कोटा में 5 प्रसूताओं की मौत पर खुलासा, इंफेक्शन में भी लगा दिए टांके
समझें क्या है पूरा मामला
- कोटा में 5 प्रसूताओं की मौत के अलग-अलग कारण सामने आए, जांच रिपोर्ट सरकार को सौंपी।
- एक गर्भवती की मौत पल्मोनरी एम्बोलिज्म, एक हाइपोवोलेमिया और एक कार्डियक प्रॉब्लम से हुई।
- 4 माह की गर्भवती के बच्चेदानी में इन्फेक्शन के बावजूद टांके लगाने से मौत हुई।
- एक ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का बैच जांच में फेल, कंटेंट शून्य पाया गया था।
- पूर्व सीएम गहलोत ने अस्पताल पहुंचकर मरीजों का हाल जाना और सरकार पर सवाल उठाए।
कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल और जेके लोन हॉस्पिटलमें मई 2026 में 13 दिनों के अंदर सिजेरियन ऑपरेशन डिलीवरी के बाद 5 प्रसूताओं की मौत से हड़कंप मच गया था। अब हाई लेवल जांच कमेटी की रिपोर्ट सामने आई है जिसमें सभी 5 महिलाओं की मौत के अलग-अलग कारण बताए गए हैं।
सूत्रों से प्राप्त रिपोर्ट की जानकारी के अनुसार एक मामले में तो 4 महीने की गर्भवती की बच्चेदानी में इंफेक्शन होने के बावजूद टांके लगाने का चौंकाने वाला खुलासा हुआ है।
इसके अलावा ड्रग डिपार्टमेंट की जांच में अमृतसर की कंपनी के ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन के एक बैच में दवाई का मुख्य घटक ही नहीं मिला। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मंगलवार को SSB ब्लॉक का दौरा कर सरकार और स्वास्थ्य विभाग पर कड़े सवाल उठाए।
13 दिन में गई 5 जिंदगियां
कोटा की पायल, ज्योति, प्रिया, पिंकी और शिरिन, ये वो पांच नाम हैं जो मई 2026 में एक के बाद एक इस दुनिया से चले गए। 5 मई को पायल की मौत हुई। 7 मई को ज्योति, 9 मई को प्रिया, 10 मई को पिंकी और 17 मई को सिर्फ 20 साल की शिरिन की मौत हुई।
सभी की सिजेरियन डिलीवरी हुई थी। सभी सरकारी अस्पताल में आई थीं, जहां उन्हें इलाज मिलना था।
हर मौत की वजह अलग
तीन जांच कमेटियों की रिपोर्ट के आधार पर हाई लेवल कमेटी ने पांचों मौतों के अलग-अलग कारण सरकार को सौंपे हैं।
पहला मामला, पल्मोनरी एम्बोलिज्म: एक प्रसूता की मौत फेफड़ों की धमनी में रुकावट से हुई। यह तब होता है जब शरीर के किसी हिस्से में जमा खून का थक्का टूटकर फेफड़ों तक पहुंच जाता है। गर्भावस्था में यह खतरा सामान्य से कई गुना अधिक होता है।
दूसरा मामला, हाइपोवोलेमिया से मल्टी ऑर्गन फेलियर: एक महिला का शरीर प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव से खून की भारी कमी का शिकार हुआ। इससे हृदय अंगों तक ऑक्सीजन नहीं पहुंचा सका और एक-एक कर सभी अंग बंद होते चले गए।
तीसरा मामला, कार्डियक प्रॉब्लम: एक महिला की मौत हृदय संबंधी जटिलता से हुई। गर्भावस्था में हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। पहले से हृदय रोग होने पर यह स्थिति जानलेवा बन जाती है।
चौथा मामला, पीपीएच: एक महिला की मौत PPH यानी पोस्टपार्टम हेमरेज (PPH – Postpartum Hemorrhage) से हुई। यह प्रसव के बाद गर्भाशय से अत्यधिक रक्तस्राव की स्थिति है। समय पर इलाज न मिले तो मल्टी ऑर्गन फेलियर हो जाता है।
इंफेक्शन में भी लगा दिए टांके
रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। एक मामले में 4 माह की गर्भवती की बच्चेदानी में इंफेक्शन था। इसके बावजूद वहां टांके लगा दिए गए।
