टेक्सटाइल यूनिटों में बंधक बनाए गए थे मासूम; 12 घंटे कराया जाता था जानलेवा काम
Jageshwar prasad | May 16, 2026, 11:05 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान और गुजरात पुलिस ने NCPCR के साथ मिलकर सूरत की कपड़ा फैक्ट्रियों में चल रहे एक बड़े बाल श्रम नेटवर्क को ध्वस्त किया है। इस संयुक्त कार्रवाई में 91 बच्चों को मुक्त कराया गया है। आरोपी 27 फैक्ट्री मालिकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
News In Short
- राजस्थान पुलिस और गुजरात पुलिस ने NCPCR के साथ मिलकर सूरत में बाल श्रम नेटवर्क किया ध्वस्त।
- बच्चों को बिना किसी छुट्टी के रोजाना 12-12 घंटे बंधक बनाकर काम कराया जाता था।
- मुक्त कराए गए बच्चों में सबसे ज्यादा उदयपुर के आदिवासी इलाकों के, इनमें 7 साल का मासूम भी।
- गायत्री सेवा संस्थान की गुप्त सूचना पर राजस्थान पुलिस, गुजरात पुलिस और NCPCR ने की रेड।
- खतरनाक मशीनें चलवाने और गुलामों के जैसे काम कराने के आरोप में 27 फैक्ट्री संचालकों पर FIR दर्ज।
News In Detail
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रेड के दौरान वहां मौजूद महज 7 साल का एक मासूम बिना शर्ट के डर से कांपता हुआ मिला, जो पुलिस को देखते ही रो पड़ा और खुद को छुपाने की कोशिश करने लगा। मुक्त कराए गए बच्चों में दो सगे भाई (उम्र 8 और 10 वर्ष) भी शामिल हैं।
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फैक्ट्री मालिकों की दलीलें खारिज, 27 पर मुकदमा दर्ज
कार्रवाई के दौरान यूनिट संचालकों ने दलील दी कि वे बच्चों के माता-पिता की मर्जी और उन्हें एडवांस पैसे देकर लाए हैं। हालांकि, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) और पुलिस ने साफ कर दिया कि 14 साल से कम उम्र के बच्चों से ऐसा जानलेवा काम करवाना कानूनन संगीन अपराध है और इसमें कोई ढील नहीं दी जाएगी।
माफिया का सॉफ्ट टारगेट और आगामी कार्रवाई
फिलहाल सभी 91 बच्चों को सुरक्षित शेल्टर होम्स (बाल सुधार गृह) भेजकर उनकी काउंसलिंग की जा रही है। पुणागाम थाना प्रभारी वी.एम. देसाई ने बताया कि फैक्ट्रियों पर केस दर्ज करने के बाद अब उन मुख्य दलालों और एजेंटों की लिस्ट बनाई जा रही है जो गांवों से बच्चों की सप्लाई करते थे, जल्द ही पूरे नेटवर्क की गिरफ्तारियां होंगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
सूरत में रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान कुल कितने बच्चे मुक्त कराए गए?
बच्चों को किस तरह के काम में झोंका गया था?
बाल श्रम करवाने वाले संचालकों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है?
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