SMS में जहर जांचने की लैब खुद सिस्टम के ‘जहर’ में फंसी: 9 महीने से बंद, जांच की फीस तक तय नहीं
Raghvendra Singh Rathore | Sept 16, 2026, 18:15 IST
SMS की टॉक्सिकोलॉजी लैब 9 महीने से बंद पड़ी
मशीनें तैयार, चार कर्मचारियों का स्टाफ भी मौजूद, रोज आते हैं जहर, ड्रग ओवरडोज और स्नेक बाइट के 25-30 मरीज, नोडल अधिकारी बोले- कोड मिलते ही शुरू कर देंगे जांच
समझें क्या है पूरा मामला
- SMS कीटॉक्सिकोलॉजी लैब 9महीने से बंद, वजहचौंकाने वाली।
- मशीनें तैयार,स्टाफ मौजूद, फिर भीजांच शुरू नहीं हुई है।
- जनवरी में उद्घाटन,सितंबर में भी लैब पर लटकाताला।
- फीस तय नहोने से अटकीजहर-ओवरडोज की जांच।
- रोज 25-30 गंभीरमरीज, फिर भी लैब काताला नहीं खुला।
जनवरी 2026 में लैब का उद्घाटन हुआ था। मशीनें लग चुकी हैं। चार कर्मचारियों का स्टाफ भी मौजूद है। इसके बावजूद सितंबर तक मरीजों की जांच शुरू नहीं हो सकी। वजह चौंकाने वाली है अलग-अलग जांचों की फीस कितनी होगी, यही अब तक तय नहीं हो पाया है। इसके चलते जांचों के जरूरी सरकारी कोड जारी नहीं हुए।
द सूत्र की टीम SMS अस्पताल पहुंची तो लैब बंद मिली।
जयपुर के SMS अस्पताल में जहर
प्रदेश की पहली पॉइजन डिटेक्शन लैब
क्या है टॉक्सिकोलॉजी लैब?
जहर खाने या ड्रग ओवरडोज के मामले में मरीज कई बार ऐसी स्थिति में अस्पताल पहुंचता है, जब वह खुद नहीं बता पाता कि उसने क्या खाया या कौन-सी दवा कितनी मात्रा में ली। ऐसे में ब्लड, यूरिन और जरूरत के अनुसार दूसरे जैविक सैंपल की टॉक्सिकोलॉजी जांच
डॉक्टरों को विषाक्त पदार्थ या दवा के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दे सकती है। स्नेक बाइट और दूसरे जहरीले जीवों के संपर्क से जुड़े मामलों में भी संबंधित जांच इलाज की दिशा तय करने में मददगार हो सकती है। यानी इस लैब का सीधा संबंध उन मरीजों से है, जिनके इलाज में समय और जहर की सही पहचान दोनों बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
जयपुर के SMS अस्पताल में जहर, ड्रग्स-ओवरडोज और सांप काटने जैसे गंभीर मामलों की जांच के लिए बनी अत्याधुनिक टॉक्सिकोलॉजी लैब 8 महीने से बंद है। जनवरी में उद्घाटन और स्टाफ-मशीनें उपलब्ध होने के बावजूद जांच की फीस तय नहीं होने से मरीजों को सुविधा नहीं मिल रही। #jaipur #HospitalNews pic.twitter.com/PQHuzhJxMM
— test test (@TestT12452) September 16, 2026
रोज 25-30 ऐसे मरीज पहुंचने की जानकारी
SMS की टॉक्सिकोलॉजी लैब 9 महीने से बंद पड़ी
जनवरी में उद्घाटन, सितंबर में भी ताला
यानी एक तरफ मशीनें इस्तेमाल का इंतजार कर रही हैं और दूसरी तरफ जिस काम के लिए स्टाफ रखा गया, वह भी वही काम नहीं कर पा रहा।
पूरा मामला जांच की ‘कीमत’ पर अटका
दरें तय होने के बाद जांचों के लिए जरूरी सरकारी कोड की प्रक्रिया पूरी होगी। इसके बाद ही इन्हें अस्पताल के सिस्टम में नियमित रूप से शुरू किया जा सकेगा। यानी लैब तैयार है, मरीज हैं, मशीनें हैं और स्टाफ भी है, लेकिन जांच की कीमत तय नहीं होने से पूरी व्यवस्था ठप है।
नोडल अधिकारी बोले- हमारी तरफ से पूरी तैयारी
डॉ. शर्मा ने कहा, 'हमारी तरफ से सारी तैयारी है। हमें कोड मिल जाता है तो हम तुरंत जांच शुरू कर देंगे।' उनके मुताबिक जांचों की दरें निर्धारित होने के बाद संबंधित कोड मिलने का रास्ता साफ होगा और लैब में जांच शुरू की जा सकेगी।
डॉक्टरों और विभागों की खींचतान में अटकी फीस?
लैब बंद तो डॉक्टर कैसे कर रहे इलाज?
ऐसी स्थिति में डॉक्टर मरीज के लक्षण, उपलब्ध जानकारी और दूसरी जांचों के आधार पर तत्काल इलाज शुरू करते हैं। टॉक्सिकोलॉजी लैब शुरू होने का उद्देश्य इसी कमी को दूर करना और डॉक्टरों को जहरीले पदार्थों तथा दवाओं से संबंधित ज्यादा सटीक जांच उपलब्ध कराना है।
उद्घाटन पहले कर दिया, होमवर्क 9 महीने बाद भी अधूरा
फिर भी जांच नहीं हो रही। कारण केवल इतना है कि अलग-अलग जांचों की दरें तय करने और उसके बाद जरूरी कोड जारी करने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।
अब सवाल यह नहीं कि SMS के पास टॉक्सिकोलॉजी लैब है या नहीं। सवाल यह है कि जिस लैब को मरीजों की जान बचाने में मदद के लिए बनाया गया, उसके उद्घाटन के 9 महीने बाद भी सरकार और अस्पताल जांच की कीमत क्यों नहीं तय कर पाए?
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