NEET री-एग्जाम में हिजाब पहनी छात्रा को रोका, हंगामे के बाद जानें क्या हुआ?
समझें क्या है पूरा मामला
- अजमेर में NEET री-एग्जाम के दौरान हिजाब पहनने पर छात्रा को प्रवेश से रोका।
- सुरक्षाकर्मियों ने हिजाब हटाने की शर्त रखी, जिससे परीक्षा केंद्र पर हंगामा हो गया।
- छात्रा ने NTA के नियम 18 का हवाला देते हुए अपनी धार्मिक पोशाक की अनुमति मांगी।
- प्रशासन ने महिला सुरक्षाकर्मियों से निजी कक्ष में गहन जांच करवाकर छात्रा को प्रवेश दिया।
- NTA के नियमों में हिजाब, पगड़ी को पारंपरिक पोशाक में शामिल किया गया है।
राजस्थान के अजमेर शहर में NEET री-एग्जामिनेशन के दौरान एक परीक्षा केंद्र पर सुरक्षा व्यवस्था और पारंपरिक पोशाक को लेकर विवाद खड़ा हो गया। ब्यावर क्षेत्र की रहने वाली छात्रा कुलसुम बानो हिजाब पहनकर परीक्षा केंद्र पहुंची तो सुरक्षाकर्मियों ने उसे प्रवेश द्वार पर रोक लिया।
उनका कहना था कि हिजाब हटाए बिना सीधे प्रवेश नहीं मिलेगा। इससे छात्रा और परिजन भड़क गए और गेट पर हंगामा हो गया।
बाद में प्रशासन के हस्तक्षेप और NTA की आधिकारिक गाइडलाइंस के तहत समाधान निकाला गया, जिसके बाद छात्रा को समय पर परीक्षा में बैठने का मौका मिला।
गेट पर क्यों भड़का विवाद?
जैसे ही कुलसुम बानो मुख्य प्रवेश द्वार पर कतार में खड़ी हुई, वहां तैनात निजी गार्ड्स और चेकिंग स्टाफ ने उसे रोक लिया। सुरक्षाकर्मियों का तर्क था कि ढीले कपड़े, बुर्के या हिजाब में सीधे प्रवेश नहीं दिया जा सकता। उन्होंने शर्त रखी कि परीक्षा कक्ष में जाने के लिए पहले बुर्का पूरी तरह हटाना होगा।
इस शर्त को सुनते ही छात्रा और परिजन भड़क गए और धार्मिक आस्था व नियमों का हवाला देकर सख्त आपत्ति जताई। इससे मुख्य गेट पर अन्य परीक्षार्थियों की कतारें भी प्रभावित होने लगीं।
छात्रा ने रखा अपना पक्ष
हंगामे के बीच कुलसुम बानो ने स्थानीय मीडिया और प्रशासनिक अमले के सामने अपना पक्ष रखा। उसने NTA के नियम 18 का हवाला देते हुए कहा कि देश के अभ्यर्थी अपनी धार्मिक और पारंपरिक पोशाक में परीक्षा देने आ सकते हैं।
छात्रा ने बताया कि उसने 3 मई को हुई मुख्य NEET परीक्षा में भी यही पारंपरिक पोशाक पहनी थी और तब किसी केंद्र पर नहीं रोका गया था। उसने यह भी कहा कि परिवार ने महिला सुरक्षा स्टाफ से पर्दे के पीछे पूरी चेकिंग करने का अनुरोध किया था, लेकिन शुरुआत में मना कर दिया गया।
प्रशासन के हस्तक्षेप से निकला हल
जैसे-जैसे परीक्षा शुरू होने का समय नजदीक आया, तनाव और बढ़ने लगा। मामले की संवेदनशीलता देखते हुए केंद्र अधीक्षक और स्थानीय पुलिस-प्रशासन ने तुरंत हस्तक्षेप किया। अधिकारियों ने सुरक्षाकर्मियों को NTA की कस्टमरी ड्रेस नियमावली के बारे में विस्तार से समझाया।
इसके बाद महिला सुरक्षाकर्मियों की एक टीम बुलाई गई। कुलसुम बानो को एक अलग प्राइवेसी केबिन में ले जाया गया जहां गरिमा का ध्यान रखते हुए गहन मैनुअल जांच की गई।
यह सुनिश्चित करने के बाद कि बुर्के-हिजाब में कोई प्रतिबंधित सामग्री, ब्लूटूथ डिवाइस या नकल की पर्ची नहीं है, छात्रा को उसी पोशाक में परीक्षा कक्ष में जाने की अनुमति मिल गई।
हिजाब, बुर्का, पगड़ी और कड़ा को लेकर क्या हैं नियम?
