लिव-इन पर खाप पंचायत ने लगाया 21 लाख जुर्माना, परिवारों का सामाजिक बहिष्कार
समझें क्या है पूरा मामला
- जालोर में लिव-इन रिलेशनशिप पर खाप पंचायत ने लगाया 21 लाख का जुर्माना।
- बाल विवाह के बाद तलाक लेकर लिव-इन में रहने पर पंचों ने सुनाया फरमान।
- दो महीने की मोहलत, फिर 11 नामजद आरोपियों के साथ 61 लोगों ने सुनाई सजा।
- दोनों परिवारों का हुक्का-पानी बंद, हुआ सामाजिक बहिष्कार, परिवार पहुंचा SP ऑफिस।
- लिव-इन से पूर्व युवती ने लिया था कानूनी तलाक, फिर भी बहिष्कार।
राजस्थान के जालोर जिले के सायला थाना क्षेत्र में एक युवती और युवक के लिव-इन रिलेशनशिप में रहने पर समाज की पंचायत ने 21 लाख रुपए जुर्माने का फरमान सुनाया। युवती का बचपन में बाल विवाह हुआ था जिससे उसने 2024 में तलाक ले लिया था।
पंचायत ने दोनों परिवारों का हुक्का-पानी बंद कर सामाजिक बहिष्कार भी किया। परिवार के 29 जून 2026 को एसपी कार्यालय पहुंचने के बाद जांच शुरू हुई। सायला थाना पुलिस ने मामले में अनुसंधान शुरू कर दिया है।
बाल विवाह, तलाक और फिर लिव-इन
पीड़ित पक्ष के अनुसार युवती का बचपन में बाल विवाह हुआ था। बालिग होने के बाद उसने 2024 में कानूनी तरीके से तलाक लिया और अलग रहने लगी।
इसके बाद 1 नवंबर 2025 से वह अपनी मर्जी से समाज के एक युवक के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रहने लगी।
यह फैसला पंचायत को पसंद नहीं आया। जबकि भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने कई फैसलों में स्पष्ट किया है कि दो बालिग लोगों का साथ रहना कानूनी अपराध नहीं है। लेकिन खाप पंचायत ने इस अधिकार को नहीं माना।
पहले चेतावनी, फिर फरमान
फरवरी 2026 में पंचों ने पहली बार सभा बुलाकर परिवार को चेतावनी दी। युवती को उसके माता-पिता के घर वापस छोड़ने के लिए दो महीने का समय दिया गया। तय समय बीतने पर 20 अप्रैल 2026 को एक पंच के घर पर दोबारा पंचायत हुई। इसमें 11 नामजद आरोपियों समेत करीब 61 लोग शामिल हुए।
इस बैठक में खाप पंचायत ने पूरे परिवार पर 21 लाख रुपए का जुर्माना ठोक दिया। साथ ही हुक्का-पानी बंद कर सामाजिक बहिष्कार का फरमान सुनाया।
थाने से न्याय नहीं मिला, एसपी के पास पहुंचे
पीड़ित परिवार पहले स्थानीय सायला थाने पहुंचा। लेकिन वहां उचित कार्रवाई नहीं हुई। लगातार प्रताड़ना और बहिष्कार से परेशान होकर परिवार 29 जून 2026 को जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचा।
पीड़ित ने नामजद आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की। पुलिस उच्चाधिकारियों के निर्देश पर अब मामले की जांच शुरू हो गई है।
खाप पंचायत का जुर्माना कानूनी रूप से मान्य नहीं
खाप पंचायतों का न तो कोई कानूनी दर्जा है और न ही किसी पर जुर्माना लगाने का अधिकार। ऐसे फरमान सुनाना और उन पर अमल करवाना कानूनी अपराध है। सामाजिक बहिष्कार के लिए दोषी पाए जाने पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं के तहत कार्रवाई हो सकती है।
FAQ
- क्या लिव-इन रिलेशनशिप भारत में कानूनी है?
हां, दो बालिग व्यक्तियों का अपनी मर्जी से साथ रहना भारत में कानूनी है। सर्वोच्च न्यायालय ने कई फैसलों में इसे मूल अधिकारों के तहत माना है। खाप पंचायत का इस पर जुर्माना लगाना खुद अवैध है। - खाप पंचायत का जुर्माना देना जरूरी है क्या?
बिल्कुल नहीं। खाप पंचायतों का कोई कानूनी आधार नहीं है। उनका जुर्माना लगाना या सामाजिक बहिष्कार करना कानूनी अपराध है। पीड़ित पुलिस में शिकायत कर सकते हैं।
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