'द सूत्र' ग्राउंड रिपोर्ट: नाडोल में स्कूल निगल गए MMU निरीक्षक, कैमरे पर बेनकाब हुआ फर्जीवाड़ा
नरेश रमेश @ जोधपुर
शिक्षा व्यवस्था में बड़े पैमाने पर चल रहे भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े की इससे भी भयावह तस्वीर क्या होगी, जहां बच्चों की आवाजें, खड़ी बसें और चलते क्लासरूम अधिकारियों को दिखाई ही नहीं देते। पाली जिले के नाडोल में संचालित 'आशापुरा कॉलेज ऑफ फार्मेसी' को दी गई संदिग्ध मान्यता (एफिलेशन) का मामला अब एक बड़े प्रशासनिक घोटाले का रूप ले चुका है।
आरयूएचएस के तय मानकों के अनुसार, जिस भवन में पहले से कोई स्कूल या शैक्षणिक संस्थान चल रहा हो, वहां फार्मेसी या मेडिकल कॉलेज का संचालन कतई नहीं हो सकता। इसके बावजूद, प्रारंभिक निरीक्षण में आए इंस्पेक्टर ने धरातल की हकीकत छुपाकर मारवाड़ मेडिकल यूनिवर्सिटी के मर्फत आशापुरा कॉलेज ऑफ फार्मेसी को हरी झंडी दे दी गई।
एमएमयू का 'सुविधाजनक' निरीक्षण और लीपापोती की कोशिश
मामले मे एमएमयू प्रशासन ने तीन सदस्यीय औचक निरीक्षण टीम नाडोल भेजी। हालांकि, इस उच्चस्तरीय टीम की रिपोर्ट अधिकारियों के बयानों की तरह ही लीपापोती से भरी नजर आई।
सिद्धार्थ चारण (एफएन, एमएमयू): मौके पर इमारत खाली मिली, कोई स्कूल संचालित नहीं था। फार्मेसी का बोर्ड लगा था।
उमेश गिलोत्रा (डीन, फार्मेसी, एमएमयू): परिसर में स्कूल की गतिविधियां या बसें नहीं दिखीं। इंफ्रास्ट्रक्चर मानकों के अनुरूप है।
अयूब खान (रजिस्ट्रार, एमएमयू): टीम ने सुबह 11 से 11:30 बजे जांच की एक ही इमारत में दो संस्थान संचालित होने के प्रमाण नहीं मिले। रिपोर्ट कुलपति को सौंपी जाएगी।
'द सूत्र' के कैमरे में कैद हुआ कड़वा सच
जांच टीम भले ही आंखें मूंदकर कागजी क्लीन चिट दे आई हो, लेकिन 'द सूत्र' के संवाददाता ने जब धरातल पर रियलिटी चेक किया, तो अधिकारियों के दावों की धज्जियां उड़ गईं।
हमारे रिपोर्टर बच्चे का एडमिशन कराने के बहाने आशापुरा कॉलेज ऑफ फार्मेसी पहुंचे और खुफिया कैमरे से बातचीत को रिकॉर्ड किया। कैमरे में साफ तौर पर कैद हुआ:
- परिसर में बाकायदा संचालित होती कक्षाएं और पढ़ते बच्चे।
- परिसर में कतारबद्ध खड़ी स्कूल बसें।
- खेल के मैदान में गतिविधियों में शामिल छात्र।
गायब बोर्ड का 'अदृश्य' रहस्य
जांच टीम ने दावा किया था कि उन्होंने मौके पर 'आशापुरा कॉलेज ऑफ फार्मेसी' का बोर्ड देखा और उसकी फोटोग्राफी भी ली। लेकिन 'द सूत्र' के कैमरे में इमारत पर ऐसा कोई बोर्ड दूर-दूर तक नजर नहीं आया। सवाल उठता है कि जांच टीम के जाते ही वह बोर्ड कहां गायब हो गया?
'द सूत्र' के तीखे सवाल
अदृश्यता का जादू या सांठगांठ?
जो बसें, बच्चे और कक्षाएं कैमरे में साफ दिखीं, वे 3 सदस्यीय टीम की नजरों से कैसे छुप गईं?
कागजी निरीक्षण का खेल?
क्या यह औचक निरीक्षण केवल फाइलें चमकाने और फर्जीवाड़े पर पर्दा डालने का हथकंडा था?
क्या होगी ठोस कार्रवाई?
पुख्ता वीडियो सबूतों के बाद क्या एमएमयू प्रशासन लीपापोती करने वाले अधिकारियों और संस्थान पर गाज गिराएगा?
जब रिपोर्टर ने किया संपर्क
संस्थान के संचालक मुकेश भाटी से एक ही बिल्डिंग में दो संस्थान होने के संबंध में संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल और टेक्स्ट मैसेज में से किसी का भी जवाब नहीं दिया।
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