राजस्थान को मिलेगा यमुना का पानी, बांध बनाने के लिए 6 राज्यों ने दी सहमति
समझें क्या है पूरा मामला
- यमुना नदी का पानी राजस्थान तक पहुंचाने की दिशा में बड़ी सफलता।
- 6 राज्यों ने किशाऊ बांध प्रोजेक्ट के एमओयू के मसौदे पर दी सहमति।
- किशाऊ बांध प्रोजेक्ट का 90 प्रतिशत खर्च केंद्र सरकार करेगी वहन।
- सहमति अमित शाह की अध्यक्षता में दिल्ली में आयोजित बैठक में बनी।
- दशकों पुराने अंतर-राज्यीय जल वितरण विवाद को सुलझने का रास्ता खुला।
Jaipur: यमुना नदी का पानी राजस्थान तक पहुंचाने की दिशा में बड़ी सफलता हाथ लगी है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में दिल्ली में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में छह राज्यों ने किशाऊ बहु-उद्देशीय बांध परियोजना के समझौता ज्ञापन (MoU) के मसौदे पर अपनी सहमति दी।
उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के मध्य इस अहम मसौदे पर सहमति बनने के बाद अब इस परियोजना को अंतिम मंजूरी के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। इस समझौते से दशकों पुराने अंतर-राज्यीय जल वितरण विवाद को सुलझाने का मार्ग प्रशस्त किया है।
बैठक में गृह मंत्री अमित शाह के अलावा हिमाचल के सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर, केंद्रीय मंत्री सीआर पाटिल और विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ मंत्री एवं अधिकारी उपस्थित थे।
हिमाचल की सहमति
निर्णय के अनुसार किशाऊ बहु-उद्देशीय बांध परियोजना के जल घटक (Water Component) के कार्य का 90 फीसदी हिस्सा केंद्रीय सहायता के रूप में केंद्र सरकार वहन करेगी, जबकि शेष 10 प्रतिशत की वित्तीय राशि को छह भागीदार राज्यों द्वारा समान रूप से विभाजित किया जाएगा।
पूर्व में हिमाचल प्रदेश इस परियोजना के तहत अपने हिस्से के 10 प्रतिशत वित्तीय अंशदान को देने पर कुछ आपत्तियां जता रहा था। इसके कारण यह योजना लंबे समय से ठंडे बस्ते में पड़ी हुई थी।
हालांकि, इस बैठक में गृह मंत्री की मध्यस्थता और प्रभावी संवाद के बाद हिमाचल प्रदेश की इस चिंता का निवारण कर लिया गया, जिससे परियोजना को नई गति मिली है।
यमुना बेसिन से राज्यों को जल आवंटन
टोंस नदी पर बनेगा बड़ा बांध
यमुना नदी के ऊपरी बेसिन में पानी की उपलब्धता के लिए मुख्य नदी और उसकी सहायक नदियों पर तीन प्रमुख बांधों का निर्माण प्रस्तावित है। इसमें रेणुकाजी बांध (यमुना नदी पर), लखवार बांध (यमुना नदी पर) और टोंस नदी पर किशाऊ बांध का निर्माण किया जाना है।
किशाऊ बांध परियोजना उत्तराखंड के देहरादून जिले और हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले की सीमा पर टोंस नदी पर प्रस्तावित है। यह एशिया का दूसरा सबसे बड़ा बांध प्रोजेक्ट होगा। इसकी ऊंचाई 236 मीटर और लंबाई 680 मीटर होगी।
इससे न केवल 660 मेगावाट की स्वच्छ हाइड्रोइलेक्ट्रिसिटी का उत्पादन होगा, बल्कि सालाना 1,379 एमयू (Million Units) ग्रीन एनर्जी भी देश को मिलेगी।
सिंचाई, पेयजल और बिजली का अनूठा संगम
इस परियोजना से पैदा होने वाली बिजली का लाभ पूरी तरह से उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश को प्राप्त होगा। यह इन दोनों पहाड़ी राज्यों की आर्थिक उन्नति में रीढ़ की हड्डी साबित होगा।
बांध में एकत्रित जल भंडार से उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान के कृषि क्षेत्रों में सिंचाई सुविधाओं का व्यापक विस्तार होगा। साथ ही राजधानी दिल्ली सहित विभिन्न राज्यों के करोड़ों नागरिकों के लिए शुद्ध पेयजल की निर्बाध आपूर्ति संभव हो सकेगी।
FAQ
- किशाऊ बांध प्रोजेक्ट क्या है और कहां बनेगा?
किशाऊ बहु-उद्देशीय बांध प्रोजेक्ट टोंस नदी पर उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर बनेगा । यह 236 मीटर ऊंचा बांध होगा और 660 मेगावाट बिजली पैदा करेगा । इससे सिंचाई और पेयजल आपूर्ति भी होगी । - राजस्थान को किशाऊ बांध परियोजना से क्या लाभ होगा?
राजस्थान को यमुना बेसिन से 1,917 क्यूसेक पानी मिलेगा। इस पानी का उपयोग पीने और सिंचाई के लिए किया जाएगा। इससे राजस्थान के पूर्वी जिलों को सूखे से राहत मिलेगी। - किशाऊ बांध परियोजना का खर्च कैसे वहन किया जाएगा?
परियोजना के जल घटक का 90% खर्च केंद्र सरकार वहन करेगी । शेष 10% खर्च छह राज्यों को समान रूप से वहन करना होगा । पावर कंपोनेंट का खर्च पानी से फायदा पाने वाले राज्य उठाएंगे ।
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