बाकी 3 दिन क्या गड्ढे खोदने जाते हो, दिलावर ने अधिकारी को फोन पर ऐसा क्यों कहा?
News In Short
- पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने बूंदी जिले की चडी पंचायत का औचक निरीक्षण किया।
- गांव में गंदगी देख मंत्री ने VDO से पूछा- "बाकी तीन दिन क्या गड्ढे खोदने जाते हो?"
- सफाई व्यवस्था में लापरवाही बरतने वाली ठेकेदार फर्म को तत्काल ब्लैकलिस्ट करने का आदेश।
- 2000 की आबादी वाले गांव के स्कूल में महज 6 छात्र देख शिक्षा अधिकारियों को लगाई लताड़।
- मंत्री ने स्पष्ट किया कि योजनाओं में कागजी खानापूर्ति और जनता के पैसे की बर्बादी बर्दाश्त नहीं।
News In Detail
Bundi: प्रदेश के पंचायती राज एवं शिक्षा मंत्री मदन दिलावर शनिवार सुबह अचानक बूंदी जिले के केशवरायपाटन क्षेत्र के औचक निरीक्षण पर पहुंचे। इस दौरान चडी पंचायत में बदहाल सफाई व्यवस्था, गलियों में पसरी गंदगी और सरकारी स्कूलों में नाममात्र के नामांकन को देखकर मंत्री का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया। उन्होंने मौके से ही भर्ती ग्राम विकास अधिकारी (वीडीओ) और शिक्षा विभाग के अधिकारियों की क्लास लगा दी।
VDO को फोन पर लगाई फटकार
निरीक्षण के दौरान जब मंत्री दिलावर ने गांव की गलियों में कचरे के ढेर और गंदगी देखी, तो उन्होंने तुरंत ग्राम विकास अधिकारी को फोन मिलाया। मंत्री ने कड़े लहजे में पूछा, "तुम गांव आते ही नहीं हो क्या? पूरा गांव गंदगी से अटा पड़ा है।"
जब अधिकारी ने सफाई देते हुए कहा कि उसके पास दूसरी पंचायत का अतिरिक्त प्रभार है और वह दोनों जगह दो-दो दिन जाता है, तो मंत्री बिफर पड़े। उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "दो दिन यहां, दो दिन वहां... फिर बाकी तीन दिन क्या गड्ढे खोदने जाते हो?" मंत्री ने साफ किया कि अधिकारी केवल कागजों में सफाई अभियान चला रहे हैं, जबकि धरातल पर स्थितियां इसके उलट हैं।
ठेकेदार फर्म को ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश
निरीक्षण के दौरान सफाई ठेके और सफाई कर्मियों के भुगतान में अनियमितताओं की शिकायतें भी सामने आईं। मंत्री ने इस पर कड़ी नाराजगी जताते हुए संबंधित सफाई ठेकेदार फर्म को तत्काल प्रभाव से ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश दिए। उन्होंने मौके पर मौजूद उच्चाधिकारियों से कहा कि जनता के पैसे का दुरुपयोग और योजनाओं में लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
शिक्षा व्यवस्था पर भी भड़के मंत्री
पंचायती राज के साथ-साथ शिक्षा मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे दिलावर तब और अधिक नाराज हो गए जब वे गांव के सरकारी स्कूल पहुंचे। करीब दो हजार की आबादी वाले इस गांव के सरकारी विद्यालय में मात्र 6 बच्चों का नामांकन देख वे हैरान रह गए।
उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी को फोन कर पूछा कि करोड़ों के बजट और बेहतर संसाधनों के बावजूद नामांकन शून्य के करीब क्यों है? मंत्री ने निर्देश दिए कि शिक्षक और अधिकारी घर-घर जाकर अभिभावकों से संवाद करें और नामांकन बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाएं।
मंत्री के इस औचक निरीक्षण और कड़े रुख से पूरे जिले के प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है। इस दौरान उनके साथ भाजपा के कई स्थानीय नेता और विभागीय अभियंता भी मौजूद रहे।
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