कुचेरा में चेयरमैन की कुर्सी पर संग्राम, डोटासरा बोले- पुलिस के दम पर जनादेश लूट रही बीजेपी
नागौर की कुचेरा नगरपालिका में चेयरमैन की कुर्सी को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच खींचतान तेज हो गई है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने शुक्रवार को एक्स पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि कांग्रेस के निर्वाचित पार्षद निंबाराम को ले जाने के लिए भारी पुलिस बल भेजा गया। वहीं, कांग्रेस के चेयरमैन प्रत्याशी तेजपाल मिर्धा ने भी सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर पुलिस पर कांग्रेस पार्षद को जबरन ले जाने की कोशिश का आरोप लगाया।
एक दिन पहले तेजपाल मिर्धा ने अपने पार्षदों की गाड़ियों का पीछा करने और हमला करने की कोशिश के आरोप भी लगाए थे। भाजपा इन आरोपों को निराधार बता चुकी।
कुचेरा नगरपालिका की क्या है स्थिति
कुचेरा में यह पूरा विवाद नगरपालिका अध्यक्ष के चुनाव से पहले संख्या बल को लेकर हो रहा। 25 वार्ड वाली नगरपालिका में कांग्रेस के 12, भाजपा के 8 और 5 निर्दलीय पार्षद जीते हैं। यानी किसी भी पार्टी को अपने दम पर बहुमत नहीं मिला। बोर्ड बनाने के लिए 13 पार्षदों का समर्थन जरूरी है। कांग्रेस बहुमत से सिर्फ एक सीट दूर है।
डोटासरा बोले- कुचेरा को पुलिस छावनी बना दिया
राजस्थान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पूरे मामले को लेकर भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।
डोटासरा ने दावा किया कि कुचेरा को पुलिस छावनी में बदल दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के निर्वाचित पार्षद निंबाराम को ले जाने के लिए भारी पुलिस बल भेजा गया। उन्होंने इसे सत्ता और पुलिस के गलत इस्तेमाल से जोड़ते हुए सरकार पर जनादेश को प्रभावित करने की कोशिश का आरोप लगाया।
डोटासरा के मुताबिक निंबाराम और उनकी पत्नी वीडियो जारी कर कह चुके हैं कि वे कांग्रेस के साथ हैं। इसके बावजूद पुलिस कार्रवाई को लेकर उन्होंने सवाल उठाए। उन्होंने यह दावा भी किया कि किसी दूर के रिश्तेदार से एफआईआर दर्ज कराकर पार्षद को ले जाने की कोशिश की जा रही।
कांग्रेस के चेयरमैन प्रत्याशी तेजपाल मिर्धा ने भी शुक्रवार सुबह एक वीडियो एक्स पर शेयर किया है, जिसमें वार्ड नंबर-9 से कांग्रेस के टिकट पर निर्वाचित पार्षद निंबाराम नजर आ रहे। इस वीडियो में निर्वाचित पार्षद निंबाराम को कहते सुना जा सकता कि मुझे लेकर जो शिकायत थाने में दर्ज कराई गई है वो झूठी है। मेरा अपहरण नहीं हुआ। मुझ पर भाजपा के पक्ष में वोट डाले जाने का दबाव बनाया जा रहा। मेरा किसी ने अपहरण नहीं किया।
कांग्रेस प्रत्याशी तेजपाल मिर्धा ने भी पुलिस पर लगाए आरोप
तेजपाल मिर्धा ने भी शुक्रवार को एक्स पर पोस्ट कर पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के दबाव में पुलिस प्रशासन कांग्रेस के जीते हुए पार्षद को जबरन ले जाने की कोशिश कर रहा।
मिर्धा ने कहा कि सुबह बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी पहुंचे। उन्होंने इसे कांग्रेस के पार्षदों पर दबाव बनाने की कोशिश बताया और उनकी सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए। कांग्रेस की ओर से लगातार दूसरे दिन पार्षदों की सुरक्षा और उन्हें अपने साथ ले जाने की कोशिश के आरोप लगाए जा रहे हैं।
एक दिन पहले भी हुआ था चुनाव को लेकर विवाद
यह विवाद गुरुवार को कांग्रेस पार्षदों के शपथ ग्रहण के दौरान शुरू हुआ था। तेजपाल मिर्धा अपने निर्वाचित पार्षदों के साथ कुचेरा नगरपालिका पहुंचे थे। मिर्धा का आरोप है कि इसी दौरान भाजपा से जुड़े कुछ लोगों ने कांग्रेस पार्षदों को अपने साथ ले जाने की कोशिश की।
हालात को देखते हुए वे पार्षदों के साथ कुचेरा से नागौर के लिए रवाना हो गए। उन्होंने आरोप लगाया कि जुंजाला के पास कुछ गाड़ियों ने उनका पीछा किया। उनकी गाड़ियों को टक्कर मारने और हमला करने की कोशिश भी हुई।
मामला बढ़ने के बाद मूंडवा सीओ धर्मवीर जाखड़ पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे थे। इसके बाद पुलिस सुरक्षा के बीच कांग्रेस प्रत्याशी और पार्षदों की गाड़ियों को नागौर पहुंचाया गया। मिर्धा ने नागौर एसपी को ज्ञापन देकर खुद और कांग्रेस पार्षदों के लिए सुरक्षा भी मांगी।
भाजपा ने कहा- हमारे पास पर्याप्त संख्या
भाजपा नेता रिछपाल मिर्धा ने कांग्रेस की ओर से चेयरमैन प्रत्याशी तेजपाल के आरोपों को खारिज किया। उनका कहना है कि पीछा करने और हमला करने की कोशिश के आरोप गलत हैं।
रिछपाल मिर्धा ने दावा किया कि उनके साथ 12 पार्षद हैं और एक निर्दलीय पार्षद भी संपर्क में है। उन्होंने इसी आधार पर सवाल उठाया कि जब बोर्ड बनाने के लिए जरूरी संख्या उनके पास है तो कांग्रेस पार्षदों का पीछा करने की जरूरत क्यों होगी। हालांकि चुनाव नतीजों में भाजपा के टिकट पर 8 पार्षद जीते हैं।
आखिर कुचेरा में क्यों मचा है घमासान?
कुचेरा नगरपालिका में कुल 25 वार्ड हैं। इस बार कांग्रेस ने 12 वार्ड जीते हैं। भाजपा को 8 सीटें मिली हैं, जबकि 5 निर्दलीय चुनाव जीतकर आए हैं। बोर्ड बनाने के लिए 13 पार्षदों की जरूरत है। कांग्रेस अपने दम पर बहुमत से महज एक पार्षद दूर है।
दूसरी तरफ भाजपा को अध्यक्ष बनाने के लिए अपने 8 पार्षदों के अलावा कम से कम 5 अन्य पार्षदों का समर्थन चाहिए। यही गणित निर्दलीय पार्षदों और दोनों खेमों के पार्षदों को बेहद अहम बना रहा।
पिछले चुनाव में कुचेरा कांग्रेस का मजबूत गढ़ था। तब 25 में से कांग्रेस ने 22 सीटें जीती थीं और भाजपा का खाता भी नहीं खुला था। इस बार भाजपा 8 सीटों तक पहुंची है, जबकि कांग्रेस 12 पर रह गई।
अब अध्यक्ष चुनाव से पहले दोनों पक्ष अपने-अपने समर्थन का दावा कर रहे। इसी बीच पार्षदों की सुरक्षा, दबाव और उन्हें अपने खेमे में ले जाने की कोशिश जैसे आरोपों ने कुचेरा की राजनीतिक लड़ाई को और तेज कर दिया है।
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