेताओं का स्वागत हुआ।
महिला एथलीटों की तस्वीर
महिलाओं ने 36 पदक जीते। इनमें 10 स्वर्ण थे। हर 100 महिला एथलीट पर 64 पदक आए। पुरुषों के लिए यह आंकड़ा 66 बताया गया है (यह आंकड़ा अभी confirm नहीं हुआ है)। हांगझोऊ में यही फर्क 29 बनाम 35 का था। यानी फासला लगभग मिट गया।
कौन-कौन शामिल है
खेल खत्म होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे गर्व का क्षण बताया। IOA (Indian Olympic Association) की अध्यक्ष पीटी उषा ने भी एथलीटों की तारीफ की।
दोनों पक्षों की बात
दूसरा खेमा कहता है कि जरा रुकिए। पदक तालिका हर बार बदलते कोटा, खेलों और प्रतिद्वंद्वियों से बनती है। चीन अब भी बहुत आगे है। और छोटी टीम का मतलब है कि कम एथलीटों को विदेशी मैदान का अनुभव मिला। तो सच क्या है? शायद दोनों। पदक बढ़े हैं, पर मौके घटे हैं।
आगे क्या होगा
एक बात जो आप नहीं जानते थे
अब आप क्या करें
क्यों अभी: लॉस एंजिलिस पैरालंपिक में सिर्फ करीब दो साल बचे हैं।
आगे देखें: 2030 में दोहा में होने वाला अगला एशियन पैरा गेम्स।
यह खबर क्यों जरूरी है?
FAQs:
- Asian Para Games 2026 में भारत ने कितने पदक जीते?
भारत ने 114 पदक जीते, जिनमें 30 स्वर्ण, 35 रजत और 49 कांस्य हैं। भारत चौथे स्थान पर रहा। यह एशियन पैरा गेम्स में उसका अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन है। - इस बार भारत ने कम एथलीट क्यों भेजे?
कोटा सीमित था और शतरंज व कैनोइंग कार्यक्रम से हट गए। भारत ने तायक्वांडो और रोइंग में टीम नहीं भेजी। इसलिए 309 की जगह 168 एथलीट गए। - Asian Para Games 2026 कहां और कब हुए?
ये खेल जापान के Aichi-Nagoya में 18 से 24 अक्टूबर 2026 तक हुए। अगला एशियन पैरा गेम्स 2030 में दोहा में होगा।
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