रॉकेट और आर्टिलरी से गूंजा रेगिस्तान, युद्धाभ्यास में दिखा स्वदेशी 'पिनाका' का दम
News In Short
- पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज में आयोजित हुआ फायरपावर अभ्यास।
- फायरपावर अभ्यास में किया गया रॉकेट और आर्टिलरी का प्रदर्शन।
- बीएम-21 ग्राड ने की 20 सेकंड में 40 रॉकेट की बौछार।
- अभ्यास में स्वदेशी एमबीआरएलL पिनाका का भी दिखा दम।
- कोणार्क कोर द्वारा किया गया फायरपावर अभ्यास का नेतृत्व।
News In Detail
जागेश्वर प्रसाद @ जयपुर
भारतीय सेना बदलती वैश्विक परिस्थितियों और क्षेत्रीय तनाव के बीच 'कॉम्बैट रेडीनेस' (युद्ध की तैयारी) को लगातार मजबूत कर रही है। इसी कड़ी में सेना ने राजस्थान के रेगिस्तान में पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज में एक फायरपावर अभ्यास आयोजित किया।
रॉकेट और आर्टिलरी का प्रदर्शन
इस अभ्यास का मुख्य आकर्षण रॉकेट और आर्टिलरी सिस्टम का प्रदर्शन था। सेना ने यहां रूस के BM-21 'ग्राड' और भारत में ही निर्मित 'पिनाका' मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम की सटीकता और विनाशकारी शक्ति का प्रदर्शन किया।
20 सेकंड में 40 रॉकेट की बौछार
अभ्यास के दौरान बीएम-21 सिस्टम की मारक क्षमता ने सबको हैरान कर दिया। ट्रक पर लगे 40 बैरल वाले इस लॉन्चर ने महज 20 सेकंड में 40 रॉकेट दागकर दुश्मन के काल्पनिक ठिकानों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। यह सिस्टम 0.5 से 45 किलोमीटर की दूरी तक हमला करने में सक्षम है और अलग-अलग तरह के वॉरहेड (आयुध) ले जा सकता है।
पिनाका ने मारक क्षमता से किया हैरान
यह भारत की स्वदेशी शक्ति का वह प्रतीक है, जिसने युद्ध के मैदान में अपनी मारक क्षमता से दुनिया को हैरान कर दिया है। यह एक मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर (MBRL) सिस्टम है, जिसे रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने तैयार किया है।
इसका नाम भगवान शिव के धनुष 'पिनाका' के नाम पर रखा गया है। यहां इसकी कुछ प्रमुख विशेषताएं और सामरिक महत्व दिए गए हैं
पिनाका की मारक क्षमता
सैलवो फायरिंग: पिनाका की सबसे बड़ी ताकत इसकी रफ़्तार है। यह मात्र 44 सेकंड में 12 रॉकेट दाग सकता है।
विनाशकारी शक्ति: इसका एक लॉन्चर एक साथ करीब 700 मीटर के दायरे को पूरी तरह तबाह करने की क्षमता रखता है।
प्रमुख वेरिएंट्स
पिनाका को समय के साथ लगातार अपग्रेड किया गया है:
Pinaka Mk-I: इसकी रेंज लगभग 40 किलोमीटर है। कारगिल युद्ध के दौरान इसने पहाड़ियों पर छिपे दुश्मनों के छक्के छुड़ा दिए थे।
Pinaka Mk-II (Guided): यह गाइडेड वर्जन है, जो 75 से 90 किलोमीटर तक सटीक निशाना लगा सकता है। इसमें नेविगेशन सिस्टम लगा होता है जो इसे 'मिसाइल' जैसी सटीकता देता है।
कोणार्क कोर का नेतृत्व
इस युद्धाभ्यास का नेतृत्व सेना की 'कोणार्क कोर' के गनर्स (तोपची) ने किया। सेना के अधिकारियों के अनुसार, इस अभ्यास ने न केवल हथियारों की शक्ति को जांचा, बल्कि सैनिकों के बीच आपसी समन्वय और कठिन परिस्थितियों में तुरंत निर्णय लेने की उनकी क्षमता को भी आंकलित किया।
पोकरण की इस गूँज ने स्पष्ट कर दिया है कि भारतीय सेना आधुनिक तकनीक और स्वदेशी हथियारों के दम पर किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए हर पल तैयार है।
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