सेरेब्रल पाल्सी पीड़ित बेटे के लिए बनाई बडी चेयर, राष्ट्रपति करेंगीं सम्मानित
समझें क्या है पूरा मामला
- मां के दर्द ने बनाई उन्नति, दिव्यांग बच्चों को मिली नई ज़िंदगी।
- मां ने सेरेब्रल पाल्सी से जूझ रहे बेटे के लिए बनाई बडी चेयर।
- चेयर से स्कूलों में दिव्यांग बच्चों को मिलेगी सही बैठने की व्यवस्था।
- नवाचार को राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान, राष्ट्रपति करेंगी सम्मानित।
- 900 ग्राम वजन में जन्मे बेटे के संघर्ष ने जन्म दिया अनोखे नवाचार को।
मुकेश सोनी @ जोधपुर
जोधपुर की नेहा सोलंकी ने अपने बेटे देवराज की जरूरत से प्रेरित होकर एक अनोखा नवाचार किया है। उन्होंने दिव्यांग बच्चों के लिए बडी चेयर (Buddy Chair) विकसित की है।
यह चेयर सेरेब्रल पाल्सी और अन्य न्यूरो-मोटर चुनौतियों वाले बच्चों को सही मुद्रा में बैठने में मदद करती है। उनके इस नवाचार को डिज़ाइन पेटेंट मिला है और राष्ट्रीय ग्रासरूट्स इनोवेशन सम्मान के लिए चुना गया है। नेहा को यह सम्मान राष्ट्रपति द्वारा प्रदान किया जाएगा।
बेटे के संघर्ष ने दी प्रेरणा
नेहा सोलंकी के बेटे देवराज का जन्म गर्भावस्था के केवल 27वें सप्ताह में हुआ। जन्म के समय उसका वजन मात्र 900 ग्राम था। उसे 105 दिनों तक NICU (Neonatal Intensive Care Unit) में रहना पड़ा। छह महीने की उम्र में डॉक्टरों ने बताया कि देवराज सेरेब्रल पाल्सी से प्रभावित है, जिससे उसकी बैठने और चलने की क्षमता प्रभावित हुई।
जब नेहा अपने बेटे के लिए स्कूल ढूंढ़ने गईं, तो अधिकांश स्कूलों ने उसकी दिव्यांगता के कारण प्रवेश देने से इनकार कर दिया। एक स्कूल ने प्रवेश तो देने की सहमति जताई, लेकिन पूछा- बच्चा बैठेगा कहां? यही सवाल उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट बन गया।
बडी चेयर का निर्माण
नेहा ने महसूस किया कि समस्या बच्चे में नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था में है जहां दिव्यांग बच्चों के लिए आवश्यक सहायक उपकरणों का अभाव है। उन्होंने रीहैबिलिटेशन साइकोलॉजी में मास्टर्स किया और विशेषज्ञों तथा अभिभावकों के साथ मिलकर समाधान तलाशना शुरू किया।
इसी का नतीजा है उन्नति एडैप्टिव डिवाइसेज़ और बडी चेयर। यह भारतीय एडैप्टिव सीटिंग सिस्टम है, जो सेरेब्रल पाल्सी और अन्य चुनौतियों वाले बच्चों को सुरक्षित एवं सही मुद्रा में बैठने में मदद करता है। इससे वे स्कूल, थेरेपी और दैनिक गतिविधियों में सहजता से भाग ले सकते हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर पहचान
इस अभिनव डिज़ाइन को डिज़ाइन पेटेंट मिल चुका है। साथ ही, नेहा सोलंकी का चयन अटल इनोवेशन मिशन (नीति आयोग) के राष्ट्रीय ग्रासरूट्स इनोवेशन सम्मान के लिए किया गया है। यह प्रतिष्ठित सम्मान उन्हें भारत के माननीय राष्ट्रपति द्वारा प्रदान किया जाएगा।
समाज के लिए संदेश
नेहा सोलंकी का कहना है कि किसी भी बच्चे को उसकी दिव्यांगता नहीं, बल्कि समाज में मौजूद बाधाएं पीछे रखती हैं। उनका मानना है कि हमें बच्चों को बदलने की नहीं, बल्कि दुनिया को उनके लिए अधिक समावेशी बनाने की जरूरत है।
आज उन्नति एडैप्टिव डिवाइसेज़ कई सहायक उपकरण विकसित करने की दिशा में काम कर रही है, ताकि दिव्यांग बच्चों का जीवन अधिक स्वतंत्र और सम्मानजनक हो सके।
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