विदेश की लाखों-करोड़ों की नौकरी छोड़ बने IAS, जानिए आईएएस अभिषेक सुराणा की कहानी
Jageshwar prasad | May 04, 2026, 14:34 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान कैडर के आईएएस अभिषेक सुरणा की कहानी दिलचस्प है। उन्होंने विदेश में लाखों-करोड़ों के पैकेज की नौकरी छोड़कर देशसेवा के लिए प्रशासनिक सेवा की राह चुनीं। आइए जानते हैं कि उनके आईएएस बनने के सफर के बारे में।
राजस्थान के भीलवाड़ा का एक लड़का, जिसने आईआईटी दिल्ली से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। सिंगापुर और लंदन में लाखों-करोड़ों की सैलरी वाली नौकरी की और फिर भारत लौट आया। यह कहानी है राजस्थान कैडर के आईएएस अभिषेक सुराणा की, जिन्होंने सरकारी नौकरी के चार्म को विदेश की लग्जरी लाइफ से ऊपर रखा।
अभिषेक सुराणा का जन्म भीलवाड़ा के एक साधारण परिवार में हुआ था। उनके पिता डॉ. अनिल सुराणा राजकीय सेठ मुरलीधर मानसिंहका कन्या महाविद्यालय में प्राध्यापक हैं और माता सुनीता सुराणा एक समाज सेविका हैं। अभिषेक पढ़ाई के साथ-साथ एक्सट्रा करिकुलर एक्टिविटीज में भी काफी सक्रिय रहते थे और अपने स्कूल में हेड बॉय थे।
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12वीं बोर्ड परीक्षा पास करने के बाद, अभिषेक ने जेईई परीक्षा दी और आईआईटी दिल्ली में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग ब्रांच में एडमिशन लिया। आईआईटी से पढ़ाई पूरी करने के बाद उनकी सिंगापुर में बार्कलेज इन्वेस्टमेंट बैंक में नौकरी लग गई, जहां उन्हें काफी अच्छी सैलरी मिल रही थी। इसके बाद उन्होंने लंदन में भी एक बैंक में काम किया और फिर अपना स्टार्टअप लॉन्च करने के लिए साउथ अमेरिका के चिली में रहे।
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विदेश में काम करते हुए अभिषेक को महसूस हुआ कि उनकी लाइफ में कुछ मिसिंग है। उन्हें देश की सेवा करने का जज्बा जागा और उन्होंने भारत लौटकर यूपीएससी परीक्षा की तैयारी करने का फैसला किया। 2014 में वह भारत लौट आए और पूरी मेहनत से तैयारी शुरू कर दी।
चौथे प्रयास में बने
यूपीएससी परीक्षा की तैयारी काफी कठिन होती है, लेकिन अभिषेक ने हार नहीं मानी। दो प्रयासों में असफल होने के बाद उन्होंने तीसरे प्रयास में 250वीं रैंक हासिल की और आईपीएस ऑफिसर बने। लेकिन उनका लक्ष्य आईएएस अफसर बनना था, इसलिए पुलिस ट्रेनिंग के साथ उन्होंने यूपीएससी परीक्षा का चौथा अटेंप्ट दिया और इस बार 10वीं रैंक हासिल कर आईएएस अफसर बने।
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अभिषेक का कहना है कि यूपीएससी की तैयारी करने के लिए खुद को दिमागी रूप से तैयार करना होता है। परीक्षा के दौरान कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, लेकिन अभ्यर्थियों को इन सबसे ऊपर उठकर अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत होती है।
अभिषेक के पिता डॉ. अनिल सुराणा ने कहा कि अभिषेक के दादा दिवंगत मूलचंद सुराणा का सपना था कि वह भीलवाड़ा कलेक्टर मीठा लाल मेहता की तरह कलेक्टर बने और देश व गरीबों की सेवा करे। अभिषेक ने अपने दादा का सपना पूरा कर दिखाया है और अब वह देश और गरीबों की सेवा कर रहा है।
2018 बैच के आईएएस अभिषेक सुराणा की वर्तमान पोस्टिंग चूरू जिला कलेक्टर के तौर पर है। इससे पहले वह चौमू व माउंट आबू में एसडीएम सहित जोधपुर जिला परिषद के सीईओ व नगर निगम हेरीटेज जयपुर में आयुक्त के पद पर रह चुके हैं।
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पढ़ाई में हमेशा रहे अव्वल, स्कूल में थे हेड बॉय
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आईआईटी दिल्ली से की इंजीनियरिंग, फिर विदेश में की नौकरी
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विदेश में महसूस हुई कुछ कमी, देश सेवा का जागा जज्बा
चौथे प्रयास में बने आईएएस
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खुद को दिमागी रूप से तैयार करना है जरूरी
दादा का सपना किया पूरा
अभी हैं चूरू जिला कलेक्टर
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