गर्मी ढलते ही पुलिस मुख्यालय को आई याद, कूलर-पंखों के लिए बजट जारी
News In Short
- पुलिस मुख्यालय ने गर्मी के मौसम के अंत में 84.57 लाख के कूलर-पंखे खरीदने का आदेश दिया।
- आदेश 29 मई को जारी हुआ, जब पिछले 5 दिनों से तापमान में गिरावट शुरू हो चुकी थी।
- 537 कूलर, 838 छत के पंखे, 140 पैडेस्टल फैन सहित अन्य उपकरण खरीदे जाएंगे।
- खरीद प्रक्रिया में एक माह लगेगा, तब तक प्री-मानसून की दस्तक हो जाएगी।
- पुलिसकर्मियों को स्वच्छ एवं शीतल वायु उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बजट जारी किया गया।
News In Detail
आधी से ज्यादा गर्मी निकल जाने और तापमान में गिरावट शुरू होने के बाद राजस्थान पुलिस मुख्यालयय ने कूलर-पंखे खरीदने के लिए 84.57 लाख रुपए का बजट जारी किया है। यह आदेश 29 मई को जारी किया गया।
जिला और यूनिट स्तर पर खरीद प्रक्रिया में करीब एक महीना लगेगा। ऐसे में तब तक प्री-मानसून की एंट्री की संभावना जताई जा रही है। पिछले 5 दिनों से तापमान में लगातार गिरावट भी दर्ज की जा रही है।
बजट और खरीद का विवरण
पुलिस मुख्यालय से पुलिस कल्याण निधि शाखा के सचिव एडिशनल एसपी बलराम सिंह ने आदेश जारी कर 29 जिलों और अन्य यूनिटों को कूलर-पंखे खरीदने के लिए फंड आवंटित किया है।
आदेश में उल्लेख है कि गर्मी के मौसम को देखते हुए पुलिसकर्मियों को स्वच्छ एवं शीतल वायु उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बजट दिया गया है। इसके साथ ही कूलर और पंखों की दरें भी तय की गई हैं, जिनके अनुसार खरीद की जाएगी।
तय दरों पर होगी खरीद, 15 दिन में देनी होगी रिपोर्ट
पूरे प्रदेश में 29 जिलों और ट्रेनिंग सेंटर को शामिल किया गया है। इनके लिए 537 डेजर्ट कूलर, 10 दीवार पंखे, 140 पैडेस्टल फैन, 838 छत के पंखे, 30 वाटर कूलर और 1 आरओ सिस्टम खरीदे जाएंगे। खरीद के लिए बजट और दरें तय की गई हैं।
स्थानीय स्तर पर टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से खरीद की जाएगी और 15 दिन में इसकी रिपोर्ट मुख्यालय को देनी होगी।
समय से पीछे भागती ब्यूरोक्रेसी
यह मामला सरकारी तंत्र की सुस्त प्रक्रियाओं को उजागर करता है। मई के अंत में जब पारा 45 डिग्री के आसपास रहता है, तब बजट जारी होता है। जून के अंत तक खरीद प्रक्रिया पूरी होने पर कूलर-पंखे पहुंचेंगे, तब तक बारिश का मौसम शुरू हो चुका होगा।
इस पर व्यंग्य भी हो रहे हैं कि गर्मी के बीतने के बाद अब पुलिस मुख्यालय को गर्मी सताने लगी है। आमतौर पर ऐसी खरीद फरवरी-मार्च में कर ली जानी चाहिए थी, लेकिन सरकारी प्रक्रियाओं की लालफीताशाही के चलते यह आदेश मई के अंत में जारी हुआ है।
पिछले आदेश का हवाला
पुलिस मुख्यालय के इस आदेश में पिछले वर्षों के आदेशों का भी हवाला दिया गया है। सरकारी प्रशासन में अक्सर यह देखने को मिलता है कि बजटीय प्रक्रियाएं इतनी लंबी होती हैं कि योजनाएं अपना समय खो देती हैं।
इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ है। एक तरफ प्रदेश के कई जिलों में तापमान 46-47 डिग्री तक पहुंच चुका था, वहीं दूसरी तरफ पुलिसकर्मियों को राहत पहुंचाने वाले उपकरण तब आएंगे जब गर्मी कम होने लगेगी।
फैसले पर उठ रहे सवाल
इस फैसले पर पुलिसकर्मियों और आम लोगों में तरह-तरह के सवाल उठ रहे हैं। क्या गर्मी के अंत में पंखे-कूलर खरीदना उचित है? क्या पिछले साल या इस साल की शुरुआत में यह बजट जारी नहीं किया जा सकता था? क्या प्रशासन इतना अदूरदर्शी है कि वह गर्मी के मौसम का अंदाजा ही नहीं लगा सकता? इन सवालों के जवाब अब पुलिस मुख्यालय से पूछे जा रहे हैं।
फिलहाल, यह तो तय है कि जब ये कूलर और पंखे लगेंगे, तब तक शायद लोगों को उनकी जरूरत नहीं रहेगी। फिलहाल पुलिस कर्मियों को गर्मी में ही राहत का इंतजार करना पड़ेगा, जबकि राहत का सामान आएगा तब गर्मी चली जाएगी। यह सरकारी व्यवस्था की विडंबना ही है कि जरूरत से पहले या सही समय पर खरीदी न करके हमेशा देरी से काम किया जाता है। इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ है।
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