NTA अपनी आधिकारिक नियमावली में स्पष्ट करता है कि किसी भी अभ्यर्थी को धार्मिक मान्यताओं के कारण परीक्षा से वंचित नहीं किया जा सकता।
हिजाब, बुर्का, सिख समुदाय की पगड़ी, कड़ा और कृपाण को पारंपरिक पोशाक की श्रेणी में रखा गया है और इन्हें पहनने की छूट है। लेकिन इसके लिए कुछ तकनीकी और प्रशासनिक नियमों का पालन अनिवार्य है।
पहला नियम समय का है। पारंपरिक पोशाक में आने वाले अभ्यर्थियों को सामान्य रिपोर्टिंग समय से 1 से 1.5 घंटे पहले केंद्र पहुंचना होता है, ताकि जांच के लिए पर्याप्त समय मिल सके।
दूसरा नियम गहन सुरक्षा जांच का है। हाई-टेक नकल रोकने के लिए मेटल डिटेक्टर और मैनुअल जांच होती है, लेकिन यह जांच सिर्फ महिला सुरक्षाकर्मी द्वारा और पूरी तरह बंद कमरे या पर्दे के पीछे की जाती है ताकि निजता बनी रहे।
तीसरा नियम धातु की वस्तुओं पर प्रतिबंध का है। सेफ्टी पिन, मेटैलिक हेयर क्लिप, ब्रोच या धातु के भारी बटन वर्जित हैं। हिजाब बांधने के लिए सूती धागे, कपड़े की सिलाई या बिना मेटल वाले रबर बैंड का इस्तेमाल किया जा सकता है।
आवेदन में विकल्प न चुनने पर भी खुला है रास्ता
NEET के ऑनलाइन फॉर्म में अभ्यर्थियों से पूछा जाता है कि क्या वे पारंपरिक पोशाक में आना चाहते हैं। अगर कोई अनजाने में यह विकल्प चुनना भूल भी जाए, तो भी उसे रोका नहीं जा सकता, बशर्ते वह तय समय से पहले केंद्र पहुंचे और गहन चेकिंग की स्वैच्छिक अनुमति दे।
FAQ
- अजमेर में NEET री-एग्जाम के दौरान क्या विवाद हुआ?
हिजाब पहनकर पहुंची छात्रा कुलसुम बानो को सुरक्षाकर्मियों ने प्रवेश द्वार पर रोक लिया और हिजाब हटाने की शर्त रखी। इससे परिजनों ने विरोध जताया और हंगामा हुआ। बाद में प्रशासन के हस्तक्षेप से प्राइवेसी केबिन में जांच कर छात्रा को परीक्षा में बैठने दिया गया। - क्या NTA के नियमों के अनुसार पारंपरिक पोशाक में परीक्षा देना वैध है?
NTA के नियम 18 के अनुसार हिजाब, बुर्का, पगड़ी, कड़ा जैसी धार्मिक और पारंपरिक पोशाक पहनकर परीक्षा देना पूरी तरह वैध है। लेकिन इसके लिए तय समय से पहले पहुंचना और महिला सुरक्षाकर्मी द्वारा निजी जांच कराना अनिवार्य है।
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