निकाय चुनाव: अजमेर में 4 वोट की तलाश, सीकर में बहुमत; फिर कांग्रेस को किस बात का डर?
Mukesh Sharma | Sept 19, 2026, 16:40 IST
अजमेर-सीकर में मेयर की कुर्सी पर सियासी घमासान
राजस्थान के अजमेर और सीकर निकाय चुनावों में बहुमत के करीब होने के बावजूद कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग का डर सता रहा है। पार्षदों को बेंगलुरु भेजा गया है।
समझें क्या है पूरा मामला
- निकाय चुनाव: कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग का डर।
- अजमेर में 37 पार्षद, फिर भी बेंगलुरु में बाड़ेबंदी।
- सीकर में पीसीसी चीफ डोटासरा की साख दांव पर।
- कई निकायों में बहुमत के बावजूद सतर्क कांग्रेस।
- अजमेर-सीकर में मेयर पद की दिलचस्प जंग।
वजह है गुप्त मतदान, निर्दलीयों का खेल और क्रॉस वोटिंग की आशंका। इसी बीच कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भाजपा पर पुलिस-प्रशासन के जरिए पार्षदों पर दबाव बनाने का आरोप लगाकर मुकाबले को और गरमा दिया। भाजपा की तरफ से ऐसे आरोपों को खारिज किया जा रहा।
कांग्रेस को सता रहा क्रॉस वोटिंग का डर
अजमेर में महापौर का सियासी संग्राम
कांग्रेस को अपने पार्षदों को एकजुट रखने की चिंता
अजमेर कांग्रेस ने भाजपा और पुलिस पर पार्षदों तथा उनके परिवारों पर दबाव बनाने के आरोप भी लगाए। कांग्रेस नेताओं ने इस मुद्दे पर कलेक्टर के सामने विरोध दर्ज कराया।
सीकर नगर परिषद में कांग्रेस के पास साफ बहुमत
सीकर के अलावा लक्ष्मणगढ़, लोसल और रामगढ़ शेखावाटी जैसे निकायों पर भी दोनों दलों की नजर है। खासकर लक्ष्मणगढ़ में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी जरूर है, लेकिन बहुमत से दूर है। यहां 45 में कांग्रेस के 20, भाजपा के 15 और 10 निर्दलीय जीते हैं। बोर्ड बनाने के लिए 23 पार्षद चाहिए। ऐसे में यहां निर्दलीयों की भूमिका सीधे सत्ता का फैसला कर सकती है।
डोटासरा की साख का भी सवाल
कांग्रेस ने सीकर नगर परिषद में साफ बहुमत हासिल किया। वहीं जिले के कई दूसरे निकायों में निर्दलीय अहम स्थिति में हैं। जिले के 14 निकायों में 110 निर्दलीय प्रत्याशी जीते हैं। ऐसे में अध्यक्ष और सभापति चुनाव में दोनों दलों के राजनीतिक प्रबंधन की भी परीक्षा है।
डोटासरा ने CMO को भी घेरा
डोटासरा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और निर्दलीय पार्षदों पर मुकदमों और पुलिस कार्रवाई का दबाव बनाया जा रहा है, ताकि भाजपा अपने बोर्ड बना सके। उन्होंने भरतपुर, बीकानेर, जोधपुर, उदयपुर, श्रीगंगानगर, संगरिया, कुचेरा, बहरोड़, बानसूर, सीकर, लोसल और दूसरे निकायों का नाम भी लिया है।
डोटासरा ने अपने पोस्ट में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर भी निशाना साधा। उन्होंने मुख्यमंत्री के लिए ‘पर्ची मुख्यमंत्री’ शब्द का इस्तेमाल किया और सवाल किया कि अगर जनता के फैसले को सत्ता और प्रशासन के जरिए बदलने की कोशिश होगी तो चुनाव कराने का मतलब क्या रह जाएगा।
उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नवनिर्वाचित पार्षदों से कहा कि वे दबाव में न आएं। जहां भी पुलिस या प्रशासन की ओर से कथित दबाव, धमकी या सत्ता के दुरुपयोग का मामला सामने आए, उसके तथ्य और सबूत जुटाए जाएं। डोटासरा ने ऐसी शिकायतों को प्रदेश कांग्रेस कमेटी और कांग्रेस वॉर रूम तक भेजने को कहा है।
दोनों दलों की रणनीति की परीक्षा
ऐसे में 21 सितंबर के मतदान में केवल संख्या नहीं, पार्षदों की एकजुटता और निर्दलीयों का रुख भी अहम रहेगा। क्रॉस वोटिंग की आशंकाओं और एक-दूसरे पर लगाए जा रहे आरोपों ने मेयर-सभापति-अध्यक्ष की लड़ाई को वार्ड चुनाव से भी ज्यादा दिलचस्प बना दिया।
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