जिसे सरकार ने 10 दिन पहले दिया पद, उसे हत्या के जुर्म में मिली उम्रकैद
समझें क्या है पूरा मामला
- भांजे की हत्या, मामा को उम्रकैद, 10 साल 18 दिन बाद न्याय।
- भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष इंद्रजीत सिंह समेत 9 को उम्रकैद।
- चुनाव हारे और हथौड़ा, तलवार, पाइप, हॉकी से कर दी हत्या।
- आरोपियों ने सजा सुनी, मूंछों पर ताव दिया, वीडियो वायरल।
- 22 गवाह, मेडिकल रिपोर्ट, सबूतों की नींव पर टिका था न्याय।
सुनील जैन @ अलवर
अलवर की जिला एवं सत्र न्यायालय ने वर्ष 2016 के बहुचर्चित अवतार सिंह हत्याकांड में बड़ा फैसला सुनाया है। इसमें भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष इंद्रजीत सिंह पाटा समेत 9 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
अदालत ने सभी दोषियों पर एक-एक लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया। करीब 10 साल 18 दिन तक चली कानूनी लड़ाई के बाद यह फैसला आया है। इस फैसले को चुनावी हिंसा के मामलों में एक अहम निर्णय माना जा रहा है।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनंत भंडारी ने 22 गवाहों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर सभी आरोपियों को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।
सजा पाने वालों में इंद्रजीत सिंह पाटा, अनूप सिंह, कमलजीत सिंह, गुरवचन सिंह, जसपाल सिंह, कुलवंत सिंह, अमन सिंह, हरविंदर सिंह और विश्वेंद्र सिंह शामिल हैं। सभी आरोपी एक ही परिवार से जुड़े बताए गए हैं, जिनमें इंद्रजीत सिंह का भाई, भतीजे और अन्य रिश्तेदार शामिल हैं।
पंचायत चुनाव की रंजिश बनी हत्या की वजह
अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता अभिमन्यु सिंह चौहान और अजय मोहन मुखिजा ने बताया। 10 जून 2016 की शाम करीब साढ़े छह बजे नौगावां थाना क्षेत्र के पाटा गांव में सरपंच चुनाव की रंजिश को लेकर अवतार सिंह पर हमला किया गया। उस समय वह गांव की एक दुकान पर बैठे हुए थे।
आरोप है कि 8 से 10 लोग हथौड़े, तलवार, चाकू, लोहे के पाइप, हॉकी और लाठियों से लैस होकर पहुंचे और उन पर जानलेवा हमला कर दिया। मुकदमे के अनुसार, हमले के दौरान इंद्रजीत सिंह कथित रूप से हमलावरों से 'मारो इनको मारो' कह रहा था।
गंभीर रूप से घायल अवतार सिंह को जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद नौगावां थाने में हत्या सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज हुआ और पुलिस ने जांच पूरी कर सभी आरोपियों के खिलाफ अदालत में चालान पेश किया।
फैसले के बाद भी नहीं दिखा पछतावा
अदालत से सजा सुनाए जाने के बाद भी सभी दोषी कोर्ट परिसर से मूंछों पर ताव देते हुए बाहर निकले। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, उनके चेहरों पर किसी तरह का पछतावा नजर नहीं आया, जिसकी चर्चा पूरे कोर्ट परिसर में होती रही।
10 साल 18 दिन बाद मिला न्याय
फैसले के बाद मृतक अवतार सिंह के बेटे अजयपाल ने कहा कि उनके परिवार को 10 साल 18 दिन बाद न्याय मिला है। उन्होंने बताया कि उनके पिता और इंद्रजीत सिंह आपस में रिश्तेदार (भांजे) थे, लेकिन सरपंच चुनाव में दोनों अलग-अलग प्रत्याशियों का समर्थन कर रहे थे।
जिस प्रत्याशी का समर्थन उनके पिता कर रहे थे, उसकी जीत के बाद चुनावी रंजिश में उनके पिता की हत्या कर दी गई। उन्होंने अदालत के फैसले को न्याय की जीत बताया।
हाल ही में मिला था सरकारी दायित्व
गौरतलब है कि राजस्थान सरकार ने करीब 10 दिन पहले ही इंद्रजीत सिंह पाटा को जिला जन अभाव अभियोग समिति का सदस्य नियुक्त किया था। अब उम्रकैद की सजा के बाद यह मामला राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का विषय बन गया है।
अवतार सिंह भी जा चुका था जेल
बताया जाता है कि अवतार सिंह इंद्रजीत सिंह के जीजा मतलब अवतार सिंह के मोसे की हत्या की थी उसमें जेल भी काट कर आया था और आने के बाद फिर इनमें विवाद शुरू हो गया।
चुनाव तो शांतिपूर्ण हो गए थे लेकिन चुनाव के बाद फर्जी मार्कशीट को लेकर इनमें विवाद शुरू हुआ और विवाद का अंत अब इस अदालत के फैसले के बाद हुआ है।
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