भीषण गर्मी में भी नहीं लौटे ठंडे क्षेत्रों के परिंदे, जानें क्या है वजह?
News In Short
- राजस्थान में 45 डिग्री सेल्सियस की भीषण तपिश के बावजूद प्रवासी पक्षी वापस नहीं लौटे।
- विशेषज्ञ इसका कारण वेटलैंड्स में सीड्स बैंक का विकास तथा भोजन उपलब्धता मान रहे।
- मार्च से मई के बीच हुई अचानक बारिश और ठंडक ने भी पक्षियों को अनुकूल माहौल दिया।
- अधिकांश पक्षी केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान के बजाय उसके आसपास के नए वेटलैंड्स में रुके हैं।
- -10 डिग्री में रहने वाले पक्षियों द्वारा 45 डिग्री सहन करना बर्ड वॉचर्स को कर रहा है हैरान।
News In Detail
राजस्थान (Rajasthan) में भले ही सूरज आग उगल रहा है और पारा 45 डिग्री सेल्सियस को छू रहा है, लेकिन भरतपुर के आसमान और जलीय क्षेत्रों में विदेशी मेहमानों की चहचहाहट कम नहीं हुई है। साइबेरिया (रूस), अलास्का (USA) और उत्तरी यूरोप के बेहद ठंडे इलाकों से आए हजारों प्रवासी पक्षी इस बार अपने वतन लौटने का नाम नहीं ले रहे हैं।
आमतौर पर दिसंबर-जनवरी में आकर मार्च तक लौट जाने वाले इन परिंदों का यह बदला हुआ व्यवहार वन्यजीव विशेषज्ञों और बर्ड वॉचर्स के लिए कौतूहल और शोध का विषय बन गया है।
भरतपुर है सेंट्रल एशियन फ्लाई-वे का मुख्य केंद्र
भौगोलिक दृष्टि से भरतपुर सेंट्रल एशियन फ्लाई-वे के रूट पर पड़ता है। यह मार्ग आर्कटिक और साइबेरिया से शुरू होकर दक्षिण एशिया (भारत-श्रीलंका) तक आता है। इस रूट से हर साल 300 से अधिक प्रजातियों के पक्षी करीब 5 हजार किलोमीटर का सफर तय कर भारत आते हैं। इस बार भरतपुर के सेक्टर 13, मलाहा चौराहा और बंध बारेठा जैसे नए वेटलैंड्स इन पक्षियों के पसंदीदा ठिकाने बन गए हैं।
तपिश के बीच क्यों रुक गए परिंदे?
एक्सपर्ट्स के अनुसार, पक्षियों के रुकने के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण हैं:
भोजन और सुरक्षा की गारंटी: पांचना बांध से पानी की आवक के कारण यहां की जैव विविधता मजबूत हुई है। कीचड़ और पानी में कीड़े-मकोड़े, लार्वा और सीड्स बैंक (वनस्पतियों के बीज) प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि तापमान कितना भी हो, अगर भोजन और सुरक्षा मिले तो पक्षी लंबे समय तक रुक सकते हैं।
मौसम का दोहरा मिजाज: मार्च और मई के बीच राजस्थान में कई बार हुई बेमौसम बारिश और आंधी से तापमान में गिरावट दर्ज की गई। इस अस्थाई ठंडक ने पक्षियों को यहीं रोके रखा, और अब वे इस भीषण गर्मी को भी सहन कर रहे हैं।
इन दुर्लभ प्रजातियों ने डाला है डेरा
भरतपुर के वेटलैंड्स में इस समय 15 से अधिक प्रजातियों के प्रवासी पक्षी अठखेलियां कर रहे हैं, जिनमें प्रमुख हैं:
ब्लैक-टेल्ड गॉडविट: लंबी टांगों और सीधी चोंच वाला यह पक्षी यूरोप और उत्तरी एशिया से आता है और कीचड़ वाले जीवों को खाता है।
पाइड एवोसेट: काले-सफेद रंग का यह खूबसूरत पक्षी अपनी ऊपर की ओर मुड़ी हुई चोंच को पानी में घुमाकर शिकार ढूंढता है।
रफ (Ruff): मध्यम आकार का यह पक्षी साइबेरिया से आता है। इसके नर पक्षी के गर्दन के पास रंग-बिरंगे पंखों का एक घेरा (रफ) होता है।
स्पॉटेड रेडशैंक: लंबी लाल टांगों वाला यह एक दुर्लभ पक्षी है, जो प्रजनन के समय लगभग काले रंग का हो जाता है।
पक्षियों की संख्या उम्मीद से कई गुना ज्यादा होने के कारण पर्यावरणविदों का मानना है कि यह वैश्विक स्तर पर आ रहे जलवायु और पारिस्थितिक (Ecology) बदलावों का एक बड़ा संकेत हो सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
विदेशी पक्षी आमतौर पर भरतपुर कब आते हैं और कब लौटते हैं?
प्रवासी पक्षी हर साल सर्दियों में (दिसंबर से जनवरी के बीच) भोजन और अनुकूल मौसम की तलाश में भरतपुर आते हैं और मार्च के महीने तक वापस अपने वतन (साइबेरिया, यूरोप) लौट जाते हैं।
इस बार 45 डिग्री तापमान में भी पक्षियों के रुकने का मुख्य कारण क्या है?
मुख्य कारण पांचना बांध से पानी आने के बाद वेटलैंड्स में प्रचुर मात्रा में भोजन (सीड्स बैंक और जलीय जीव) की उपलब्धता, सुरक्षित माहौल और मार्च-मई के बीच हुई बेमौसम बारिश है।
इस बार पक्षी केवलादेव नेशनल पार्क के बजाय कहां दिखाई दे रहे हैं?
इस बार अधिकांश प्रवासी पक्षी मुख्य नेशनल पार्क के बजाय उसके आसपास विकसित हुए नए वेटलैंड्स जैसे- सेक्टर 13, मलाहा चौराहा और बंध बारेठा बांध के जलग्रहण क्षेत्रों में दिखाई दे रहे हैं।
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