NEET UG 2026 निरस्त: जानिए पेपरलीक के एक व्हाट्सएप मैसेज से CBI जांच तक की पूरी इनसाइड स्टोरी
Mukesh Sharma | May 12, 2026, 20:04 IST
Photograph: (the sootr)
एनटीए ने नीट यूजी 2026 की परीक्षा निरस्त कर दी है। इस मामले की कहानी राजस्थान के सीकर में एक व्हाट्सएप मैसेज की जांच से शुरू हुई। बाद में पेपरलीक के इस मामले ने देश के सबसे बड़े शिक्षा घोटाले का रूप ले लिया।
देशभर के करीब 22 लाख छात्र 3 मई 2026 को जब मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए NEET UG 2026 की परीक्षा दे रहे थे तो उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि उनके भविष्य की किस्मत एक व्हाट्सएप ग्रुप पर पहले ही तय हो चुकी थी। राजस्थान के सीकर से शुरू हुई एक छोटी सी जांच ने अब देश के सबसे बड़े शिक्षा घोटाले का रूप ले लिया है।
राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) ने NEET महाघोटाला की तफ्तीश एक साधारण तकनीकी सुराग से शुरू की। जांचकर्ताओं को एक व्हाट्सएप चैट मिली, जिसमें गेस पेपर (अनुमानित प्रश्नपत्र) साझा किया गया था।
इस मैसेज के ऊपर व्हाट्सएप का डिफॉल्ट लेबल लगा था - Forwarded many times। यही वह क्षण था जब जांच अधिकारियों का माथा ठनका। मेनी टाइम्स फॉरवर्डेड का मतलब था कि यह पेपर किसी एक छात्र तक सीमित नहीं था, बल्कि यह एक चेन रिएक्शन की तरह हजारों मोबाइल फोन तक पहुंच चुका था। इसे पहले स्थानीय गड़बड़ी माना जा रहा था, वह धीरे-धीरे व्यापक लीक के रूप में सामने आने लगा।
SOG की जांच में पेपर के प्रसार का जो रास्ता सामने आया है, वह किसी थ्रिलर फिल्म की पटकथा जैसा है। जांच की सुई मास्टरमाइंड राकेश मंदावरिया पर टिकी है, जो मूल रूप से सीकर का रहने वाला है लेकिन घटना के वक्त देहरादून में मौजूद था।
देहरादून से यह गेस पेपर केरल में पढ़ रहे राजस्थान के ही एक MBBS छात्र को भेजा गया। केरल के उस छात्र ने इसे 1 मई (परीक्षा से दो दिन पहले) को सीकर में अपने एक दोस्त के साथ साझा किया।
सीकर में यह पेपर एक पेइंग गेस्ट (PG) आवास के मालिक के पास पहुंचा। यहीं से खेल और गंदा हो गया। पीजी मालिक ने इसे अधिक से अधिक छात्रों और करियर काउंसलर्स को भेजना शुरू किया।
सूत्रों के मुताबिक जिस पीजी मालिक ने पुलिस को इस लीक की जानकारी दी, वह खुद अब जांच के दायरे में है। पुलिस को संदेह है कि जब उसे लगा कि मामला बहुत फैल चुका है और वह पकड़ा जा सकता है, तो उसने व्हिसलब्लोअर बनकर खुद को बचाने की कोशिश की।
एसओजी के अतिरिक्त महानिदेशक (ADG) विशाल बंसल ने जयपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान चौंकाने वाले तथ्य साझा किए। उन्होंने बताया कि यह कोई साधारण अनुमान नहीं था।
