अलवर मेयर पद के लिए भाजपा से सुमनलता अग्रवाल ने भरा नामांकन, कांग्रेस से 3 के नाम

Ashish Bhardwaj | Sept 16, 2026, 15:22 IST
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अलवर मेयर पद
अलवर मेयर पद

राजस्थान में अलवर नगर निगम मेयर पद के लिए भाजपा ने सुमनलता अग्रवाल को प्रत्याशी बनाया है। कांग्रेस से तीन दावेदारों ने नामांकन फॉर्म लिया है, निर्दलीयों के रुख पर टिका है पूरा समीकरण।

समझें क्या है पूरा मामला

  • भाजपा ने वार्ड 7 की पार्षद सुमनलता अग्रवाल को बनाया मेयर प्रत्याशी ।
  • कांग्रेस से ममता सैनी, रिंकल गर्ग और कमलेश शर्मा ने नामांकन फॉर्म लिया।
  • 2019 में ज्यादा सीटें होने के बावजूद भाजपा सभापति पद से चूक गई थी।
  • इस बार निर्दलीय पार्षद का मिल सकता है भाजपा को साथ।
राजस्थान में अलवर नगर निगम के मेयर पद के चुनाव के लिए भाजपा ने वार्ड 7 से पार्षद सुमनलता अग्रवाल को अपना प्रत्याशी बनाया है। सुमनलता अग्रवाल पूर्व नगर परिषद सभापति अजय अग्रवाल की पत्नी हैं। वहीं कांग्रेस की ओर से मेयर पद के लिए तीन दावेदार सामने आए हैं, जिससे पार्टी के भीतर भी दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल रहा है।

भाजपा की उम्मीदवार सुमनलता अग्रवाल

भाजपा ने अलवर नगर निगम के मेयर पद के लिए वार्ड 7 से चुनी गई पार्षद सुमनलता अग्रवाल पर भरोसा जताया है। सुमनलता अग्रवाल पूर्व नगर परिषद सभापति अजय अग्रवाल की पत्नी हैं। अजय अग्रवाल ने विधान सभा चुनाव 2023 संजय शर्मा में सामने कांग्रेस से चुनाव लड़ा था। पार्टी के भीतर उनकी उम्मीदवारी को लेकर संगठनात्मक जमीन मजबूत मानी जा रही है।

कांग्रेस में तीन दावेदार मैदान में

कांग्रेस की ओर से मेयर पद के लिए तीन नेता सामने आए हैं। वार्ड 39 से निर्वाचित पार्षद कमलेश शर्मा ने नामांकन दाखिल करने के लिए फॉर्म लिया। कमलेश शर्मा पूर्व कांग्रेस जिला अध्यक्ष योगेश मिश्रा की पत्नी हैं। नामांकन के समय उनके साथ निर्वाचित पार्षद, पार्टी कार्यकर्ता और जिला अध्यक्ष प्रकाश गंगावती मौजूद रहे। इसके अलावा वार्ड 34 की निर्वाचित पार्षद ममता सैनी ने भी मेयर पद के लिए नामांकन फॉर्म लेकर तय अमानत राशि जमा कराई और रसीद कटवाई। वार्ड 36 से कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर पार्षद का चुनाव हार चुकीं रिंकल गर्ग ने भी मेयर पद के लिए नामांकन फॉर्म लेकर अमानत राशि जमा की है। हालांकि पूरी स्थिति नामांकन फॉर्म जमा होने के बाद ही साफ हो पाएगी।

2019 में क्रॉस वोटिंग से हारी थी भाजपा

साल 2019 में भाजपा प्रत्याशी अलवर नगर परिषद का सभापति बनने से चूक गया था। उस समय भाजपा के पास 27 सीटें थीं और कांग्रेस के पास सिर्फ 19 सीटें। इसके बावजूद कांग्रेस ने सभापति की कुर्सी हासिल कर ली थी। इस बार स्थिति में बहुत ज्यादा बदलाव नहीं है। भाजपा की सीटें एक बढ़कर हुई हैं, जबकि कांग्रेस 19 से बढ़कर 23 पर पहुंच गई है। हालांकि इस बार निर्दलीय पार्षद भाजपा के साथ माने जा रहे हैं, जिससे पार्टी का बोर्ड बनने की संभावना बढ़ गई है। जानकारों का मानना है कि जिस पार्टी की प्रदेश में सरकार होती है, आमतौर पर निर्दलीय पार्षद उसी के दबदबे में नजर आते हैं। पिछली बार राज्य में कांग्रेस की सरकार थी।

दो मंत्री और नेता प्रतिपक्ष बना रहे रणनीति

अलवर में सिर्फ एक ही नगर निगम है, इसलिए यह जिले का सबसे बड़ा निकाय चुनाव माना जा रहा है। भाजपा की तरफ से यहां शहर विधायक और वन राज्य मंत्री संजय शर्मा तथा केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव रणनीति बना रहे हैं। वहीं कांग्रेस की ओर से राजस्थान के नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और पूर्व केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह रणनीति तैयार कर रहे हैं।

क्या हारा हुआ प्रत्याशी भी बन सकता है मेयर

राजस्थान नगर पालिका अधिनियम 2009 के तहत मेयर पद के लिए उम्मीदवार का उसी नगर निगम क्षेत्र का मतदाता होना जरूरी है। लेकिन यह अनिवार्य नहीं है कि वह व्यक्ति पार्षद का चुनाव जीता हुआ हो। यानी जो व्यक्ति पार्षद का चुनाव नहीं लड़ा हो या हार भी गया हो, वह अन्य योग्यताएं पूरी करने पर मेयर पद का चुनाव लड़ सकता है। यह प्रावधान 2019 में राजस्थान में मेयर चुनाव की प्रक्रिया बदलने के बाद ज्यादा चर्चा में आया था। इससे पहले पार्षदों में से ही मेयर चुना जाता था। 2019 के संशोधन के बाद मेयर का चुनाव सीधे निर्वाचित पार्षदों के जरिए होने लगा, लेकिन उम्मीदवार के लिए खुद पार्षद होना जरूरी नहीं रखा गया।

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