कोटा का किलर ओटी: 2 की मौत के बाद भी नहीं रुका सर्जरी का सिलसिला
News In Short
- कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में दो महिलाओं की मौत, दो अन्य की किडनी फेल।
- हॉस्पिटल प्रशासन ने सर्जन डॉ. श्रद्धा को बर्खास्त किया, तीन अन्य स्टाफ को सस्पेंड किया।
- सिजेरियन डिलीवरी के बाद दी गई 24 दवाओं और उपकरणों के उपयोग पर रोक लगी।
- एक ही इमरजेंसी ओटी में हुई सर्जरी के बाद 4 दिनों में 8 महिलाओं की हालत बिगड़ी।
- जिला कलेक्टर प्राइवेट अस्पताल में पीड़ित महिलाओं से मिले व नि:शुल्क इलाज का आश्वासन दिया।
News In Detail
Kota: राजस्थान के कोटा स्थित न्यू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिलाओं की तबीयत बिगड़ने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब तक इस घटनाक्रम में दो महिलाओं की मौत हो चुकी है, जबकि दो अन्य महिलाओं की किडनी फेल होने के बाद उन्हें प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है। हॉस्पिटल प्रशासन ने एक डॉक्टर को बर्खास्त करते हुए तीन अन्य स्टाफ सदस्यों को निलंबित कर दिया है। वहीं ड्रग कंट्रोल डिपार्टमेंट ने इलाज के दौरान इस्तेमाल की गई 24 दवाओं पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।
8 मई को कलेक्टर ने प्राइवेट हॉस्पिटल का दौरा किया
घटना की गंभीरता को देखते हुए 8 मई की रात करीब 10 बजे जिला कलेक्टर और एडीएम सिटी ने उन प्राइवेट हॉस्पिटलों का दौरा किया, जहां गंभीर हालत में भर्ती महिलाओं को रेफर किया गया था। कलेक्टर ने महिलाओं के परिजनों से बातचीत की, उनके बेहतर इलाज के निर्देश दिए व नि:शुल्क इलाज का आश्वासन दिया।
डॉक्टर बर्खास्त, तीन अन्य निलंबित
हॉस्पिटल प्रशासन ने लापरवाही बरतने वाले चार कर्मियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करते हुए ऑपरेटिंग सर्जन असिस्टेंट प्रोफेसर (गायनेकोलॉजी) डॉ. श्रद्धा की सेवाएं समाप्त कर दी हैं। डॉ. श्रद्धा संविदा पर तैनात थीं। वहीं, इमरजेंसी ओटी के ऑफिसर इंचार्ज एसोसिएट प्रोफेसर (सर्जरी) डॉ. नवनीत शर्मा, ऑपरेशन थिएटर की सिस्टर इंचार्ज गुरजीत कौर और लेबर रूम की सिस्टर इंचार्ज निमेश वर्मा को निलंबित कर दिया गया है।
24 दवाओं और उपकरणों के उपयोग पर रोक
ड्रग कंट्रोल डिपार्टमेंट ने गायनी वार्ड में ऑपरेशन के बाद इस्तेमाल होने वाली 24 तरह की दवाओं और चिकित्सा उपकरणों के उपयोग पर तुरंत रोक लगा दी है। यह वे दवाएं हैं जो सिजेरियन डिलीवरी के बाद संक्रमण या दर्द निवारण के लिए महिलाओं को दी गई थीं। अधिकारियों ने इन दवाओं के सैंपल जांच के लिए लैब भेज दिए हैं।
4 दिन में 8 महिलाओं की हालत बिगड़ी
न्यू मेडिकल हॉस्पिटल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद पिछले 4 दिनों में कुल 8 महिलाओं की हालत अचानक बिगड़ी है। इनमें से पायल और ज्योति नाम की दो महिलाओं की मौत हो चुकी है। बाकी महिलाओं का इलाज जारी है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि 6 महिलाओं की तबीयत बिगड़ने के बाद भी प्रशासन ने दो अन्य महिलाओं (किरण और शिरीन) की सर्जरी उसी इमरजेंसी ओटी (EOT) में की, जिसके बाद उनकी तबीयत भी गंभीर हो गई।
3 मई से शुरू हुआ सिलसिला
पूरा मामला 3 मई से शुरू हुआ। इसके बाद 4 मई के दिन और रात में कई महिलाओं को सिजेरियन डिलीवरी के बाद पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड में भर्ती कराया गया। 4 मई की रात 12 बजे सबसे पहले पायल की तबीयत बिगड़ी, जिसके बाद 48 घंटे के भीतर ही उसकी और ज्योति की मौत हो गई। सभी मरीजों में एक जैसे लक्षण - यूरिन बंद होना, बीपी लो होना, प्लेटलेट्स गिरना और हाथ-पैरों में तेज दर्द - देखने को मिले।
2 अन्य नए मामले
5 मई को हॉस्पिटल में भर्ती हुईं दो अन्य महिलाओं की तबीयत भी बिगड़ी। पहला मामला किरण (26) का है। किरण की सिजेरियन डिलीवरी हुई थी जिसके 18 घंटे बाद यूरिन बंद हो गया और किडनी में इन्फेक्शन हो गया। परिजनों ने बताया कि हॉस्पिटल स्टाफ ने पहले नॉर्मल डिलीवरी का आश्वासन दिया था, लेकिन बाद में सिजेरियन ऑपरेशन कराया गया। तबीयत बिगड़ने पर 8 मई की सुबह 11 बजे उसे प्राइवेट हॉस्पिटल में शिफ्ट किया गया, जहां उसकी डायलिसिस करनी पड़ी। अब तक 40 हजार रुपए से अधिक खर्च हो चुके हैं।
दूसरा मामला शिरीन (20) का है जो छह माह की गर्भवती थी। 5 मई को उसे दर्द के चलते हॉस्पिटल लाया गया, जहां जांच में पता चला कि बच्चेदानी का मुंह खुल गया है। डॉक्टरों ने टांके लगाने की सलाह दी। 6 मई को सर्जरी के बाद शिरीन को वार्ड में शिफ्ट किया गया, लेकिन अगले दिन उसका भी यूरिन बंद हो गया और ब्लीडिंग शुरू हो गई। 7 मई की शाम को उसे डिस्चार्ज करवाकर प्राइवेट हॉस्पिटल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने बॉडी में गंभीर इन्फेक्शन की पुष्टि की। 8 मई को शिरीन की डायलिसिस हुई। अब तक करीब 50 हजार रुपए खर्च हो चुके हैं।
जांच जारी, अब तक कारण स्पष्ट नहीं
हॉस्पिटल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम घटना के कारणों की जांच में जुटी है, लेकिन चार दिन बाद भी यह साफ नहीं हो पाया है कि आखिर महिलाओं की हालत अचानक इतनी गंभीर क्यों हो गई। एडीएम सिटी अनिल कुमार सिंघल ने बताया कि प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती दोनों महिलाओं की हालत फिलहाल स्थिर है, और उनमें बिल्कुल वैसे ही लक्षण हैं, जो पहले वाली छह महिलाओं में देखे गए थे।
जिला कलेक्टर ने प्राइवेट अस्पताल में जाकर महिलाओं की स्थिति की जानकारी ली। अस्पताल को यह निर्देश दिया गया कि महिलाओं से किसी भी तरह का शुल्क नहीं लिया जाए और उनका बेहतर तरीके से किया जाए।
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