बूढ़े बिजलीघरों को मिलेगा जीवन, नए अवतार में लाने की तैयारी

Jinesh Jain | Jun 24, 2026, 16:18 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान में पुराने पड़ चुके तीन बिजली घरों में फिर से जान फूंकी जाएगी। अब इन्हें नए अवतार में लाने की तैयारी है। इनका उपयोग ग्रिड सिस्टम को संकट के समय बैकअप देने में होगा।

Jaipur: राजस्थान के लिए अच्छी खबर है। प्रदेश के तीन बिजलीघरों का नया जीवन मिलने जा रहा है। ये बिजलीघर या तो लंबे समय से खामोश पड़े हैं या अपनी पूरी ताकत से काम नहीं कर पा रहे हैं। अब इन्हें नए अवतार में लाने की तैयारी है।



द ग्रिड कंट्रोलर ऑफ इंडिया (ग्रिड इंडिया) ने देश के ऐसे 9 पावर प्लांट्स को चुना है, जिन्हें अब सिंक्रोनस कंडेंसर (SYNCON) के रूप में बदला जाएगा। इस सूची में राजस्थान के तीन बड़े नाम हैं। इनमें कोटा सुपर थर्मल पावर स्टेशन, गिरल थर्मल पावर स्टेशन और धौलपुर गैस पावर स्टेशन हैं।



​आइए आसान शब्दों में समझते हैं कि आखिर यह पूरा माजरा क्या है, बंद पड़े इन बिजलीघरों से बिजली क्षेत्र को कैसे एक नई ताकत मिलने वाली है।



​क्यों पड़ी इसकी जरूरत?

भारत बहुत तेजी से सोलर और विंड एनर्जी (रिन्यूएबल एनर्जी) को अपना रहा है। लेकिन सूरज की धूप और हवा हमेशा एक जैसी नहीं रहती।



जब बिजली के इस उतार-चढ़ाव से ग्रिड पर दबाव बढ़ता है, तो ग्रिड के फेल होने या वोल्टेज बिगड़ने का खतरा रहता है।



​इसी साल एक बड़ी घटना हुई थी। चंपा-कुरुक्षेत्र एचवीडीसी (HVDC) लिंक के अचानक ट्रिप होने से उत्तरी भारत में करीब 16.5 गीगावाट का लोड एक झटके में कम हो गया था।



उस आपातकाल ने वैज्ञानिकों को सिखाया कि मुसीबत के समय वोल्टेज को संभालने के लिए हमारे पास कोई बैकअप होना जरूरी है। बस, इसी ग्रिड को मजबूती और स्थिरता देने के लिए इन पुराने बिजलीघरों का कायाकल्प किया जा रहा है।



​क्या होता है सिंक्रोनस कंडेंसर?

​विशेषज्ञ बताते हैं कि सिंक्रोनस कंडेंसर असल में एक ऐसा जनरेटर है, जो बिना बिजली पैदा किए ही स्वतंत्र रूप से गोल-गोल घूमता रहता है।



इसका काम बिजली बनाना नहीं, बल्कि ग्रिड को इनर्शिया, रिएक्टिव पावर और वोल्टेज सपोर्ट देना है। जब भी सोलर या विंड एनर्जी की वजह से बिजली की सप्लाई में अचानक उतार-चढ़ाव आता है, यह सिस्टम को तुरंत संतुलित कर देता है।



अमेरिका, यूके और मैक्सिको जैसे देशों में यह प्रयोग पहले ही सुपरहिट हो चुका है।



देश के वो 9 बिजलीघर जिन्हें मिलेगा नया अवतार

ग्रिड इंडिया ने जिन 9 प्लांट्स को शॉर्टलिस्ट किया है, उनकी कुल क्षमता 1.8 गीगावाट (GW) है। इनमें से 8 कोयले या लिग्नाइट वाले हैं और 1 गैस आधारित है। ये प्लांट अपनी नई भूमिका के लिए बिल्कुल तैयार हैं:


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राजस्थान: गिरल थर्मल पावर स्टेशन, कोटा सुपर थर्मल पावर स्टेशन, धौलपुर गैस पावर स्टेशन।



​गुजरात: अक्रिमोटा लिग्नाइट-आधारित थर्मल पावर स्टेशन, कच्छ लिग्नाइट थर्मल पावर स्टेशन।



​महाराष्ट्र: जीईपीएल (GEPL) फेज-I थर्मल पावर स्टेशन, मिहान थर्मल पावर स्टेशन।



​कर्नाटक: रायचूर थर्मल पावर स्टेशन।



​तमिलनाडु: तूतीकोरिन थर्मल पावर स्टेशन।





बिजलीघरों को मिलेगा नया अवतार






आइए जानते हैं इन तीन बिजलीघरों की मौजूदा स्थिति?

