LDC परीक्षा में नकल मामले में 3 टीचर सस्पेंड, अधीक्षक पर फैसला बाकी
समझें क्या है पूरा मामला
- जैसलमेर LDC भर्ती परीक्षा नकल मामले में 3 कर्मचारी निलंबित।
- मुख्य आरोपी रिलीवर पदम सिंह समेत दो वीक्षकों पर कार्रवाई।
- परीक्षा कक्ष संख्या 10 में नकल की आशंका के बाद जांच शुरू।
- अभ्यर्थी मनु कंवर और आरोपी पदम सिंह जमानत पर बाहर।
- परीक्षा केंद्र अधीक्षक उम्मेद सिंह पर कार्रवाई का फैसला लंबित।
जैसलमेर में एलडीसी भर्ती परीक्षा में नकल कराने का मामला सामने आया है। मुख्य आरोपी रिलीवर पदम सिंह को निलंबित कर दिया गया है। परीक्षा कक्ष संख्या 10 में तैनात दोनों टीचर भीम सिंह और जालम सिंह भी निलंबित हुए हैं। परीक्षा केंद्र अधीक्षक उम्मेद सिंह पर अभी कोई कार्रवाई नहीं हुई है। मामले में अभ्यर्थी और आरोपी दोनों फिलहाल जमानत पर बाहर हैं।
जैसलमेर के एक परीक्षा केंद्र पर एलडीसी (LDC – Lower Division Clerk) भर्ती परीक्षा के दौरान पेपर लीक और अनुचित साधनों के इस्तेमाल की आशंका सामने आई थी। इसके बाद पूरे मामले की जांच शुरू हुई। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर मुकदमा दर्ज कराया गया।
मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) महेश बिस्सा ने यह मुकदमा दर्ज करवाया था। मामला दर्ज होने के बाद पुलिस हरकत में आई। पुलिस ने अभ्यर्थी मनु कंवर और मुख्य आरोपी रिलीवर पदम सिंह को गिरफ्तार किया।
दोनों को न्यायालय में पेश किया गया। पेशी के बाद दोनों को न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया। बाद में दोनों को जमानत मिल गई। फिलहाल अभ्यर्थी मनु कंवर और आरोपी रिलीवर पदम सिंह जमानत पर हैं।
रिलीवर सहित 3 शिक्षक निलंबित
इस पूरे मामले में विभागीय स्तर पर भी कार्रवाई शुरू हो गई है। संयुक्त निदेशक, स्कूल शिक्षा, जोधपुर ने विभागीय कार्रवाई करते हुए रिलीवर पदम सिंह को निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय सीबीईओ (CBEO – Chief Block Education Officer) कार्यालय, पोकरण तय किया गया है।
इसी कार्रवाई में परीक्षा कक्ष संख्या 10 में ड्यूटी देने वाले दोनों वीक्षक भी निलंबित किए गए हैं। इनमें भीम सिंह और जालम सिंह शामिल हैं। दोनों उस दिन उसी कमरे में ड्यूटी पर तैनात थे, जहां नकल की आशंका जताई गई थी।
इस तरह अब तक कुल तीन कर्मचारियों को निलंबित किया जा चुका है। इनमें एक रिलीवर और दो वीक्षक शामिल हैं। तीनों पर विभागीय जांच पूरी होने तक निलंबन की कार्रवाई लागू रहेगी।
केंद्र अधीक्षक पर अब तक कार्रवाई नहीं
मामले में नामजद आरोपी केंद्र अधीक्षक उम्मेद सिंह के खिलाफ अभी तक निलंबन के आदेश जारी नहीं हुए हैं। यह बात कई लोगों को खटक रही है। जब बाकी तीन कर्मचारी निलंबित हो चुके हैं, तो केंद्र अधीक्षक पर देरी क्यों हो रही है, इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं।
विभागीय सूत्रों के अनुसार इसकी एक तकनीकी वजह है। उम्मेद सिंह प्रधानाचार्य पद पर कार्यरत हैं। सेवा नियमों के तहत प्रधानाचार्य के निलंबन का अधिकार सीधे संयुक्त निदेशक के पास नहीं होता। यह अधिकार माध्यमिक शिक्षा निदेशक के पास सुरक्षित है।
इसी वजह से उम्मेद सिंह के मामले में अंतिम फैसला निदेशालय स्तर से ही लिया जाएगा। जब तक निदेशालय से आदेश नहीं आता, तब तक उनके खिलाफ कोई विभागीय कार्रवाई संभव नहीं है।
जिला शिक्षा अधिकारी ने की पुष्टि
जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) महेश बिस्सा ने पूरी कार्रवाई की पुष्टि की है। उनके मुताबिक पुलिस की ओर से दुराचरण से जुड़ी रिपोर्ट मिलने के बाद यह कदम उठाया गया। रिलीवर के न्यायिक अभिरक्षा में रहने और बाद में जमानत मिलने के बाद संयुक्त निदेशक स्तर से निलंबन आदेश जारी किए गए।
उन्होंने यह भी बताया कि रिलीवर पदम सिंह के साथ दोनों वीक्षकों को भी निलंबित किया गया है। पदम सिंह का मुख्यालय अब सीबीईओ कार्यालय, पोकरण रहेगा। आगे की जांच विभागीय स्तर पर जारी रहेगी।
भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी क्यों बनती है बड़ा मुद्दा
राजस्थान में भर्ती परीक्षाओं को लेकर पहले भी कई बार पेपर लीक और नकल के मामले सामने आ चुके हैं। ऐसे मामलों में अभ्यर्थियों की मेहनत और भरोसा दोनों प्रभावित होते हैं। यही वजह है कि किसी भी परीक्षा केंद्र पर गड़बड़ी की आशंका सामने आते ही मामला तेजी से चर्चा में आ जाता है।
सरकारी नौकरी के लिए भर्ती परीक्षा देने वाले लाखों अभ्यर्थियों के लिए पारदर्शिता बेहद जरूरी होती है। किसी एक केंद्र पर गड़बड़ी सामने आने से पूरी परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो जाते हैं। इसी वजह से विभाग को जल्द से जल्द दोषियों पर कार्रवाई करनी पड़ती है।
आगे क्या होगा
फिलहाल मामले में तीन कर्मचारी निलंबित हो चुके हैं और जांच जारी है। केंद्र अधीक्षक उम्मेद सिंह के मामले में फैसला माध्यमिक शिक्षा निदेशक के स्तर पर होना बाकी है। इस फैसले के बाद ही यह साफ होगा कि उन पर भी कार्रवाई होगी या नहीं।
एलडीसी पेपर प्रकरण में विभाग की कार्रवाई को लेकर देरी की चर्चा भी हो रही है। अभ्यर्थी और अभिभावक दोनों इस मामले में निदेशालय के अगले कदम पर नजर बनाए हुए हैं। जांच पूरी होने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर साफ होगी।
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