नरेश मीणा ने मानी टीना डाबी की बात; पेयजल समस्या पर आंदोलन लिया वापस
News In Short
- नरेश मीणा ने टोंक में पानी की समस्या पर धरना देने की चेतावनी दी थी।
- प्रशासन ने सुरक्षा के लिए कलेक्ट्रेट को किले की तरह घेर लिया था।
- कलेक्टर टीना डाबी और नरेश मीणा के बीच चेंबर में लंबी वार्ता हुई।
- टीना डाबी ने सात दिनों के भीतर पानी की समस्या हल करने का वादा किया।
- आश्वासन मिलने के बाद नरेश मीणा ने अपना अनिश्चितकालीन धरना स्थगित कर दिया।
News In Detail
Tonk: भगत सिंह सेना के सुप्रीमो नरेश मीणा ने सोमवार को राजस्थान के टोंक जिला मुख्यालय पहुंचकर देवली-उनियारा विधानसभा क्षेत्र की पेयजल समस्या को लेकर प्रस्तावित अनिश्चितकालीन धरना स्थगित कर दिया। जिला कलेक्टर टीना डाबी से लंबी वार्ता और उनके आश्वासन के बाद यह फैसला लिया गया। इससे पहले नरेश मीणा ने सोमवार से धरने की चेतावनी दी थी, जिसके बाद कलेक्ट्रेट को अभेद्य किले में तब्दील कर दिया गया था।
कलेक्ट्रेट में सुरक्षा के कड़े इंतजाम
सोमवार को नरेश मीणा अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ टोंक पहुंचे। उनके आने से पहले ही प्रशासन काफी चौकन्ना नजर आया। कलेक्ट्रेट परिसर के चारों तरफ भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। पहली बार सीढ़ियों पर भी बैरिकेड्स लगा दिए गए थे।
दोपहर करीब साढ़े बारह बजे नरेश मीणा कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे। वहां उनके समर्थकों ने जमकर नारेबाजी की और अपना विरोध जताया। स्थिति को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। प्रशासन किसी भी तरह का जोखिम नहीं उठाना चाहता था।
कलेक्टर चेंबर में हुई लंबी चर्चा
इसके बाद नरेश मीणा को कलेक्टर टीना डाबी से मिलने बुलाया गया। उनके साथ कुछ चुनिंदा समर्थक और पीड़ित लोग भी अंदर गए। टीना डाबी ने सबकी शिकायतों को विस्तार से सुना। इस दौरान संबंधित विभागों के बड़े अधिकारी भी वहां मौजूद थे।
मुलाकात के दौरान पानी की किल्लत पर बिंदुवार चर्चा की गई। टीना डाबी ने अधिकारियों को तुरंत समाधान निकालने के निर्देश दिए। उन्होंने भरोसा दिया कि सात दिनों में एक्शन प्लान लागू होगा। इस आश्वासन के बाद माहौल पूरी तरह बदल गया।
प्रशासनिक कार्यशैली की हुई तारीफ
बाहर आकर नरेश मीणा ने मीडिया से खास बातचीत की। उन्होंने कलेक्टर टीना डाबी की कार्यशैली की जमकर तारीफ की। मीणा ने कहा कि वे कलेक्टर के काम करने के तरीके से प्रभावित हैं। उन्होंने अधिकारियों के सामने स्पष्ट समय सीमा तय कर दी है।
नरेश मीणा ने अपना प्रस्तावित धरना तुरंत स्थगित कर दिया। उन्होंने कहा कि अब सात दिन तक वे प्रशासन का इंतजार करेंगे। उन्हें उम्मीद है कि अब आंदोलन की जरूरत नहीं पड़ेगी। पानी के टैंकरों की सप्लाई भी जल्द शुरू की जाएगी।
मंत्री की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
हालांकि, नरेश मीणा राजस्थान जलदाय मंत्री कन्हैयालाल चौधरी पर काफी नाराज दिखे। उन्होंने कहा कि मंत्री इसी जिले के रहने वाले हैं। इसके बावजूद लोगों को पानी खरीदकर पीना पड़ रहा है। यह प्रशासन की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा सवाल है।
मीणा ने कहा कि जो अपने जिले की समस्या नहीं सुलझा सकता। वह पूरे प्रदेश का भला कैसे कर पाएगा? फिलहाल टोंक प्रशासन ने चैन की सांस ली है। पुलिस ने भी कलेक्ट्रेट से अब बैरिकेड्स हटा दिए हैं।
जनता को मिली बड़ी राहत
पूरा मामला अब पूरी तरह शांत हो चुका है। अब सबकी नजरें सात दिन के उस वादे पर टिकी हैं। अगर समस्या हल नहीं हुई तो फिर हलचल बढ़ सकती है। फिलहाल जनता को राहत मिलने की उम्मीद जाग गई है। क्षेत्र के लोगों को अब उम्मीद है कि जल्द पानी आएगा। टैंकरों के माध्यम से सप्लाई सुधारने की बात भी कही गई है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
नरेश मीणा ने टोंक में धरना देने का फैसला क्यों लिया था?
नरेश मीणा ने देवली-उनियारा विधानसभा क्षेत्र में हो रही पानी की भारी किल्लत के कारण धरने का ऐलान किया था। इलाके के लोग भीषण गर्मी में पानी के लिए तरस रहे थे। प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम न उठाए जाने पर उन्होंने अनिश्चितकालीन धरने की चेतावनी दी थी।
कलेक्टर टीना डाबी और नरेश मीणा की मुलाकात का क्या नतीजा निकला?
दोनों के बीच हुई लंबी वार्ता काफी सफल रही। टीना डाबी ने नरेश मीणा को भरोसा दिया कि सात दिनों के भीतर पेयजल समस्या का समाधान कर दिया जाएगा। उन्होंने इसके लिए संबंधित अधिकारियों को एक एक्शन प्लान बनाने और टैंकरों से पानी सप्लाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी मौके पर ही दे दिए।
टोंक कलेक्ट्रेट में सुरक्षा के क्या इंतजाम किए गए थे?
नरेश मीणा के आंदोलन को देखते हुए कलेक्ट्रेट को एक अभेद्य किले में बदल दिया गया था। तीन थानों की पुलिस के साथ ही पुलिस लाइन से अतिरिक्त जाब्ता बुलाया गया था। कलेक्ट्रेट की सीढ़ियों तक को बैरिकेड्स लगाकर बंद कर दिया गया था ताकि समर्थक कलेक्टर चेंबर तक सीधे न पहुंच सकें।
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