150 पन्नों की इस पीडीएफ फाइल में कुल 400 सवाल थे। जब वास्तविक परीक्षा के पेपर से मिलान किया गया, तो 120 सवाल हूबहू वही थे।
यह पेपर छात्रों के पास परीक्षा से हफ्तों पहले, कुछ मामलों में तो एक महीने पहले ही पहुंच गया था। अधिकारियों को डर है कि चूंकि यह पीडीएफ फाइल थी, इसलिए कई जगहों पर इसके प्रिंटआउट भी निकाले गए होंगे, जिससे यह ट्रैक करना लगभग असंभव हो गया है कि यह कुल कितने हाथों में पहुंचा।
शुरुआत में किसी भी प्रकार के लीक से इनकार करने वाली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने मंगलवार को घुटने टेक दिए। 22 लाख छात्रों के बढ़ते दबाव और एसओजी की रिपोर्ट के बाद एनटीए ने NEET 2026 निरस्त करने का फैसला लिया।
केंद्र सरकार ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे सीबीआई (Central Bureau of Investigation) को सौंप दिया है। अब सीबीआई यह पता लगाएगी कि क्या यह लीक केवल राजस्थान तक सीमित था या इसकी जड़ें दिल्ली स्थित एनटीए के मुख्यालय या प्रिंटिंग प्रेस तक फैली हुई हैं।
राजस्थान की राजनीति इस मुद्दे पर पूरी तरह सुलग उठी है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने वर्तमान भाजपा सरकार पर तीखे हमले किए हैं।
गहलोत का दावा है कि सरकार को लीक की जानकारी दो सप्ताह पहले ही थी, लेकिन उन्होंने इसे छिपाने की कोशिश की। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने अपनी छवि बचाने के लिए FIR दर्ज करने में देरी की, जिससे सबूतों के साथ छेड़छाड़ की संभावना बढ़ गई।
उन्होंने कर्मचारी चयन बोर्ड के OMR शीट घोटाले का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार की ढिलाई के कारण ही आरोपियों को आसानी से बेल मिल जाती है।
दूसरी ओर, सरकार का पक्ष है कि उन्होंने ही एसओजी को फ्री-हैंड दिया, जिसके कारण आज यह बड़ा खुलासा मुमकिन हो पाया है।
इस पूरी कानूनी और राजनीतिक लड़ाई के बीच सबसे बड़ा नुकसान उन 22 लाख छात्रों का हुआ है जिन्होंने दिन-रात मेहनत की थी।
परीक्षा रद्द होने से छात्रों में भारी रोष और अवसाद की स्थिति है। दोबारा परीक्षा का मतलब है फिर से यात्रा, होटल और कोचिंग का खर्च।
मेडिकल सत्र में देरी होना अब तय है, जिसका असर अगले साल की काउंसलिंग पर भी पड़ेगा।
एसओजी ने इस मामले में अब तक दो दर्जन से अधिक लोगों को हिरासत में लिया है। करियर काउंसलर्स और कोचिंग सेंटर्स के बीच का यह गठजोड़ अब पूरी तरह बेनकाब होने की कगार पर है।
सीबीआई की जांच का मुख्य फोकस अब सोर्स (उत्पत्ति स्थल) का पता लगाना होगा। क्या यह किसी अधिकारी की मिलीभगत थी? क्या व्हाट्सएप एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन के बावजूद तकनीकी रूप से इस नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त किया जा सकता है?
