पासपोर्ट और बोर्डिंग पास दिखाने की झंझट होगी कम: अब एयरपोर्ट पर चेहरे से होगी पहचान, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में आएगी डिजी यात्रा
Arohi Raj | Sootr Creatives | Nov 02, 2026, 11:49 IST
हवाई अड्डे की लंबी कतारों से राहत मिल सकती है।
विदेश जाने वाले भारतीयों के लिए अच्छी खबर है। अब एयरपोर्ट पर बार-बार पासपोर्ट निकालने की परेशानी कम होगी। बोर्डिंग पास दिखाने की जरूरत भी कम पड़ सकती है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय और डिजी यात्रा फाउंडेशन ने नई पहल की है। बता दें डिजी यात्रा इस परेशानी को कम करने की तैयारी में है। अब चेहरे की पहचान से यात्रियों की पहचान की जाएगी।
इससे एयरपोर्ट पर एंट्री और बोर्डिंग की प्रक्रिया आसान हो सकती है। दोनों ने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए डिजी यात्रा का ट्रायल शुरू किया है। यह ट्रायल नवंबर से दिसंबर 2026 तक चलेगा। इसे देश के सात हवाई अड्डों पर चलाया जाएगा।
खबरों के मुताबिक, डिजी यात्रा में चेहरे की पहचान से यात्रियों की जांच होती है। इसके लिए एयरपोर्ट पर खास मशीनें लगाई जाती हैं। इन्हें बायोमेट्रिक ई-गेट कहा जाता है। ये मशीनें एयरपोर्ट के अलग-अलग हिस्सों में लगी होती हैं। इनमें एंट्री गेट, सिक्योरिटी चेकपॉइंट और बोर्डिंग गेट शामिल हैं।
जानकारी के मुताबिक, इन गेट पर लगे कैमरे यात्री का चेहरा स्कैन करते हैं। इसके बाद स्कैन का मिलान पहले से दर्ज जानकारी से होता है। अगर दोनों का मिलान सही मिलता है, तो गेट खुल जाता है। इस तरह यात्री बिना बार-बार कागजात दिखाए आगे बढ़ सकते हैं। इससे एयरपोर्ट पर जांच की प्रक्रिया आसान हो सकती है।
डिजी यात्रा का इस्तेमाल करने के लिए पहले रजिस्ट्रेशन करना होता है। इसके लिए यात्रियों को डिजी यात्रा ऐप डाउनलोड करना होगा। घरेलू उड़ानों के लिए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पहले से मौजूद है। इसमें मोबाइल नंबर और आधार की मदद ली जाती है। इसके साथ एक साफ सेल्फी भी अपलोड करनी होती है।
जानकारी के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के ट्रायल में ई-पासपोर्ट से वेरिफिकेशन की बात है। ई-पासपोर्ट में एक खास चिप लगी होती है। इसी चिप में यात्री की जरूरी जानकारी दर्ज रहती है। पासपोर्ट या आधार नंबर दर्ज करना पड़ सकता है। यात्रा से पहले बोर्डिंग पास शेयर करने का तरीका भी बताया गया है।
हालांकि, अंतरराष्ट्रीय ट्रायल की पूरी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया अभी स्पष्ट नहीं है। इसलिए यात्रियों को आधिकारिक निर्देशों का इंतजार करना चाहिए।
जानकारी के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए यह सुविधा सभी को नहीं मिलेगी। फिलहाल इसका फायदा पात्र भारतीय नागरिक ही उठा सकेंगे। इसके लिए यात्रियों के पास चिप वाला ई-पासपोर्ट होना जरूरी है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह सुविधा चुनिंदा उड़ानों पर ही मिलेगी।
इसमें एयर इंडिया और इंडिगो की उड़ानों का भी जिक्र है। यानी हर अंतरराष्ट्रीय उड़ान में यह सुविधा उपलब्ध नहीं होगी। जिस एयरपोर्ट पर यह सेवा शुरू नहीं होगी, वहां इसका इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। इसलिए यात्रा से पहले सुविधा की उपलब्धता जरूर जांच लें।
खबरों के मुताबिक, डिजी यात्रा में चेहरे की पहचान से वेरिफिकेशन किया जाएगा। इससे यात्रियों की जांच में लगने वाला समय कम हो सकता है। जानकारी में कुछ सेकंड में वेरिफिकेशन होने की बात कही गई है। हालांकि, इसकी पुष्टि करने वाला कोई आंकड़ा अभी सामने नहीं आया है।
डेटा सुरक्षा को लेकर भी कुछ दावे किए गए हैं। बताया गया है कि यात्रियों का डेटा एन्क्रिप्टेड रहेगा। इसके अलावा डेटा 24 घंटे में अपने आप डिलीट होने की बात है। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए डेटा सुरक्षा से जुड़े नियमों की स्पष्ट जानकारी जरूरी है।
फेशियल रिकग्निशन से फर्जी डॉक्यूमेंट्स की गुंजाइश कम हो सकती है। इस तकनीक में चेहरे का मिलान पहचान के लिए किया जाता है। इससे जांच की प्रक्रिया भी आसान हो सकती है।
डिजी यात्रा शुरू होने के बाद यात्रियों के मन में सवाल हैं। क्या अब हर जगह पासपोर्ट दिखाने की जरूरत नहीं पड़ेगी? रिपोर्ट्स के मुताबिक, बार-बार पासपोर्ट दिखाने की जरूरत कम होगी। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि पासपोर्ट की जरूरत खत्म हो जाएगी।
अंतरराष्ट्रीय ट्रायल में ई-पासपोर्ट से डिजिटल वेरिफिकेशन किया जाएगा। यानी पासपोर्ट की जानकारी पहचान प्रक्रिया से जुड़ी रहेगी। फिलहाल यह साफ नहीं है कि हर जगह पासपोर्ट दिखाना बंद होगा। इसलिए यात्रियों को यात्रा के दौरान पासपोर्ट साथ रखना होगा।
रिपोर्ट के मुताबिक, डिजी यात्रा का ट्रायल नवंबर से दिसंबर 2026 तक चलेगा। यह ट्रायल देश के सात हवाई अड्डों पर होगा। इसके नतीजों के आधार पर आगे का फैसला लिया जाएगा। अगर ट्रायल सफल रहता है, तो सुविधा का विस्तार हो सकता है।
डिजी यात्रा ने अब तक 100 मिलियन यात्राएं पूरी होने की जानकारी दी है। संगठन के मुताबिक, यह सेवा 38 हवाई अड्डों पर उपलब्ध है। हालांकि, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय सेवाओं की स्थिति अलग हो सकती है। अंतरराष्ट्रीय यात्रा में इसका कितना फायदा मिलेगा, यह ट्रायल बताएगा।
FAQs
कैसे काम करती है डिजी यात्रा?
