पचपदरा बनेगा भविष्य का रिफाइनिंग हब, पीएम मोदी 21 अप्रैल को करेंगे लोकार्पण
News In Short
- पीएम नरेंद्र मोदी 21 अप्रैल को राजस्थान की पचपदरा रिफाइनरी का करेंगे लोकार्पण।
- पचपदरा रिफाइनरी से शोधित तेल भविष्य में यूरोप निर्यात किया जाएगा।
- पचपदरा रिफाइनरी की सबसे बड़ी विशेषता इसकी लागत प्रभावशीलता है।
- भारत अभी दुनिया के 41 देशों से आयात कर रहा है कच्चा तेल।
- पचपदरा में कच्चे तेल को रिफाइन कर विकसित हो सकेगी निर्यात करने की क्षमता।
News In Detail
Balotra: भारत ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर बड़ा कदम बढ़ाने जा रहा है। राजस्थान के पचपदरा में निर्माणाधीन रिफाइनरी न केवल देश की तेल जरूरतों को पूरा करेगी, बल्कि भारत को दुनिया के लिए एक क्रूड रिफाइनिंग सुपर पावर के रूप में स्थापित करने के लिए तैयार है। पीएम नरेंद्र मोदी 21 अप्रैल को इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्घाटन करेंगे।
वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सबसे आगे भारत
पचपदरा रिफाइनरी की सबसे बड़ी विशेषता इसकी लागत प्रभावशीलता है। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, भारत में क्रूड रिफाइन करने की लागत महज 2 से 4 रुपए प्रति लीटर आती है। इसकी तुलना में दुनिया के अन्य विकसित देशों में यह लागत 5 रुपए प्रति लीटर या उससे अधिक है। यही कारण है कि भारत अब दुनिया के 41 देशों से कच्चा तेल आयात कर रहा है और उसे रिफाइन कर निर्यात करने की क्षमता विकसित कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि रूस-यूक्रेन युद्ध और हालिया ईरान संकट के बाद वैश्विक ऊर्जा क्षेत्र में टर्निंग पॉइंट आया है। ऐसे समय में भारत की रिफाइनिंग क्षमता का विस्तार यूरोप और अन्य पश्चिमी देशों के लिए एक बड़े विकल्प के रूप में उभर रहा है।
पचपदरा की क्षमता
पचपदरा रिफाइनरी की वार्षिक क्षमता 9 मिलियन टन निर्धारित की गई है। इस विशाल परियोजना को सुचारू रूप से चलाने के लिए तीन प्रमुख पाइपलाइनों का जाल बिछाया जा रहा है, जो कच्चे तेल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करेंगी।
मंगला पाइपलाइन टर्मिनल से 1.5 मिलियन टन तेल की आपूर्ति के लिए 74 किलोमीटर लंबी और 12 इंच चौड़ी पाइपलाइन तैयार की गई है।
मुंद्रा पोर्ट से 7.5 मिलियन मीट्रिक टन आयातित क्रूड ऑयल लाने के लिए 487 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई गई है। यह पाइपलाइन रूस और खाड़ी देशों सहित 41 विभिन्न देशों से आने वाले कच्चे तेल को सीधे रिफाइनरी तक पहुँचाएगी।
रिफाइनरी में शोधन के बाद तैयार तेल को 30 इंच की पाइपलाइन के माध्यम से सीधे गुजरात के पालनपुर स्थित तेल टर्मिनल भेजा जाएगा, जहाँ से इसे देशभर में वितरित किया जा सकेगा।
अर्थव्यवस्था की 'धुरी' बना तेल
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार ईरान-अमेरिका और अन्य भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद तेल ही वैश्विक अर्थव्यवस्था की मुख्य धुरी बना रहेगा। उनका अनुमान है कि आने वाले कम से कम 20 साल तक वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की प्रासंगिकता और मांग इसी प्रकार बनी रहेगी। ऐसे में पचपदरा रिफाइनरी राजस्थान के लिए केवल एक औद्योगिक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि आर्थिक समृद्धि का द्वार साबित होगी।
यूरोप को होगा तेल का निर्यात
भारत की इस बढ़ती क्षमता का सीधा लाभ वैश्विक व्यापार को मिलेगा। रिफाइनरी से शोधित तेल न केवल घरेलू मांग को पूरा करेगा, बल्कि इसे यूरोप जैसे उन क्षेत्रों में भी निर्यात किया जाएगा जहां वर्तमान में ऊर्जा संकट गहराया हुआ है। भारत का लक्ष्य अब केवल तेल उपभोक्ता बनना नहीं, बल्कि दुनिया का एक विश्वसनीय तेल निर्यातक और रिफाइनर बनना है।
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