IAS नीरज के. पवन समेत 5 के खिलाफ चार्जशीट, जानें आरोग्य रथ घोटाले का खेल
समझें क्या है पूरा मामला
- साल 2016 के एनएचएम घोटाले में एसीबी ने बड़ी कार्रवाई।
- आईएएस नीरज के. पवन सहित 5 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट।
- आरोग्य रथ के नाम पर 1 करोड़ रुपए का फर्जी भुगतान उठाया था।
- चार्जशीट पेश होते ही फरार आरोपी सुनील राठौड़ ने सरेंडर कर दिया।
- एसीबी ने मामले को लेकर कोर्ट में 5 हजार पन्नों के दस्तावेज पेश किए।
राजस्थान के बहुचर्चित राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (National Health Mission – NHM) घोटाले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने बड़ी कार्रवाई की है। एसीबी ने शुक्रवार को आईएएस नीरज के. पवन समेत 5 आरोपियों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट पेश कर दी।
जांच एजेंसी ने कोर्ट के समक्ष 5 हजार पन्नों के दस्तावेज दाखिल किए हैं। यह पूरा मामला स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए चलाए गए आरोग्य रथ से जुड़ा हुआ है।
कागजों में चलाया आरोग्य रथ
एसीबी जांच में सामने आया कि साल 2016 में आरोग्य रथ को केवल कागजों में दर्शाकर फर्जीवाड़ा किया गया था। प्रदेशभर में आरोग्य रथ के संचालन के नाम पर करीब 1 करोड़ रुपए के फर्जी बिल तैयार कर भुगतान उठा लिया गया।
फर्जीवाड़े के समय आईएएस नीरज के. पवन एनएचएम के निदेशक पद पर तैनात थे। उनके खिलाफ अभियोजन स्वीकृति मिलने के बाद एसीबी ने कानूनी शिकंजा कसा है।
चार्जशीट दाखिल होते ही आरोपी का सरेंडर
एसीबी द्वारा एसीबी कोर्ट में चार्जशीट पेश करते ही मामले से जुड़ा एक अहम मोड़ आया। लंबे समय से फरार चल रहे आरोपी सुनील राठौड़ ने शुक्रवार दोपहर कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया।
इस मामले में आईएएस नीरज के. पवन के अलावा अकाउंटेंट जोजी वर्गीस, एएओ दीपा गुप्ता, दलाल अजीत सोनी और सुनील राठौड़ को आरोपी बनाया गया है। वहीं टेंडर फर्म संचालक सुरेन्द्र सिंह के खिलाफ जांच लंबित रखी गई है।
17 फीसदी कमीशन का तय था गणित
एसीबी की तफ्तीश में अधिकारियों और दलालों के बीच कमीशनखोरी के बड़े खेल का पर्दाफाश हुआ है। एनएचएम में फर्मों से कुल 17 प्रतिशत कमीशन वसूला जाता था। इसमें से 5 फीसदी टेंडर जारी करते समय और 12 फीसदी बिलों का पेमेंट पास करते समय लिया जाता था।
रिश्वत की इस राशि में सबसे बड़ा 37 फीसदी हिस्सा तत्कालीन निदेशक नीरज के. पवन का तय था। इसके अलावा दीपा गुप्ता को 12 फीसदी, दलाल अजीत सोनी को 0.35 फीसदी और अन्य कर्मचारियों को तय प्रतिशत में हिस्सा दिया जाता था।
2 हजार से ज्यादा दिनों के बनाए फर्जी बिल
आरोग्य रथ के तहत प्रचार-प्रसार के लिए आईईसी (Information, Education and Communication – IEC) शाखा के पास 1.60 करोड़ रुपए का बजट था। दलाल अजीत सोनी ने अधिकारियों से साठगांठ कर इस बजट को बढ़ाकर 5 करोड़ रुपए करवा दिया।
इसके बाद टेंडर सुरेंद्र इलेक्ट्रोटेक को दे दिया गया। फर्म ने महज 3 महीने काम कर 1369 दिन रथ चलाने का दावा किया, लेकिन अधिकारियों ने मिलकर 2548 दिनों के फर्जी बिल पास कर दिए। चिकित्सा विभाग की अपनी जांच में सामने आया कि रथ केवल 552 दिन ही चला था।
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