फिलहाल, एफआईआर दर्ज होने के बाद सीबीआई ने विशेष जांच दल गठित किए हैं। इन्हें सबूत जुटाने और इसमें शामिल लोगों की पहचान करने के लिए देश भर में कई स्थानों पर भेजा गया है।
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एक फॉरवर्डेड मैसेज से खुलासा
इस मैसेज के ऊपर व्हाट्सएप का डिफॉल्ट लेबल लगा था - Forwarded many times। यही वह क्षण था जब जांच अधिकारियों का माथा ठनका। मेनी टाइम्स फॉरवर्डेड का मतलब था कि यह पेपर किसी एक छात्र तक सीमित नहीं था, बल्कि यह एक चेन रिएक्शन की तरह हजारों मोबाइल फोन तक पहुंच चुका था। इसे पहले स्थानीय गड़बड़ी माना जा रहा था, वह धीरे-धीरे व्यापक लीक के रूप में सामने आने लगा।
देहरादून से केरल और फिर सीकर
देहरादून से यह गेस पेपर केरल में पढ़ रहे राजस्थान के ही एक MBBS छात्र को भेजा गया। केरल के उस छात्र ने इसे 1 मई (परीक्षा से दो दिन पहले) को सीकर में अपने एक दोस्त के साथ साझा किया।
सीकर में यह पेपर एक पेइंग गेस्ट (PG) आवास के मालिक के पास पहुंचा। यहीं से खेल और गंदा हो गया। पीजी मालिक ने इसे अधिक से अधिक छात्रों और करियर काउंसलर्स को भेजना शुरू किया।
सूत्रों के मुताबिक जिस पीजी मालिक ने पुलिस को इस लीक की जानकारी दी, वह खुद अब जांच के दायरे में है। पुलिस को संदेह है कि जब उसे लगा कि मामला बहुत फैल चुका है और वह पकड़ा जा सकता है, तो उसने व्हिसलब्लोअर बनकर खुद को बचाने की कोशिश की।
400 में से 120 सवाल एक जैसे
150 पन्नों की इस पीडीएफ फाइल में कुल 400 सवाल थे। जब वास्तविक परीक्षा के पेपर से मिलान किया गया, तो 120 सवाल हूबहू वही थे।
यह पेपर छात्रों के पास परीक्षा से हफ्तों पहले, कुछ मामलों में तो एक महीने पहले ही पहुंच गया था। अधिकारियों को डर है कि चूंकि यह पीडीएफ फाइल थी, इसलिए कई जगहों पर इसके प्रिंटआउट भी निकाले गए होंगे, जिससे यह ट्रैक करना लगभग असंभव हो गया है कि यह कुल कितने हाथों में पहुंचा।
NTA का यू-टर्न और CBI की एंट्री
केंद्र सरकार ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे सीबीआई (Central Bureau of Investigation) को सौंप दिया है। अब सीबीआई यह पता लगाएगी कि क्या यह लीक केवल राजस्थान तक सीमित था या इसकी जड़ें दिल्ली स्थित एनटीए के मुख्यालय या प्रिंटिंग प्रेस तक फैली हुई हैं।
सत्ता और विपक्ष के बीच वार-पलटवार
गहलोत का दावा है कि सरकार को लीक की जानकारी दो सप्ताह पहले ही थी, लेकिन उन्होंने इसे छिपाने की कोशिश की। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने अपनी छवि बचाने के लिए FIR दर्ज करने में देरी की, जिससे सबूतों के साथ छेड़छाड़ की संभावना बढ़ गई।
उन्होंने कर्मचारी चयन बोर्ड के OMR शीट घोटाले का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार की ढिलाई के कारण ही आरोपियों को आसानी से बेल मिल जाती है।
दूसरी ओर, सरकार का पक्ष है कि उन्होंने ही एसओजी को फ्री-हैंड दिया, जिसके कारण आज यह बड़ा खुलासा मुमकिन हो पाया है।
22 लाख छात्रों का भविष्य अधर में
परीक्षा रद्द होने से छात्रों में भारी रोष और अवसाद की स्थिति है। दोबारा परीक्षा का मतलब है फिर से यात्रा, होटल और कोचिंग का खर्च।
मेडिकल सत्र में देरी होना अब तय है, जिसका असर अगले साल की काउंसलिंग पर भी पड़ेगा।
आगे की राह
सीबीआई की जांच का मुख्य फोकस अब सोर्स (उत्पत्ति स्थल) का पता लगाना होगा। क्या यह किसी अधिकारी की मिलीभगत थी? क्या व्हाट्सएप एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन के बावजूद तकनीकी रूप से इस नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त किया जा सकता है?
फिलहाल, एफआईआर दर्ज होने के बाद सीबीआई ने विशेष जांच दल गठित किए हैं। इन्हें सबूत जुटाने और इसमें शामिल लोगों की पहचान करने के लिए देश भर में कई स्थानों पर भेजा गया है।
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