बॉर्डर से ड्रग्स सप्लाई का बड़ा नेटवर्क, आतंकी संगठनों की भूमिका आई सामने
News In Short
- पाकिस्तानी आतंकी संगठन 5 किलो ड्रग्स खरीदने पर एक पिस्टल फ्री देने का ऑफर दे रहे।
- अफगानिस्तान में तैयार होने वाली अफीम से पाकिस्तान में हेरोइन, कोकीन जैसे ड्रग्स बनाए जा रहे हैं।
- चीन से मंगवाए 2 हजार मीटर ऊपर उड़ने वाले ड्रोन के जरिए पाकिस्तान से भारत में हो रही तस्करी।
- 50 हजार रुपए किलो का ड्रग्स सीमा पार पहुंचने पर 50 लाख रुपए तक में बिक रहा है।
- एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स ने बब्बर खालसा और ISI के इनपुट पर सीमावर्ती इलाकों में अलर्ट जारी किया।
News In Detail
राजस्थान से जुड़ा भारत-पाकिस्तान बॉर्डर इन दिनों अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स तस्करी और हथियारों की सप्लाई का एक बड़ा कॉरिडोर बनता जा रहा है। पंजाब और राजस्थान के स्थानीय गैंगस्टरों ने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) और खालिस्तानी आतंकी संगठनों के साथ मिलकर खतरनाक सिंडिकेट तैयार किया है।
यह सिंडिकेट देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन चुका है। एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) के सूत्रों के मुताबिक, भारत में ड्रग्स की खपत और हिंसा को बढ़ावा देने के लिए पाकिस्तानी हैंडलर्स अब अपराधियों को कॉम्बो ऑफर तक दे रहे हैं।
ड्रग्स के साथ हथियारों की फ्री डिलीवरी
राजस्थान एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) के सूत्रों के अनुसार, सीमा पार बैठे आतंकी संगठन भारत में नशीले पदार्थों का जाल फैलाने के लिए लुभावने और घातक ऑफर दे रहे हैं। इस मॉड्यूल के तहत भारत में 5 किलोग्राम ड्रग्स खरीदने पर एक अत्याधुनिक जगीना पिस्टल बिल्कुल फ्री दी जा रही है।
इस रणनीति के पीछे पाकिस्तान का दोहरा मकसद है- पहला, भारत की युवा पीढ़ी को नशे की गर्त में धकेलना और दूसरा, स्थानीय गैंग्स को आधुनिक हथियारों से लैस कर देश में गैंगवार और अराजकता फैलाना।
लॉरेंस और रोहित गोदारा की दुश्मनी का आतंकी कनेक्शन
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, इस पूरे नापाक मॉड्यूल को मुख्य रूप से आईएसआई और आतंकी संगठन बब्बर खालसा ऑपरेट कर रहे हैं। बब्बर खालसा ने सबसे पहले राजस्थान के कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को इस बड़ी ड्रग डील का ऑफर दिया था, लेकिन लॉरेंस के साथ यह डील परवान नहीं चढ़ सकी।
इसके बाद आतंकी संगठन ने लॉरेंस के ही करीबी रहे गैंगस्टर रोहित गोदारा को अपने जाल में फंसाया। गोदारा ने लालच में आकर बब्बर खालसा से हाथ मिला लिया। इसी ड्रग सिंडिकेट के कारण अप्रैल-2025 से लॉरेंस और रोहित गोदारा के रास्ते अलग हो गए और सितंबर-2025 तक आते-आते दोनों गैंग्स की यह दुश्मनी खुलकर सामने आ गई।
₹40 हजार का माल ₹50 लाख में
इस तस्करी का आर्थिक ताना-बाना अरबों रुपए का है। अफगानिस्तान में अफीम की भारी खेती होती है, जिससे पाकिस्तान में हेरोइन, कोकीन और एमडी (MD) जैसे सिंथेटिक ड्रग्स तैयार किए जाते हैं। पाकिस्तान-अफगानिस्तान के शुरुआती बाजारों में इन ड्रग्स की कीमत महज 40 से 50 हजार रुपए प्रति किलोग्राम होती है।
बब्बर खालसा और बंबीहा गैंग के नेटवर्क के जरिए यह माल श्रीगंगानगर, बीकानेर, जैसलमेर और बाड़मेर बॉर्डर पर करीब 2 लाख रुपए में बिकता है।
भारत के स्थानीय नेटवर्क से होते हुए इस खेप को दुबई के शिपों के जरिए गल्फ कंट्रीज और अन्य देशों में भेजा जाता है, जहां इसकी कीमत 50 लाख रुपए प्रति किलो तक पहुंच जाती है।
तस्करी का हाई-टेक और लोकल मॉड्यूल
2000 मीटर की ऊंचाई पर उड़ने वाले चीनी ड्रोन
पाकिस्तानी तस्कर बीएसएफ (BSF) की नजरों से बचने के लिए चीन से मंगवाए गए आधुनिक ड्रोन्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। ये ड्रोन करीब 2000 मीटर की ऊंचाई पर उड़ते हैं और पूरी तरह मोबाइल व जीपीएस से जुड़े होते हैं, जिससे इन्हें ट्रैक करना बेहद मुश्किल होता है।
स्थानीय मैसेंजर्स को पैसों का लालच
सीमा पर रहने वाले कुछ स्थानीय लोगों को मोटी रकम का लालच देकर मैसेंजर बनाया जाता है। पाकिस्तानी हैंडलर फोन पर ग्रीन सिग्नल मिलने के बाद तय लोकेशन पर ड्रोन से पैकेट ड्रॉप करते हैं। रात के अंधेरे में ये स्थानीय मैसेंजर माल उठाकर आगे की गैंग्स (जैसे पंजाब की बंबीहा गैंग) को सौंप देते हैं।
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