NEET 2026: 30 हजार में बिका गेस पेपर; केरल से सीकर तक जुड़ा नेटवर्क
News In Short
- SOG की जांच में खुलासा, परीक्षा से दो दिन पहले करीब 600 अंकों के सवाल छात्रों तक पहुंचे।
- परीक्षा से ठीक एक रात पहले सोशल मीडिया पर मात्र 30 हजार रुपए में बिका संदिग्ध पेपर।
- बरामद गेस पेपर में 140 से अधिक प्रश्न नीट के मूल प्रश्नपत्र से हू-ब-हू मेल खाते पाए गए।
- खुद को बचाने के लिए शिकायत करने वाला पीजी संचालक अब SOG की जांच के मुख्य घेरे में।
- संदिग्ध गेस पेपर का मुख्य लिंक केरल में पढ़ रहे चूरू के एक एमबीबीएस छात्र से जुड़ा।
News In Detail
Sikar: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET 2026 एक बार फिर विवादों के घेरे में है। राजस्थान स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) की जांच में सनसनीखेज खुलासे हुए हैं, जो बताते हैं कि परीक्षा से दो दिन पहले ही करीब 600 नंबर के सवाल सीकर में छात्रों तक पहुंच चुके थे। जांच एजेंसी अब इस बात की पुष्टि करने में जुटी है कि यह महज एक गैस पेपर था या व्यवस्थित तरीके से लीक किया गया प्रश्नपत्र।
30-30 हजार में बिका पेपर
SOG सूत्रों के अनुसार, इस कथित क्वेश्चन बैंक की खरीद-फरोख्त का बाजार बेहद सक्रिय था। शुरुआती दिनों में यह सामग्री 2 से 5 लाख रुपए में बेची गई, लेकिन परीक्षा से ठीक एक रात पहले इसकी कीमत गिरकर मात्र 30 हजार रुपए रह गई।
जांच का एक सिरा केरल के एक मेडिकल कॉलेज में पढ़ रहे चूरू के युवक से जुड़ रहा है। बताया जा रहा है कि इस छात्र ने 1 मई को यह संदिग्ध सामग्री सीकर में अपने एक दोस्त को भेजी थी, जहां से यह एक पीजी (PG) संचालक के माध्यम से करियर काउंसलर्स और दर्जनों अभ्यर्थियों तक 'फॉरवर्डेड मेनी टाइम्स' टैग के साथ वायरल हो गई।
140 प्रश्न हू-ब-हू
SOG को मिले इस हाथ से लिखे हुए क्वेश्चन बैंक में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी के 300 से अधिक सवाल शामिल थे। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से 140 से अधिक प्रश्न और उनके उत्तरों के विकल्प परीक्षा के मूल पेपर से मेल खाते हैं। चूंकि नीट में प्रत्येक प्रश्न 4 अंक का होता है, ऐसे में लगभग 560 से 600 अंकों के सवाल पहले से लीक होने की आशंका है। किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में इतनी बड़ी संख्या में प्रश्नों का हू-ब-हू मिलना असामान्य माना जाता है।
रडार पर पीजी संचालक और सोशल मीडिया चैट्स
पूरे मामले में सीकर के एक पीजी संचालक पर मुख्य रूप से संदेह है। दिलचस्प बात यह है कि परीक्षा के बाद उसी संचालक ने एनटीए (NTA) को शिकायत देकर लीक का दावा किया था। हालांकि, SOG को संदेह है कि उसने पकड़े जाने के डर से खुद को व्हिसलब्लोअर के रूप में पेश करने की कोशिश की, जबकि उसने खुद यह सामग्री आगे बांटी थी।
मानवीय सेंधमारी की ओर इशारा
एजेंसी अब एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड ऐप्स की चैट्स और कॉल डिटेल्स खंगाल रही है। 5G जैमर और एआई कैमरों जैसे तकनीकी सुरक्षा इंतजामों के बीच इस तरह की सेंधमारी सीधे तौर पर सिस्टम की मानवीय खामी को दर्शाती है। आशंका है कि प्रिंटिंग प्रेस या बैंक कस्टडी के स्तर पर ही इस साजिश को अंजाम दिया गया है।
अगर SOG की जांच में यह साबित हो जाता है कि 600 नंबर की सामग्री पहले से ही सार्वजनिक थी, तो 22 लाख से अधिक छात्रों का भविष्य और इस साल की मेरिट लिस्ट पूरी तरह प्रभावित हो सकती है।
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