301 नगरीय निकायों में से 197 पर भाजपा का महापौर-चेयरमैन, निर्दलीयों के दम से चमकी किस्मत
समझें क्या है पूरा मामला
- भाजपा का दबदबा,197 निकायों में जीत दर्ज कर स्थापित किया पूर्ण वर्चस्व।
- क्रॉस वोटिंग का बड़ा खेल,बहुमत के बावजूद पाली और अजमेर में पिछड़ गई कांग्रेस।
- निर्दलीय बने किंगमेकर,अलवर और पाली में निर्दलीयों के सहारे भाजपा ने बनाया मेयर।
- बीकानेर में राहत,अनिल कल्ला की जीत से कांग्रेस का मेयर का खाता खुला।
राजस्थान के 301 नगरीय निकायों के नतीजों में भारतीय जनता पार्टी ने एकतरफा बढ़त बनाते हुए निकाय राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत की है। हालांकि पाली, अजमेर और अलवर जैसे कई प्रमुख निकायों में स्पष्ट बहुमत न होने के बावजूद भाजपा ने निर्दलीयों के सहयोग और विरोधी खेमे में हुई क्रॉस वोटिंग के सहारे बाजी मार ली। जबकि बीकानेर नगर निगम में कांग्रेस के अनिल कल्ला मेयर पद पर जीत दर्ज करने में सफल रहे।
पाली में कांग्रेस के 29 पार्षद, फिर भी भाजपा का मेयर:
65 सदस्यीय पाली नगर निगम में कांग्रेस ने 29,भाजपा के 21 और निर्दलीयों के 15 पार्षद जीते थे। बहुमत के लिए 33 वोट जरूरी थे।
इसके बावजूद मतदान में भाजपा की नमिता बुबकिया को 33 वोट मिले और वह मेयर चुनी गईं। निर्दलीय राजबाला हिंगड़ को 29 और कांग्रेस की सुमित्रा जैन को सिर्फ 3 वोट मिले। यानी कांग्रेस की सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद उसके पार्षदों का पूरा समर्थन मेयर उम्मीदवार को नहीं मिल सका।
अजमेर में बदल गए समीकरण
अजमेर में कांग्रेस 37 वार्ड जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। भाजपा के 32 पार्षद और 11 निर्दलीय थे। बहुमत का आंकड़ा 41 था। चुनाव से पहले कांग्रेस को चार अतिरिक्त वोटों की जरूरत थी, जबकि भाजपा को बहुमत तक पहुंचने के लिए निर्दलीयों के समर्थन पर निर्भर रहना था।मेयर चुनाव में भाजपा की अनामिका शर्मा ने बाजी मार ली। उन्हें 43 वोट मिले जबकि कांग्रेस 37 वोटों पर ही सिमट गई। पार्षदों के चुनाव में बढ़त बनाने के बावजूद कांग्रेस अंतिम नतीजों में पिछड़ गई।
अलवर में निर्दलीयों के सहारे मारी बाजी
65 सदस्यीय अलवर नगर निगम में भाजपा 28 पार्षदों के साथ सबसे बड़ा दल था। कांग्रेस के 23 तथा 13 निर्दलीय और एक बसपा पार्षद था। बहुमत के लिए 33 वोट चाहिए थे। भाजपा ने निर्दलीयों का समर्थन जुटाकर सुमनलता अग्रवाल को मेयर बनाने में सफलता हासिल की है।
राजस्थान के 10 नगर निगमों में महापौर चुनाव की स्थिति
| क्रम | नगर निगम | परिणाम/स्थिति | महापौर | पार्टी | प्रमुख तथ्य |
|---|---|---|---|---|---|
| 1 | जयपुर | चुनाव 25 सितंबर को | — | — | 25 सितंबर को मतदान/मतगणना |
| 2 | जोधपुर | चुनाव 25 सितंबर को | — | — | 25 सितंबर को मतदान/मतगणना |
| 3 | कोटा | चुनाव 25 सितंबर को | — | — | 25 सितंबर को मतदान/मतगणना |
| 4 | भरतपुर | निर्विरोध | अनुराधा सिंह | भाजपा | निर्विरोध चुनी गईं, आज शपथ ली |
| 5 | अलवर | भाजपा की जीत | सुमनलता अग्रवाल | भाजपा | 42 वोट; कांग्रेस को 23 वोट |
| 6 | पाली | भाजपा की जीत | नमिता बुबकिया | भाजपा | 33 वोट; निर्दलीय राजबाला को 29, कांग्रेस को 3 |
| 7 | बीकानेर | कांग्रेस की जीत | अनिल कल्ला | कांग्रेस | 50 वोट; भाजपा के सुरेंद्र सिंह शेखावत को 30 |
| 8 | उदयपुर | भाजपा की जीत | पारस सिंघवी | भाजपा | 55 वोट; कांग्रेस की पूनम कुंवर राठौड़ को 25 |
| 9 | अजमेर | भाजपा की जीत | अनामिका शर्मा | भाजपा | बीजेपी को 43 और कांग्रेस को 37 वोट मिले |
| 10 | भीलवाड़ा | निर्विरोध | जसवंत कंवर | भाजपा | निर्विरोध निर्वाचन; अब उपमहापौर पर मंथन |
निर्दलीयों और व्यक्तिगत समर्थन आया काम
पांच मेयर चुनावों ने निकाय चुनाव की राजनीति में निर्दलीयों और क्रॉस वोटिंग की भूमिका को उजागर कर दिया है। उदयपुर और बीकानेर में स्पष्ट बहुमत होने से चुनाव आसान रहा। लेकिन पाली,अजमेर और अलवर में किसी दल के पास बहुमत नहीं था।
ऐसे में पार्षदों का व्यक्तिगत समर्थन और निर्दलीयों का रुख निर्णायक बना। वार्ड चुनाव में भाजपा ने 4,179 वार्ड जीते थे,जबकि कांग्रेस के खाते में 3,613 और निर्दलीयों के खाते में 2,273 वार्ड आए।
यहां निर्विरोध निर्वाचन
पुष्कर, गोविंदगढ़-रामबास, खेरली, धोरीमन्ना, चौहटन, रायपुर, बयाना, भरतपुर, नदबई, रूपवास, उच्चैन, निंबाहेड़ा, खेतड़ी, हिंडौन सिटी, भिवाड़ी, कोटकासिम और पलसाना सहित कई निकायों में उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए।
तीन नगर निगम का रिजल्ट 25 को
जयपुर, जोधपुर, और कोटा नगर निगम के लिए मेयर का चुनाव 25 सितम्बर को होगा। तिजारा नगर परिषद एवम श्री विजय नगर, खाटू श्याम जी के रिजल्ट आने बाकि है
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