रेल मार्ग को दहलाने की साजिश, ट्रैक पर रखा लोहे का भारी गार्डर, टला हादसा

Ashish Bhardwaj | Apr 09, 2026, 12:49 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान के कोटा-चित्तौड़गढ़ रेल खंड पर बड़ा हादसा टल गया। इस ट्रेक पर मेवाड़ एक्सप्रेस को बेपटरी करने के लिए लोहे का गार्डर रख दिया, लेकिन लोको पायलट की सूझबूझ से हादसा टल गया।

News In Short

  • कोटा-चित्तौड़गढ़ रेल खंड पर बड़ी साजिश का खुलासा हुआ है।
  • ट्रैक पर लगभग ढाई क्विंटल वजनी लोहे का गार्डर रख दिया था।
  • साजिश मेवाड़ एक्सप्रेस ट्रेन को बेपटरी करने की थी।
  • लोको पायलट की सूझबूझ ने सैकड़ों यात्रियों की जान बचा ली।
  • आरपीएफ और स्थानीय पुलिस ने इलाके की घेराबंदी की।

News In Detail

​Kota: राजस्थान के कोटा-चित्तौड़गढ़ रेल खंड पर बड़ी साजिश का खुलासा हुआ है। असामाजिक तत्वों ने उदयपुर जा रही मेवाड़ एक्सप्रेस को बेपटरी करने के इरादे से रेलवे ट्रैक पर लगभग ढाई क्विंटल (250 किलो) वजनी लोहे का गार्डर रख दिया था। गनीमत रही कि लोको पायलट की सूझबूझ और ट्रेन की देरी ने सैकड़ों यात्रियों की जान बचा ली, वरना एक भीषण रेल हादसा हो सकता था।



​साजिश का घटनाक्रम

​घटना कोटा-चित्तौड़गढ़ रेल मार्ग पर सोनियाणा और चरलिया गांव के बीच ओराई नदी की पुलिया के पास की है। शनिवार रात करीब 3:00 से 3:30 बजे के बीच अज्ञात बदमाशों ने रेल की पटरी पर लोहे का एक बड़ा टुकड़ा लाकर रख दिया। यह टुकड़ा करीब 15 फीट लंबा और अत्यधिक भारी था। साजिशकर्ताओं का निशाना मेवाड़ एक्सप्रेस थी, जो हजरत निजामुद्दीन से उदयपुर की ओर जा रही थी।



​ट्रेन की 'देरी' बनी जीवनदान

​जानकारी के अनुसार मेवाड़ एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय से करीब आधा घंटा देरी से चल रही थी। इसी बीच, ट्रैक पर एक मालगाड़ी गुजरी। मालगाड़ी के लोको पायलट ने अंधेरे में पटरी पर पड़ी संदिग्ध वस्तु को देख लिया और तुरंत इमरजेंसी ब्रेक लगाकर ट्रेन को रोक दिया। मालगाड़ी का इंजन उस लोहे के टुकड़े से टकराया, जिससे वह गार्डर पटरी से नीचे गिर गया। यदि उस समय तेज रफ्तार मेवाड़ एक्सप्रेस वहां से गुजरती, तो इंजन पटरी से उतरकर सीधे नदी में गिर सकता था।



​सतर्कता से टला बड़ा हादसा

लोको पायलट ने तुरंत इस घटना की सूचना कंट्रोल रूम और पारसोली स्टेशन को दी। सूचना मिलते ही रेलवे प्रशासन में हड़कंप मच गया। मेवाड़ एक्सप्रेस को पिछले स्टेशन पर ही करीब एक घंटे के लिए रोक दिया गया।



तकनीकी टीम ने मौके पर पहुंचकर ट्रैक का निरीक्षण किया। आरपीएफ और स्थानीय पुलिस ने इलाके की घेराबंदी की। यदि मालगाड़ी पहले न आती और मेवाड़ एक्सप्रेस समय पर होती, तो टकराने की गति इतनी तीव्र होती कि ट्रेन को संभालना नामुमकिन होता।



​प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई

हादसे की गंभीरता को देखते हुए कोटा मंडल के डीआरएम अनिल कालरा विशेष ट्रेन से मौके पर पहुंचे। साथ ही उदयपुर आईजी गौरव श्रीवास्तव और चित्तौड़गढ़ आईपीएस मनीष त्रिपाठी ने भी घटनास्थल का जायजा लिया। पुलिस का मानना है कि यह किसी अकेले व्यक्ति का काम नहीं हो सकता; इतने भारी गार्डर को पटरी पर रखने के लिए कई लोगों की संलिप्तता की आशंका है।



जांच के दायरे में साजिशकर्ता

रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने अज्ञात बदमाशों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। स्थानीय पुलिस और इंटेलिजेंस टीमें भी सक्रिय हो गई हैं। घटनास्थल के आसपास के गांवों में संदिग्धों की तलाश की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि यह केवल चोरी या शरारत का मामला नहीं, बल्कि सैकड़ों लोगों की जान लेने की एक सोची-समझी साजिश है। ट्रैक पर गश्त तेज कर दी गई है।



ये भी पढे़:-

अब सरकार रखवाएगी बच्चों के नाम, मास्टरजी को दी जिम्मेदारी



बड़े अफसरों के लिए फरमान, जिलों में जाओ और जमीनी हकीकत जानो, हर महीने होंगे चार नाइट स्टे



जयपुर के चार भाजपा विधायकों से नाराज हैं कार्यकर्ता, पार्टी बैठक में लगाए आरोप



जयपुर मेट्रो फेज-2 को कैबिनेट से मिली हरी झंडी, 13 हजार करोड़ रुपये का है प्रोजेक्ट



Tags:
  • लोको पायलट
  • आरपीएफ
  • रेलवे सुरक्षा बल
  • उदयपुर आईजी गौरव श्रीवास्तव
  • कोटा-चित्तौड़गढ़ रेल खंड
  • मेवाड़ एक्सप्रेस
  • आईपीएस मनीष त्रिपाठी