चिकित्सा विज्ञान के अनुसार इंफेक्टेड जगह पर टांके लगाने से बैक्टीरिया अंदर बंद हो जाते हैं, मवाद बनता है और इंफेक्शन और तेजी से फैलता है। इसी मामले में इंफेक्शन फैला और मल्टी ऑर्गन फेलियर से मौत हो गई।
कमेटी ने प्रशासनिक और सुपरविजन की कमी को भी मौतों का कारण माना है।
ऑक्सीटोसिन के एक बैच में दवाई ही नहीं थी
ड्रग डिपार्टमेंट ने एक ही कंपनी के ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन के दो बैच की जांच कराई। एक बैच पास हुआ, लेकिन दूसरे में दवाई का मुख्य घटक ही शून्य पाया गया। यह इंजेक्शन अमृतसर की जेकसन लेबोरेटरीज प्राइवेट लिमिटेड का था। बैच नंबर I-7881 था। इसे लोकल स्तर पर खरीदा गया था।
ऑक्सीटोसिन वह जीवनरक्षक दवा है जो प्रसव के बाद रक्तस्राव रोकने के लिए दी जाती है। इंजेक्शन में दवाई न होने का सीधा मतलब है कि जिन प्रसूताओं को यह इंजेक्शन दिया गया, उन्हें कोई सुरक्षा ही नहीं मिली।
हालांकि हाई लेवल कमेटी के सामने ओटी में इंफेक्शन से किसी मौत का सीधा कारण नहीं मिला, जबकि एम्स की टीम ने OT में इंफेक्शन की आशंका जताई थी।
अब तक की कार्रवाई
प्रारंभिक जांच में लापरवाही मानते हुए जनरल सर्जरी के सह आचार्य डॉ. नवनीत कुमार को निलंबित किया गया। सहायक आचार्य डॉ. श्रद्धा उपाध्याय को बर्खास्त किया गया।
सीनियर नर्सिंग अधिकारी गुरजौत कौर और निमेश वर्मा भी निलंबित हुए। स्त्री रोग विभाग के यूनिट हेड डॉ. बीएल पाटीदार और डॉ. नेहा सीहरा को कारण बताओ नोटिस मिले। दोनों अस्पतालों के अधीक्षकों को भी नोटिस जारी हुए।
गहलोत SSB पहुंचे, कई सवाल उठाए
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत मंगलवार को SSB ब्लॉक पहुंचे। उन्होंने भर्ती महिलाओं का हाल जाना। गहलोत ने कहा कि सरकारी अस्पताल में यह हादसा हुआ तो सरकार की पूरी जिम्मेदारी बनती है। FSL (Forensic Science Laboratory) रिपोर्ट को प्राथमिकता से मंगवाया जाए। घायल परिवारों को तत्काल आर्थिक सहायता और मुआवजा मिले। जरूरत पड़े तो दिल्ली-मुंबई के विशेषज्ञों से सलाह लें।
उन्होंने चिकित्सा मंत्री के उस बयान पर भी कड़ा एतराज जताया जिसमें कहा गया था कि महिलाएं अस्पताल में नाचते-गाते नहीं आई थीं। गहलोत ने कहा कि एक जिम्मेदार मंत्री के मुंह से ऐसे असंवेदनशील शब्द शोभा नहीं देते।
FAQ
- कोटा में 5 प्रसूताओं की मौत के क्या कारण सामने आए?
हाई लेवल कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार हर मौत का कारण अलग था। एक में पल्मोनरी एम्बोलिज्म, एक में हाइपोवोलेमिया से मल्टी ऑर्गन फेलियर, एक में कार्डियक प्रॉब्लम, एक में PPH और एक में इंफेक्टेड बच्चेदानी में टांके लगाने से इंफेक्शन फैला। प्रशासनिक और सुपरविजन की कमी भी कारण माना गया। - ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन फेल होने का क्या मतलब है?
ड्रग डिपार्टमेंट की जांच में अमृतसर की कंपनी के ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन के एक बैच में दवाई का मुख्य घटक ही शून्य पाया गया। ऑक्सीटोसिन प्रसव के बाद रक्तस्राव रोकने की जीवनरक्षक दवा है। दवाई न होने से जिन्हें यह दिया गया उन्हें कोई सुरक्षा नहीं मिली।
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