ट्रेन से जेवरात से भरा बैग चुराया, गोल्ड लोन लेकर जमा कराई कॉलेज की फीस
समझें क्या है पूरा मामला
- राजस्थान में एक छात्र ने ट्रेन से सहयात्री का जेवरात से भरा बैग चुराया।
- चुराए गहनों को फाइनेंस कंपनी में गिरवी रखकर कॉलेज फीस जमा कराई।
- यह छात्र भोपाल के एक आयुर्वेदिक कॉलेज में डॉक्टरी की कर रहा पढ़ाई।
- छात्र शुरुआत से पढ़ाई में अव्वल रहा, परिवार की तंगी अपराध राह पर ले गई।
Kota: हर वर्ष विद्यालय में अव्वल आता, डॉक्टर बनने की चाहत थी, लेकिन परिवार की आर्थिक तंगी के कारण वह अपराध की राह पर चल पड़ा।
यह कहानी उस छात्र की है, जिसे ट्रेन में एक सहयात्री का बैग चुराने के जुर्म में पुलिस ने गिरफ्तार किया है। उसने कॉलेज की फीस भरने और पिता को कर्ज से निकालने की तड़प में इस वारदात को अंजाम दिया।
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार किया गया आरोपी छात्र मूल रूप से मध्य प्रदेश का निवासी है। उसकी उम्र 21 वर्ष है।
लिया था डॉक्टरी में दाखिला
बचपन से ही पढ़ाई-लिखाई में होनहार इस छात्र ने 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में पूरे क्षेत्र में श्रेष्ठ स्थान प्राप्त किया था।
बेटे के डॉक्टर बनने के संकल्प को देखते हुए उसके गरीब पिता ने साहूकारों से कर्ज लिया। बाद में उसका भोपाल के एक आयुर्वेदिक चिकित्सा महाविद्यालय (मेडिकल कॉलेज) में दाखिला कराया।
दाखिले के बाद बढ़ गई तंगी
दाखिले के बाद परिवार की स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई। कॉलेज की महंगी फीस और बढ़ते खर्चों के कारण पिता पर कर्ज का बोझ बढ़ गया।
आयुर्वेदिक महाविद्यालय की वार्षिक फीस 50 हजार रुपए थी। पीड़ित परिवार अपनी कमाई और मजदूरी से केवल 25 हजार रुपए ही जुटा पाया था।
शेष 25 हजार रुपए की राशि अत्यधिक ब्याज दर पर कर्ज लेकर जमा की गई थी। इसके बाद भी आने वाले सत्र की फीस और कर्ज को समय पर चुकाने का दबाव बना हुआ था। इसी तनाव ने उसे एक झटके में मेधावी छात्र से अपराधी बना दिया।
ट्रेन से उड़ाया जेवरातों का बैग
घटनाक्रम के अनुसार बीते 11 जून को आरोपी छात्र ने कोटा से रामगंजमंडी के बीच देहरादून एक्सप्रेस ट्रेन में बड़ी चोरी की योजना बनाई।
उसने ट्रेन के एम-1 (M-1) कोच में यात्रा कर रहे यात्री राकेश त्रिपाठी के कीमती सामान पर नजर रखी। मौका पाते ही छात्र ने यात्री का सोने-काठ के आभूषणों और भारी नकदी से भरा बैग पार कर दिया।
ट्रेन से उतरकर वह सीधे मध्य प्रदेश के गुना शहर पहुंचा, जहां उसने इस चोरी के माल को ठिकाने लगाने का रास्ता चुना। गुना में उसने एक फाइनेंस कंपनी से संपर्क किया और चोरी किए गए सभी सोने के आभूषणों को गिरवी रखकर गोल्ड लोन ले लिया।
इस गोल्ड लोन से प्राप्त धनराशि का उपयोग उसने अपने पिता के कर्ज को चुकाने में किया। साथ ही बची हुई राशि से अपने मेडिकल कॉलेज की बकाया फीस भी जमा करा दी।
ऐसे आ गया पुलिस गिरफ्त में
छात्र को लगा कि उसने अपनी और अपने परिवार की सबसे बड़ी समस्या का समाधान कर लिया है। वह वापस अपनी पढ़ाई में जुट सकेगा।
फीस जमा करने के बाद जब वह भोपाल लौटने के लिए गुना से कोटा होते हुए रामगंजमंडी स्टेशन पहुंचा तो वहां पहले से सतर्क जीआरपी और स्थानीय पुलिस टीम ने उसे हिरासत में ले लिया।
पुलिस पिछले कई दिनों से ट्रेन में हुई इस बड़ी चोरी के मामले में सीसीटीवी फुटेज और मुखबिरों की मदद से चोर की तलाश कर रही थी।
पूछताछ में रोते हुए सुनाई कहानी
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पूछताछ के दौरान जब आरोपी छात्र से कड़ाई से पूछताछ की गई, तो वह पूरी तरह टूट गया। फूट-फूट कर रोने लगा।
उसने अत्यंत भावुक होकर पुलिस के सामने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसने रोते हुए पुलिस से कहा, मेरे पिता बहुत छोटे किसान हैं। उनके पास इतनी आय नहीं है कि वे मेरी पढ़ाई का भारी-भरकम खर्च उठा सकें। कॉलेज से मेरा नाम कटने का डर और पिता की बेबसी मुझसे देखी नहीं गई, इसलिए मैंने यह कदम उठाया।
पुलिस ने छात्र के कब्जे से चोरी की गई राशि से संबंधित दस्तावेज और बरामदगी की प्रक्रिया शुरू कर दी है। फिलहाल आरोपी छात्र पुलिस की गिरफ्त में है।
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