तलवार की धार से लगा रक्त-तिलक, फिर 12 साल की बेटी को बनाया उत्तराधिकारी
ऐसे समझें पूरा मामला
- मारवाड़ के पूर्व ठिकाने खैरवागढ़ में बरसों पुरानी शाही परंपरा का निर्वहन।
- मुखिया हरीशचन्द्र सिंह जोधा के निधन के बाद पाग दस्तूर कार्यक्रम हुआ।
- जोधा की पुत्री तेजस्वी कुमारी जोधा को घोषित किया उत्तराधिकारी
- पाग दस्तूर में राजपुरोहित ने तलवार की धार से अपने अंगूठे पर चीरा लगाया।
- अंगूठे से निकले रक्त से तेजस्वी कुमारी के मस्तक पर तिलक कर सौंपी कमान।
मुकेश सोनी@पाली
राजस्थान का मारवाड़ एक बार फिर शाही पल का गवाह बना। पाली जिले के पूर्व ठिकाने खैरवागढ़ में बरसों पुरानी राजपूती परंपरा और विरासत का निर्वहन किया गया।
खैरवागढ़ के पूर्व राजपरिवार के मुखिया हरीशचन्द्र सिंह जोधा के निधन के बाद उनकी पुत्री तेजस्वी कुमारी जोधा को विधि-विधान के साथ उत्तराधिकारी घोषित किया गया है। वह अभी 12 साल की है।
मारवाड़ के इस पूर्व ठिकाने में करीब 65 साल के बाद उत्तराधिकार की यह रस्म निभाई गई।
तलवार की धार से चीरा, फिर लगाया रक्त-तिलक
खैरवागढ़ के पूर्व मुखिया हरीशचन्द्र सिंह जोधा का 78 वर्ष की आयु में निधन हो गया था। वे दो बार सरपंच और एक बार पंचायत समिति सदस्य भी रहे।
उनके निधन के बाद आयोजित पाग दस्तूर कार्यक्रम में शाही परंपराओं को निभाया गया। इस मौके पर जोधपुर के पूर्व महाराजा गजसिंह की ओर से विशेष रूप से पाग (शाही पगड़ी) भेजी गई।
जोधपुर राजवंश के प्रतिनिधियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच इस पाग को तेजस्वी कुमारी के सिर पर सजाया।
ठिकाने के राजपुरोहित शंकर सिंह ने पारंपरिक रीति को निभाते हुए अपनी तलवार की धार से अपने अंगूठे पर चीरा लगाया। इसके बाद अंगूठे से निकले रक्त से तेजस्वी कुमारी के मस्तक पर तिलक कर उन्हें खैरवागढ़ की नई कमान सौंपी।
वैदिक मंत्रोच्चार और गंगाजल से हुआ अभिषेक
पाग दस्तूर की रस्म से पहले विशेष पूजा-अर्चना की गई। हरिद्वार से लाए गए पवित्र गंगाजल से पूरे परिसर को शुद्ध कर तेजस्वी कुमारी का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजन और अभिषेक किया गया।
शंखध्वनि और पारंपरिक गीतों के बीच जब यह रस्म पूरी हुई, तो पूरा परिसर खैरवागढ़ अमर रहे के नारों से गूंज उठा। विभिन्न पूर्व ठिकानों से आए मेहमानों ने नई उत्तराधिकारी को अपनी शुभकामनाएं प्रेषित की।
मारवाड़ और मध्य प्रदेश से आए अतिथि
65 साल बाद हुए इस आयोजन के साक्षी बनने के लिए कई पूर्व रियासतों और ठिकानों के अतिथि खैरवागढ़ पहुंचे।
अतिथियों में भाद्राजून के करणवीर सिंह, आउवा के पुष्पेन्द्र सिंह, भीमालिया के गोपाल सिंह, निमाज के भानुप्रताप सिंह, बलाड़ा के रघुवीर सिंह, जोजावर के चक्रवर्ती सिंह, धामली के भवानी सिंह, मध्य प्रदेश के नारायणगढ़ से भारत सिंह आए।
खैरवागढ़ पाली जिले में एक छोटा गांव है। यह मारवाड़ जंक्शन के नजदीक है। यह रियासतकाल में मारवाड़ का ठिकाना रहा है।
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