नशा तस्करों की नई चाल, लेडीज को बना रहे ढाल, 5 साल में 38 महिला तस्कर गिरफ्तार
समझें क्या है पूरा मामला
- महिलाओं को ढाल बना कर हो रही है नशा तस्करी
- कोटा ग्रामीण पुलिस ने दो महिला तस्करों को पकड़ा
- कोटा में जंगल के रास्ते पंजाब जा रही थीं दोनों तस्कर
- पांच साल में 38 महिला तस्कर पकड़ी गई कोटा में
- उद्देश्य परिवार का दिखावा करो, पुलिस को चकमा दो है
कोटा ग्रामीण पुलिस ने दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर दो महिला तस्करों को गिरफ्तार किया है। दोनों लुधियाना, पंजाब की रहने वाली हैं। वे मध्यप्रदेश से 41 किलो डोडा चूरा पंजाब ले जा रही थीं। इसकी कीमत करीब 6.15 लाख रुपए बताई गई है। नशा पान मसाले के बैगों में छिपाकर रखा गया था।
महिलाएं क्यों बन रहीं तस्करी का हथियार?
नशा तस्करों ने एक नई चाल अपनाई है। वे पुलिस की पकड़ से बचने के लिए महिलाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं। तस्करों की सोच सीधी है। अगर गाड़ी में महिला बैठी हो, घर जैसा माहौल दिखे, तो पुलिस कम शक करेगी।
महिलाएं पारिवारिक कपड़े पहनती हैं। घूमने जा रहे परिवार जैसा दिखावा करती हैं। ड्रग्स को घरेलू सामान में छिपाती हैं। कई मामलों में महिलाएं खुद गाड़ी चलाती हैं। इससे किसी को संदेह नहीं होता।
जंगल के रास्ते, पान मसाले में छिपाया नशा
गिरफ्तार दोनों महिलाएं परमजीत कौर और गुलशन कौर बेहद शातिर निकलीं। वे मुख्य सड़क छोड़ जंगलों के सुनसान रास्तों से जा रही थीं। यह रास्ता खतरनाक जरूर था, लेकिन पुलिस नाकाबंदी से बचने के लिए इसे चुना।
41 किलो डोडा चूरा को पान मसाले के बैगों में भरकर रखा गया था। पहली नजर में यह आम सामान लगता था। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक दोनों इतनी सावधान थीं कि पुलिस की गतिविधि दिखते ही गाड़ी रोक लेती थीं। कोटा ग्रामीण पुलिस ने दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के चेचट इलाके में कार्रवाई करके दोनों को दबोचा।
पांच साल में 38 महिला तस्कर पकड़ी गईं
यह कोई अकेला मामला नहीं है। पुलिस के रिकॉर्ड बताते हैं कि पिछले पांच वर्षों में करीब 50 मामलों में 38 महिलाएं ड्रग्स तस्करी में पकड़ी जा चुकी हैं। इनमें राजस्थान, पंजाब और मध्यप्रदेश की महिलाएं शामिल हैं।
कोटा शहर में गुड्डी, शाहिदा, संजुबाई और ममताबाई जैसी महिलाएं कई बार गिरफ्तार हो चुकी हैं। जेल से छूटने के बाद वे फिर इसी धंधे में लौट आती हैं।
पंजाब की बलजीत कौर, जरनैल कौर और करतार कौर को भी लाखों के ड्रग्स के साथ पकड़ा जा चुका है। जोधपुर की पूजा का नाम भी इस सूची में है।
छोटे स्तर से अब अंतरराज्यीय तस्करी तक
पहले महिला तस्कर छोटे स्तर पर काम करती थीं। पुड़िया बेचना, थोड़ा नशा इधर-उधर पहुंचाना। अब तस्वीर बदल गई है। अब महिलाएं सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय कर रही हैं। लाखों रुपए की खेप एक राज्य से दूसरे राज्य पहुंचाई जा रही है। यह नेटवर्क पहले से कहीं ज़्यादा संगठित हो गया है।
पुलिस ने कसी कमर
कोटा और आसपास के इलाकों में बढ़ते मामलों के बाद पुलिस ने निगरानी बढ़ा दी है। विशेष अभियान, खुफिया सूचना तंत्र और नाकाबंदी के ज़रिए इन नेटवर्कों पर लगातार कार्रवाई हो रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि चाहे तस्कर किसी भी रूप में सामने आएं, कानून से बचना मुमकिन नहीं होगा।
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