केंद्र ने कहा- मानगढ़ धाम राष्ट्रीय स्मारक नहीं बनेगा, बेनीवाल और कांग्रेस का पलटवार

Saurabh Mishra | Aug 05, 2026, 14:11 IST
मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने के मुद्दे पर सियासत हो रही है।
केंद्र सरकार ने मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने से इनकार किया। सांसद हनुमान बेनीवाल के सवाल पर मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने जवाब दिया। कांग्रेस और RLP ने केंद्र पर हमला बोला।

समझें क्या है पूरा मामला

  • सांसद हनुमान बेनीवाल ने लोकसभा में मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक बनाने पर सवाल पूछा।
  • केंद्रीय मंत्री शेखावत बोले कि मानगढ़ धाम मौजूदा मानकों पर खरा नहीं उतरता।
  • मंत्री ने कहा कि सरकार के पास ऐसा कोई भी प्रस्ताव विचाराधीन नहीं।
  • RLP और कांग्रेस ने इसे आदिवासी समाज से विश्वासघात बताया
  • चुनाव से पहले यह मुद्दा राजस्थान में सियासी हथियार बन गया।

राजस्थान के बांसवाड़ा स्थित मानगढ़ धाम एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार वजह बना है इसे राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने का पुराना मुद्दा। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (Rashtriya Loktantrik Party) के नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने लोकसभा में इस बारे में सवाल पूछा था। जवाब में राजस्थान से ही आने वाले केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने केंद्र सरकार का रुख साफ कर दिया।



उन्होंने बताया कि मानगढ़ धाम मौजूदा कानून के तहत राष्ट्रीय स्मारक घोषित होने योग्य नहीं। मंत्री शेखावत के इस जवाब के बाद विपक्ष ने भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) और केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।



संसद में उठा मानगढ़ धाम का मुद्दा

संसद के मानसून सत्र के दौरान सोमवार को सांसद हनुमान बेनीवाल ने मानगढ़ धाम को लेकर लिखित सवाल पूछा था। उन्होंने इसे राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा देने और विकास कराने की मांग रखी थी।



केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने अपने जवाब में दो बड़ी बातें साफ कीं। पहली यह कि मानगढ़ धाम मौजूदा पुरातात्विक अधिनियम के मानकों पर खरा नहीं उतरता। दूसरा, फिलहाल इसे राष्ट्रीय स्मारक बनाने का कोई प्रस्ताव सरकार के पास विचाराधीन नहीं।



बेनीवाल बोले- बलिदान से तय हो अहमियत

केंद्र के जवाब पर राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी सांसद हनुमान बेनीवाल ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सरकार पर आदिवासी समाज के बलिदान स्थल की उपेक्षा करने का आरोप लगाया।



बेनीवाल ने कहा कि मानगढ़ धाम कोई साधारण पुरातात्विक स्थल नहीं। यह भील-आदिवासी समाज की अस्मिता और बलिदान का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि 1913 में जलियांवाला बाग से पहले ही यहां हजारों आदिवासी बलिदान हुए थे। उनका कहना था कि इतिहास का मूल्यांकन इमारतों से नहीं, बल्कि संघर्ष के लिए बहे खून से होना चाहिए।



बेनीवाल ने केंद्र सरकार से मानगढ़ धाम के लिए विशेष योजना बनाने की मांग की। उन्होंने इसे राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा देने की भी मांग दोहराई।



मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने को लेकर राजनीति जारी है।


कांग्रेस ने भी उठाए सवाल

केंद्र के जवाब के बाद कांग्रेस भी आक्रामक हो गई। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भाजपा सरकार पर आदिवासियों से विश्वासघात करने का आरोप लगाया।



जूली ने कहा कि यह वही मानगढ़ है जहां गोविंद गुरु के नेतृत्व में सैकड़ों आदिवासियों ने अंग्रेजी गोलियों का सामना किया था। उन्होंने इसे आदिवासियों का जलियांवाला बाग बताया। जूली ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री ने यहां आकर बड़े वादे किए थे।



नेता प्रतिपक्ष ने सवाल उठाया कि यह इनकार उसी मंत्रालय से आया है, जिसके मंत्री राजस्थान के गजेंद्र सिंह शेखावत हैं। उन्होंने बताया कि 2022 में राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण के तत्कालीन अध्यक्ष तरुण विजय ने खुद यह सिफारिश की थी।



नेता प्रतिपक्ष के तीन बड़े सवाल

टीकाराम जूली ने केंद्रीय मंत्री गजेंद्र शेखावत और भाजपा सांसदों से तीन सवाल पूछे। पहला, आदिवासी भावनाओं के लिए केंद्र में आवाज क्यों नहीं उठाई गई। दूसरा, सिफारिश के बावजूद चार साल फाइल क्यों दबी रही। तीसरा, संकल्प पत्र का ट्राइबल डेस्टिनेशन वाला वादा कब पूरा होगा?



चुनाव से पहले गरमाई सियासत

राजस्थान में जल्द ही पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव होने हैं। उससे पहले, ये मुद्दा उठ गया है। विपक्ष को सियासी हथियार मिल गया है। दक्षिणी राजस्थान के वागड़ और मेवाड़ में जनजातीय आबादी ज्यादा है। इनमें बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ और उदयपुर शामिल हैं। इन इलाकों में चुनाव के दौरान ये मुद्दा सियासी उठापठक की वजह बन सकता है।



FAQ

  1. सवाल 1: मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा क्यों नहीं मिला?
    जवाब: केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के मुताबिक यह मौजूदा पुरातात्विक अधिनियम के मानकों पर खरा नहीं उतरता। फिलहाल इसे स्मारक घोषित करने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं।
  2. सवाल 2: मानगढ़ धाम का ऐतिहासिक महत्व क्या है?
    जवाब: 1913 में यहां अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ हजारों आदिवासी शहीद हुए थे। इसे आदिवासियों का जलियांवाला बाग भी कहा जाता है। यह भील-आदिवासी समाज के बलिदान का प्रतीक है।
  3. सवाल 3: मानगढ़ धाम के मुद्दे पर विपक्ष क्या कह रहा है?
    जवाब: कांग्रेस और RLP दोनों ने केंद्र सरकार पर हमला बोला है। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने इसे आदिवासियों से विश्वासघात बताया। सांसद हनुमान बेनीवाल ने विशेष संरक्षण योजना की मांग की।

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