सूबेदार के बेटे ने नीट-यूजी में गाड़ा झंडा, दोबारा परीक्षा में भी आए 705 अंक
समझें क्या है पूरा मामला
- अलवर के गौरव सिंह ने नीट-यूजी में ऑल इंडिया 9वीं रैंक प्राप्त की।
- इस बार गौरव ने परीक्षा में 720 में से 705 अंक हासिल किए।
- रोचक बात यह है कि पहली परीक्षा में उसको 705 अंक आए।
- गौरव ने कोटा में कोचिंग प्राप्त कर नीट की तैयारी की थी।
- परीक्षा तैयारी में फौजी पिता का अनुशासन और परिवार का साथ मिला।
सुनील जैन @ अलवर
कहते हैं कि प्रतिभा और पक्का इरादा हो तो परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन हों, सफलता कदम चूम ही लेती है। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है मुंडावर क्षेत्र के एक छोटे से गांव गादूवास के रहने वाले गौरव सिंह ने।
गौरव ने नीट यूजी (NEET UG) में शानदार प्रदर्शन करते हुए ऑल इंडिया 9वीं रैंक (AIR-9) हासिल की है। उन्होंने परीक्षा में 720 में से 705 अंक प्राप्त कर न सिर्फ अपने माता-पिता, बल्कि पूरे जिले का नाम रोशन कर दिया है।
जब रद्द हुई परीक्षा, तब डिगे नहीं कदम
गौरव की यह सफलता आम सफलताओं से बहुत अलग है। नीट परीक्षा को लेकर उपजे विवाद के बाद जब पहली परीक्षा रद्द हुई और दोबारा परीक्षा का फैसला हुआ, तो लाखों छात्र मानसिक तनाव से गुजर रहे थे। गौरव भी इससे अछूते नहीं रहे।
गौरव बताते हैं, जब पहली बार परीक्षा रद्द हुई, तो मैं कई दिनों तक मानसिक रूप से बेहद परेशान रहा। सब कुछ नए सिरे से शुरू करना और दोबारा उसी एकाग्रता से तैयारी करना आसान नहीं था।
गौरव ने अपने आत्मविश्वास को डगमगाने नहीं दिया। पहली परीक्षा में भी उनके 705 अंक आए थे। जब दोबारा परीक्षा हुई, तब भी उन्होंने पूरे आत्मविश्वास के साथ 705 अंक हासिल किए। उसने यह साबित कर दिया कि उनकी सफलता कोई तुक्का नहीं, बल्कि उनकी कड़ी मेहनत का नतीजा थी।
फौजी पिता का अनुशासन और परिवार का साथ
गौरव के रगों में देश सेवा और अनुशासन का जज्बा बचपन से है। उनके पिता राजेश सिंह सेना में सूबेदार हैं। वहीं उनकी मां एक गृहिणी हैं। इन्होंने घर पर गौरव की पढ़ाई के लिए शांत और सकारात्मक माहौल तैयार किया।
गौरव के घर में पहले से ही चिकित्सा के क्षेत्र में करियर बनाने की राह चुनी जा चुकी थी। उनकी बड़ी बहन अनुजा सिंह अलवर के ईएसआईसी (ESIC) मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस तृतीय वर्ष की छात्रा हैं।
बड़ी बहन के मेडिकल के सफर और किताबों ने गौरव को भी डॉक्टर बनने के लिए प्रेरित किया। माता-पिता के निरंतर प्रोत्साहन और बहन के मार्गदर्शन ने गौरव को हर कदम पर संबल दिया।
कोटा में निखरी प्रतिभा, संस्थान ने किया सम्मानित
गौरव ने अपनी इस सफलता की नींव देश की कोचिंग राजधानी कहे जाने वाले कोटा में रखी। उन्होंने यहां के प्रतिष्ठित कोचिंग संस्थान से नीट की तैयारी की। गौरव की इस सफलता के बाद कोचिंग संस्थान उसे कोटा बुलाया है। संस्थान उसका अभिनंदन करेगी।
मूल रूप से गादूवास गांव के रहने वाले इस परिवार का अलवर शहर के हनुमान सर्किल के पास भी एक मकान है। इसे फिलहाल उन्होंने किराए पर दिया हुआ है।
युवाओं के लिए गौरव का सक्सेस मंत्र
अपनी सफलता का राज साझा करते हुए गौरव ने नीट की तैयारी कर रहे छात्रों को जरूरी संदेश दिया है। गौरव कहते हैं, युवाओं को परिस्थितियों के आगे कभी हार नहीं माननी चाहिए।
लगातार प्रयास करते रहना ही सफलता की एकमात्र कुंजी है। जीवन में जब तक आप अपना एक स्पष्ट लक्ष्य तय नहीं करेंगे, तब तक आपको सही दिशा और सफलता नहीं मिल सकती।
ये भी पढ़ें:-
RE-NEET: परीक्षा हॉल में मोबाइल लेकर बैठी रही छात्रा, एआई से ढूंढ रही थी जवाब
NEET री-एग्जाम में हिजाब पहनी छात्रा को रोका, हंगामे के बाद जानें क्या हुआ?
RE-NEET पेपर दिलाने का दिया झांसा, 1500 से अधिक छात्रों से ठगी
राजस्थान में NEET परीक्षा को लेकर हाई-अलर्ट, वायु सेना संभालेगी पेपर की कमान