​राजस्थान नवीकरणीय ऊर्जा परिसर में सिस्टम को मजबूत करने के लिए उत्तरी क्षेत्रीय विद्युत समिति ने भी सिंक्रोनस कंडेंसर की पैरवी की थी। आइए जानते हैं तीनों प्लांट्स के अतीत और वर्तमान के बारे में:



​1. कोटा सुपर थर्मल पावर स्टेशन (KSTPS)

चंबल नदी के किनारे बसा यह बिजलीघर राजस्थान का पहला कोयला-आधारित प्लांट है। इसकी शुरुआत 1983 में हुई थी।


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इसकी कुल क्षमता 1240 मेगावाट है। इसमें 7 यूनिट्स हैं। इसका संचालन आरआरवीयूएनएल (RRVUNL) करता है।



यह प्लांट अब बूढ़ा हो चुका है। हाल ही में 25 मार्च 2026 को हुई बोर्ड बैठक में इसकी 4 पुरानी यूनिटों को अगले 4 साल में रिटायर (बंद) करने का प्रस्ताव रखा गया है। ऐसे में इन्हें सिंक्रोनस कंडेंसर में बदलना एक अच्छा फैसला है।



​2. धौलपुर गैस पावर स्टेशन

साल 2007 में शुरू हुआ यह 330 मेगावाट क्षमता का एक कंबाइंड साइकल पावर प्लांट है। यह गैस से चलता है। इसमें 110-110 मेगावाट की तीन यूनिट्स हैं।



गैस से बिजली बनाने के कारण इसकी प्रति यूनिट लागत बहुत ज्यादा आती है। महंगी बिजली होने की वजह से यह प्लांट कुछ समय चलने के बाद अक्सर बंद ही रहता है।



3. गिरल लिग्नाइट थर्मल पावर स्टेशन

बाड़मेर के थम्बली गांव में स्थित 250 मेगावाट का यह प्लांट साल 2007 में बना था। यह राज्य का पहला अनोखा बिजली प्रोजेक्ट है। यह लिग्नाइट गैसीकरण तकनीक पर काम करता है। यानी जमीन के अंदर ही लिग्नाइट को गैस में बदलकर बिजली बनाई जाती है।



तकनीक जितनी अनोखी थी, घाटा भी उतना ही बड़ा रहा। कुछ साल काम करने के बाद यह प्लांट ज्यादातर समय बंद ही पड़ा रहा है।



कैसे बनी इस बदलाव की योजना?

​सिंक्रोनस कंडेंसर आइडिया की नींव अप्रैल में हुई एक हाई-लेवल रिव्यू मीटिंग में पड़ी थी। केंद्रीय बिजली सचिव पंकज अग्रवाल की अध्यक्षता में गर्मियों की तैयारियों को लेकर एक बैठक बुलाई गई थी।



इसी बैठक में अधिकारियों और जानकारों से कहा गया था कि जो थर्मल प्लांट बंद पड़े हैं या बहुत कम चल रहे हैं। उन्हें बेकार छोड़ने के बजाय SYNCON में बदलने का एक मजबूत सिस्टम तैयार किया जाए।



सूत्रों का कहना है कि राजस्थान के ये तीन बंद पड़े बिजलीघर जल्द ही नए रूप में घूमते नजर आएंगे। देश की रिन्यूएबल एनर्जी क्रांति को मजबूत सुरक्षा कवच दे सकते हैं।



FAQ

  1. सिंक्रोनस कंडेंसर क्या होता है और यह कैसे काम करता है?
    सिंक्रोनस कंडेंसर एक ऐसा जनरेटर है, जो बिना बिजली बनाए घूमता रहता है। यह ग्रिड को इनर्शिया, रिएक्टिव पावर और वोल्टेज सपोर्ट देता है। जब सोलर या विंड एनर्जी के कारण बिजली में उतार-चढ़ाव आता है तो यह सिस्टम को तुरंत संतुलित कर देता है।
  2. राजस्थान के कौन से तीन बिजलीघर SYNCON में बदले जाएंगे?
    कोटा सुपर थर्मल पावर स्टेशन, गिरल थर्मल पावर स्टेशन और धौलपुर गैस पावर स्टेशन को SYNCON में बदला जाएगा। ये तीनों प्लांट या तो बंद पड़े हैं या बहुत कम चल रहे हैं। Grid India ने इन्हें देश के 9 चुनिंदा प्लांट्स में शामिल किया है।
  3. इन बिजलीघरों को SYNCON में बदलने की जरूरत क्यों पड़ी?
    भारत में सोलर और विंड एनर्जी तेजी से बढ़ रही है, लेकिन इससे ग्रिड में उतार-चढ़ाव आता है। इसी साल उत्तरी भारत में HVDC लिंक ट्रिप होने से 16.5 GW का लोड एक झटके में गिर गया था। बंद पड़े प्लांट्स को SYNCON में बदलकर ग्रिड को स्थिर रखने की यह किफायती और स्मार्ट योजना है।

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