केंद्र ने कहा- मानगढ़ धाम राष्ट्रीय स्मारक के योग्य नहीं, जानिए क्या दिए तर्क
समझें क्या है पूरा मामला
- मानगढ़ धाम को नहीं मिलेगा राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा।
- केंद्र ने कहा- आधुनिक निर्माण से बदली पहचान।
- आदिवासियों के आस्था केंद्र को लेकर सियासत गरम।
- सांसद बोले- सरकार ने किया धाम का अपमान।
- 1913 के नरसंहार की यादें, आज भी अधूरी मांग।
केंद्र सरकार ने आदिवासियों के आस्था के केंद्र मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने से मना कर दिया है। यह जवाब नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल के सवाल पर आया है।
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने इसका लिखित जवाब दिया। उन्होंने कहा कि यह स्मारक राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने के योग्य नहीं है।
केंद्र ने क्यों किया मना?
केंद्र सरकार के अनुसार, मानगढ़ धाम में आधुनिक विकास हुआ है। इससे पुरातात्विक विशेषताएं नष्ट हो गई हैं। प्राचीन स्मारक और पुरातत्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम 1958 के नियम सख्त हैं। स्मारक में प्रामाणिकता और अखंडता जरूरी है। यहां यह दोनों मौजूद नहीं हैं।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि इसका कोई प्रस्ताव लंबित नहीं है। निरीक्षण के बाद यह निष्कर्ष निकाला गया है। साइट पर आधुनिक बदलाव बहुत ज्यादा है। इसलिए इसे राष्ट्रीय स्मारक घोषित नहीं किया जा सकता। संस्कृति मंत्रालय ने यह रिपोर्ट दी है।
क्या है मानगढ़ धाम का इतिहास?
मानगढ़ धाम को राजस्थान का जलियांवाला बाग कहा जाता है। 17 नवंबर 1913 को यहां बड़ा हत्याकांड हुआ था। संत और समाज सुधारक गोविंद गुरु के नेतृत्व में 1.5 लाख आदिवासी जुटे थे। अंग्रेज पुलिस ने उन पर गोलियां चलाईं। लगभग 1,500 आदिवासियों की जान चली गई थी।
यह स्थल आदिवासियों के संघर्ष का प्रतीक है। यहां हर साल बड़ा मेला लगता है। राजस्थान, एमपी और गुजरात से लोग आते हैं। सभी आदिवासी समुदाय इसे पवित्र मानते हैं। यह उनकी आस्था का बड़ा केंद्र है।
राजनेताओं ने क्या कहा?
सांसद राजकुमार रोत ने केंद्र के फैसले पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि यह धाम का अपमान है। सरकार आदिवासियों को वोट बैंक मानती है। उन्होंने कहा कि हजारों आदिवासियों ने शहादत दी। लेकिन किसी ने राष्ट्रीय दर्जा दिलाने की पैरवी नहीं की।
रोत ने कांग्रेस और भाजपा दोनों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि दोनों पार्टियों ने अपमान किया है। कई नेता आए लेकिन कुछ नहीं कर पाए। यह फैसला आदिवासियों की भावनाओं के खिलाफ है। सरकार को अपना रुख बदलना चाहिए।
महंत ने क्यों समर्थन किया?
मानगढ़ धाम के महंत रामचंद्र महाराज ने अलग राय दी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्मारक से परेशानी होगी। यह तीन राज्यों का आस्था केंद्र है। राष्ट्रीय स्मारक बनने पर रोक-टोक बढ़ सकती है। समाज के लोगों को कई समस्याएं आएंगी।
2022 में हुई थी सिफारिश
राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण ने 2022 में मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की सिफारिश की थी। तत्कालीन अध्यक्ष तरुण विजय ने इस पर रिपोर्ट दी थी। यह सिफारिश उन्होंने 6 जुलाई 2022 को की थी और तत्कालीन मंत्री अर्जुन मेघवाल को रिपोर्ट सौंपी थी।
रिपोर्ट में मानगढ़ का विवरण और सिफारिशें थीं। लेकिन केंद्र ने उस सिफारिश को स्वीकार नहीं किया। अब जब नए सिरे से इसका निरीक्षण कराया गया तो अलग निष्कर्ष निकला। अब यह नया फैसला विवादों में आ गया है। राजनीतिक दल इसे लेकर आमने-सामने हैं।
आदिवासी संगठनों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। वे केंद्र के फैसले को गलत बता रहे हैं। सांसदों ने भी फिर से मामला उठाने की बात कही है।
FAQ
- मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक क्यों नहीं बनाया गया?
केंद्र सरकार ने कहा कि वहां बड़े पैमाने पर आधुनिक निर्माण हुआ है। इससे पुरातात्विक विशेषताएं, प्रामाणिकता और अखंडता प्रभावित हुई है। - मानगढ़ धाम का ऐतिहासिक महत्व क्या है?
17 नवंबर 1913 को यहां अंग्रेज पुलिस ने 1.5 लाख आदिवासियों पर गोलियां चलाईं। इस नरसंहार में लगभग 1,500 आदिवासियों की जान गई थी। इसे राजस्थान का जलियांवाला बाग कहा जाता है। - क्या मानगढ़ धाम को पहले राष्ट्रीय स्मारक की सिफारिश मिली थी?
2022 में राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण ने इसकी सिफारिश की थी। लेकिन केंद्र सरकार ने हालिया निरीक्षण के बाद इसे योग्य नहीं माना।
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