दो और प्रसूताओं की मौत, जुलाई में अब तक 7 महिलाओं की जान गई
समझें क्या है पूरा मामला
- भीलवाड़ा के MGH में फिर 2 प्रसूताओं की मौत, एक महीने में 7 की जान गई।
- दोनों हाई रिस्क प्रेग्नेंसी में नहीं थीं, नॉर्मल डिलीवरी के बाद ब्लीडिंग से मौत।
- सुगना का हीमोग्लोबिन 10 से घटकर 1.8 ग्राम, रानी को ऑपरेशन का समय नहीं मिला।
- 3 महीने में 16 प्रसूताओं की मौत, कोटा-बीकानेर के बाद अब भीलवाड़ा में संकट।
- 2210 गर्भवती महिलाओं की जांच, 500 हाई रिस्क, फिर भी हो रही मौतें।
राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। भीलवाड़ा जिले के सबसे बड़े महात्मा गांधी अस्पताल (MGH) में बुधवार देर रात दो और प्रसूताओं की इलाज के दौरान मौत हो गई।
अस्पताल प्रशासन और डॉक्टरों के अनुसार, दोनों ही महिलाओं का सामान्य प्रसव हुआ था और वे किसी भी तरह से हाई रिस्क प्रेग्नेंसी श्रेणी में शामिल नहीं थीं। प्रसव के बाद अचानक हुए अत्यधिक रक्तस्राव (Postpartum Hemorrhage) के कारण दोनों की हालत बिगड़ गई और उनकी जान चली गई।
इसके साथ ही अकेले जुलाई महीने में भीलवाड़ा एमजीएच में अलग-अलग चिकित्सकीय जटिलताओं के चलते 7 महिलाओं की मौत हो चुकी है।
पहला मामला (सुगना बैरवा - 22 वर्ष)
कोटड़ी निवासी सुगना की शाहपुरा जिला अस्पताल में नॉर्मल डिलीवरी हुई थी। प्रसव के बाद रक्तस्राव बढ़ने और ब्लड प्रेशर गिरने पर उसे एमजीएच के आईसीयू में रेफर किया गया।
पीएमओ डॉ. अरुण गौड़ ने बताया कि अत्यधिक ब्लीडिंग के कारण सुगना का हीमोग्लोबिन 10 ग्राम से घटकर मात्र 1.8 ग्राम रह गया था, जिससे उसकी मौत हो गई।
दूसरा मामला (रानी बंजारा - 18 वर्ष)
भीलवाड़ा के पटेल नगर निवासी रानी की एमजीएच में नॉर्मल डिलीवरी हुई थी। प्रसव के तुरंत बाद शुरू हुए भारी रक्तस्राव को दवाइयों से नियंत्रित करने की कोशिश की गई। लेकिन डॉक्टरों को गर्भाशय निकालने (Hysterectomy) के लिए ऑपरेशन का समय ही नहीं मिल सका।
सीएमएचओ ने दिए विस्तृत जांच के आदेश
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. संजीव शर्मा ने बताया कि दोनों मृत महिलाएं हाई रिस्क प्रेग्नेंसी में नहीं थीं। प्रसव के बाद अचानक सामने आईं इन जटिलताओं की गहन जांच की जा रही है।
चिकित्सा विभाग द्वारा दोनों मामलों की केस हिस्ट्री, सोनोग्राफी रिपोर्ट्स और प्रसव के बाद दिए गए आपातकालीन उपचार की समीक्षा की जाएगी ताकि मौतों के सटीक कारणों का पता लगाया जा सके।
3 महीने में 16 प्रसूताओं की मौत
राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में मातृ मृत्यु दर को लेकर लगातार गंभीर स्थितियां सामने आ रही हैं। मई में कोटा के सरकारी अस्पताल में 5 प्रसूताओं की मौत हुई। जून में बीकानेर में सिजेरियन डिलीवरी के बाद 6 प्रसूताओं की किडनी फेल हुई, जिनमें से 2 की इलाज के दौरान मौत हो गई। जुलाई में भीलवाड़ा में 7 और बांसवाड़ा में 2 प्रसूताओं की जान गई।
भीलवाड़ा जिले में हाल ही में चलाए गए एक विशेष स्क्रीनिंग अभियान में 2,210 गर्भवती महिलाओं में से 500 महिलाएं (23%) हाई रिस्क कैटेगरी में पाई गई थीं। हालांकि, चिंताजनक बात यह है कि हाल में हुई मौतों में शामिल अधिकांश महिलाएं हाई रिस्क सूची में नहीं थीं।
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