आरसीए की पिच पर फिर चला पावर गेम, पूर्व संयोजक को 24 लाख की रिकवरी का नोटिस
News In Short
- आरसीए में फिर घमासान, पूर्व संयोजक डीडी कुमावत को 24 लाख का रिकवरी नोटिस।
- पूर्व संयोजक डीडी कुमावत को निजी केसों के लिए आरसीए के पैसे लुटाने पर थमाया नोटिस।
- एडहॉक कमेटी ने पूर्व संयोजक कुमावात को दिया नोटिस, भारी भरकम फीस भुगतान का आरोप।
- भाजपा नेताओं और उनके करीबियों के बीच खींचतान से आरसीए बना विवादों का अखाड़ा।
News In Short
राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन(आरसीए) में विवादों की कड़ी में अब एक नया चैप्टर जुड़ गया है।
एडहॉक कमेटी ने पूर्व संयोजक दीनदयाल कुमावत को रिकवरी का नोटिस थमाया है। इसके अनुसार कुमावत को सात दिन में 24 लाख रुपए आरसीए को लौटाने के लिए कहा है।
कुमावत पर नियम विरुद्ध सवाई माधोपुर जिला क्रिकेट संघ से संबंधित निजी कानूनी विवाद के लिए वकीलों को भारी-भरकम फीस चुकाने के आरोप हैं। कुमावत को जारी नोटिस में सात दिन में 24 लाख रुपए लौटाने अन्यथा अनुशानात्मक और कानूनी कार्यवाही करने की चेतावनी दी है।
साजिश है यह
कुमावत ने इसे अपनी छवि धूमिल करने के लिए सोची-समझी साजिश बताया है। उनका कहना है कि मामला पूरी तरह से झूठा और दुर्भावनापूर्ण है। उनके नौ महीने के कार्यकाल में जो भी कानूनी कार्यवाही के लिए भुगतान किए गए, वो पारदर्शिता के साथ आरसीएस के हितों और संयोजक पद से जुड़े मामलों के लिए थे, ना कि किसी व्यक्तिगत काम के लिए। कुमावत ने सवाल उठाया कि जब उक्त फैसले लिए जा रहे थे तो समिति के अन्य सदस्य चुप क्यों थे ?
चैक पर दस्तख्त तो उनके थे
कुमावत ने कहा कि बैंक लेन-देन की जिम्मेदारी अकेले उनकी नहीं थी। भुगतान के चैक पर आशीष तिवारी और पिंकेश जैन पोरवाल साइनिंग अथॉरिटी थे और उन्हीं के दस्तखत हैं।
कुमावत के अनुसार इन सभी भुगतानों की मौखिक जानकारी मोहित यादव और धनंजय सिंह को लगातार दी जा रही थी। कुमावत का कहना है कि यदि यह भुगतान अवैध हैं तो चैक पर दस्तख्त करने अधिकारियों और उन सदस्यों को भी इस मामले में पक्षकार बनाया जाना चाहिए जिन्हें इसकी पूरी जानकारी थी।
बदले की राजनीति है यह
कुमावत ने इसे बदले की राजनीति बताते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में जोधपुर जिला क्रिकेट संघ और धनंजय सिंह जैसे प्रभावी लोगों पर कार्रवाई की गई थी। इस कारण ही उन्हें सुनियोजित तरीके से साजिश रचकर निशाना बनाया जा रहा है।
उन्होंने कहा है कि यदि उनके खिलाफ अपमानजनक और झूठे आरोप लगाना बंद नहीं किया गया तो वह संबंधित लोगों के विरुद्ध एफआईआर और मानहानि का मुकदमा दर्ज कराएंगे।
स्थाई विवाद का अड्डा है आरसीए
राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन पर बरसों तक रुंगटा परिवार का कब्जा रहा। लेकिन, 2003 में वसुंधरा राजे के राजस्थान का सीएम बनने के बाद ललित मोदी की एंट्री हुई और उन्होंने राजे के साथ अपनी नजदीकियों के दम पर रुंगटाओं केा उखाड़ फेंका।
इसके लिए एक नया कानून तक बना दिया गया। ललित मोदी निश्चित तौर पर एक कुशल खेल प्रशासक हैं, लेकिन विवादों ने उनका दामन ऐसा थामा कि अंतत: उन्हें देश ही छोड़ना पड़ा। आरसीए अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने राजस्थान में क्रिकेट की दशा तो बेहतर कर दी,लेकिन अनेक प्रकार के विवादों से लगातार घिरे रहे।
उनके खास रहे पूर्व आईएएस संजय दीक्षित उनके खिलाफ हो गए। दीक्षित भी अध्यक्ष बने फिर उनका भी विरोध हुआ और अंतत: पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी अध्यक्ष बने। उनका भी अपने सचिव संजय दीक्षित से विवाद हुआ। अंतत: दीक्षित भी बाहर हुए।
पूर्व सीएम अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत अध्यक्ष बने,लेकिन उनके कार्यकाल में विवाद जैसी स्थिति नहीं हुई। लेकिन दिसंबर 2023 में सत्ता बदलते ही उनके ही साथियों ने उन्हें हटने के लिए मजबूर कर दिया।
इसके बाद से ही आरसीए पिछले दो साल अंदरूनी खींचतान, एडहॉक कमेटी के गठन और भाजपा नेताओं के बीच वर्चस्व की लड़ाई के लिए चर्चा में है। इस कारण घरेलू क्रिकेट और आईपीएल मैचों के आयोजन पर भी संकट बना रहा।
पिछले दो साल के प्रमुख विवाद:
एडहॉक कमेटी में गुटबाजी (2025-26): वैभव गहलोत के इस्तीफे के बाद बनी एडहॉक कमेटी के संयोजक जयदीप बिहाणी (भाजपा विधायक ) और कैबिनेट मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के बेटे धनंजय सिंह खींवसर के गुटों में जमकर टकराव हुआ। कमेटी के सदस्यों ने ही एक-दूसरे के फैसलों को निरस्त कर दिया।
नेताओं के बेटों का दखल: आरसीए पर कब्ज़े के लिए राजनेताओं के बेटों की एंट्री और जिला क्रिकेट संघों पर उनके अध्यक्ष बनने से विवाद बढ़ा।
पाली-जोधपुर संघ की मान्यता रद्द: एडहॉक कमेटी के अंदरूनी विवाद में पाली जिला क्रिकेट संघ की मान्यता रद्द की गई, और जोधपुर संघ को भी निशाना बनाया गया, जहां धनंजय सिंह खींवसर अध्यक्ष थे।
टीम चयन में भेदभाव के आरोप: राजस्थान रणजी टीम के पूर्व कप्तान राहुल कांवट ने चयन समिति की योग्यता पर सवाल उठाते हुए पक्षपातपूर्ण चयन के आरोप लगाए।
आईपीएल और मैच आयोजन पर संकट: आंतरिक कलह के कारण आरसीए को बीसीसीआई से तालमेल बिठाने में मुश्किल हुई। इस कारण जयपुर में आईपीएल मैचों के आयोजन को लेकर अनिश्चितता रही।
विजय हजारे ट्रॉफी में खराब प्रदर्शन: घरेलू टूर्नामेंटों में टीम का प्रदर्शन खराब रहा तो एडहॉक कमेटी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे।
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