जानकारी के मुताबिक, इन गेट पर लगे कैमरे यात्री का चेहरा स्कैन करते हैं। इसके बाद स्कैन का मिलान पहले से दर्ज जानकारी से होता है। अगर दोनों का मिलान सही मिलता है, तो गेट खुल जाता है। इस तरह यात्री बिना बार-बार कागजात दिखाए आगे बढ़ सकते हैं। इससे एयरपोर्ट पर जांच की प्रक्रिया आसान हो सकती है।
कैसे करना होगा रजिस्ट्रेशन?
जानकारी के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के ट्रायल में ई-पासपोर्ट से वेरिफिकेशन की बात है। ई-पासपोर्ट में एक खास चिप लगी होती है। इसी चिप में यात्री की जरूरी जानकारी दर्ज रहती है। पासपोर्ट या आधार नंबर दर्ज करना पड़ सकता है। यात्रा से पहले बोर्डिंग पास शेयर करने का तरीका भी बताया गया है।
हालांकि, अंतरराष्ट्रीय ट्रायल की पूरी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया अभी स्पष्ट नहीं है। इसलिए यात्रियों को आधिकारिक निर्देशों का इंतजार करना चाहिए।
किसे मिलेगी डिजी यात्रा की सुविधा?
इसमें एयर इंडिया और इंडिगो की उड़ानों का भी जिक्र है। यानी हर अंतरराष्ट्रीय उड़ान में यह सुविधा उपलब्ध नहीं होगी। जिस एयरपोर्ट पर यह सेवा शुरू नहीं होगी, वहां इसका इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। इसलिए यात्रा से पहले सुविधा की उपलब्धता जरूर जांच लें।
चेहरे से पहचान का सिस्टम कितना सुरक्षित है?
डेटा सुरक्षा को लेकर भी कुछ दावे किए गए हैं। बताया गया है कि यात्रियों का डेटा एन्क्रिप्टेड रहेगा। इसके अलावा डेटा 24 घंटे में अपने आप डिलीट होने की बात है। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए डेटा सुरक्षा से जुड़े नियमों की स्पष्ट जानकारी जरूरी है।
फेशियल रिकग्निशन से फर्जी डॉक्यूमेंट्स की गुंजाइश कम हो सकती है। इस तकनीक में चेहरे का मिलान पहचान के लिए किया जाता है। इससे जांच की प्रक्रिया भी आसान हो सकती है।
डिजी यात्रा से पासपोर्ट की जांच में क्या बदलेगा?
अंतरराष्ट्रीय ट्रायल में ई-पासपोर्ट से डिजिटल वेरिफिकेशन किया जाएगा। यानी पासपोर्ट की जानकारी पहचान प्रक्रिया से जुड़ी रहेगी। फिलहाल यह साफ नहीं है कि हर जगह पासपोर्ट दिखाना बंद होगा। इसलिए यात्रियों को यात्रा के दौरान पासपोर्ट साथ रखना होगा।
कब तक चलेगा ट्रायल?
डिजी यात्रा ने अब तक 100 मिलियन यात्राएं पूरी होने की जानकारी दी है। संगठन के मुताबिक, यह सेवा 38 हवाई अड्डों पर उपलब्ध है। हालांकि, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय सेवाओं की स्थिति अलग हो सकती है। अंतरराष्ट्रीय यात्रा में इसका कितना फायदा मिलेगा, यह ट्रायल बताएगा।
FAQs
- डिजी यात्रा का अंतरराष्ट्रीय ट्रायल कब से कब तक चलेगा?
डिजी यात्रा का अंतरराष्ट्रीय ट्रायल नवंबर 2026 से शुरू होकर दिसंबर 2026 तक चलेगा। - कौन इस डिजी यात्रा ट्रायल में भाग ले सकेगा?
इस ट्रायल में पात्र भारतीय नागरिक शामिल होंगे जिनके पास चिप वाला ई-पासपोर्ट है। - क्या डिजी यात्रा की प्रक्रिया में पासपोर्ट की आवश्यकता पूरी तरह से खत्म हो जाएगी?
रिपोर्ट्स के अनुसार, डिजी यात्रा से बार-बार पासपोर्ट दिखाने की जरूरत कम होगी, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि पासपोर्ट की आवश्यकता पूरी तरह से खत्म हो जाएगी।
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