PWD क्वालिटी कंट्रोल विंग में गबन, सहायक परीक्षण अधिकारी सस्पेंड
समझें क्या है पूरा मामला
PWD के सहायक परीक्षण अधिकारी विनय सक्सेना 15 लाख के गबन में सस्पेंड।
विनय ने सामग्री परीक्षण के नाम पर ठेकेदारों से पैसे लेकर फर्जी चालान बनाए।
59 ऑनलाइन चालान विभागीय पोर्टल पर नहीं मिले, न ही रकम सरकारी खाते में जमा हुई।
ठेकेदारों को मैटेरियल टेस्टिंग के लिए फर्जी GRN नंबर वाली फोटो कॉपी दी गई।
विभाग की जांच टीम ने दो दिन कोटा में रुककर ठेकेदारों के बयान दर्ज किए।
राजस्थान के कोटा जिले में सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) की क्वालिटी कंट्रोल विंग में सामग्री परीक्षण (Material Testing) के नाम पर हुए 15 लाख रुपए के वित्तीय गबन के मामले में विभाग ने एक कड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है।
जयपुर मुख्यालय द्वारा गठित विशेष टीम की जांच रिपोर्ट में गंभीर रूप से दोषी पाए जाने के बाद सहायक परीक्षण अधिकारी (ATO) विनय सक्सेना को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड (निलंबित) कर दिया गया है।
वरिष्ठ शासन उपसचिव सुनील कुमार शर्मा ने निलंबन के आधिकारिक आदेश जारी कर दिए हैं। निलंबन की अवधि के दौरान विनय सक्सेना का मुख्यालय मुख्य अभियंता एवं अतिरिक्त सचिव PWD कार्यालय, जयपुर तय किया गया है।
इसके साथ ही, विभाग के निर्देशों पर क्वालिटी कंट्रोल विंग के अधिशासी अभियंता (XEN) आर.के. मीणा ने कोटा के नयापुरा थाने में आरोपी अधिकारी और एक निजी कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ धोखाधड़ी व गबन की गंभीर धाराओं में एफआईआर (FIR) भी दर्ज करा दी है।
ऐसे दिया गया ₹15 लाख के गबन को अंजाम
विभाग के अकाउंटेंट और जयपुर से आई विशेष विजिलेंस टीम की जांच में इस पूरे घोटाले की जो कार्यप्रणाली सामने आई है, वह बेहद चौंकाने वाली है।
सितंबर 2024 से मार्च 2026 के बीच PWD की लैब में विभिन्न निर्माण सामग्रियों की टेस्टिंग के लिए कुल 59 चालान तैयार किए गए थे। जब विभाग के अकाउंटेंट ने इन चालानों की क्रॉस-वेरिफिकेशन की, तो सरकार के ई-ग्रास (e-GRAS) पोर्टल पर ये 59 चालान ऑनलाइन दर्ज ही नहीं मिले।
ठेकेदारों से मैटेरियल टेस्टिंग के नाम पर नकद या अन्य माध्यमों से करीब 15 लाख रुपए वसूल तो किए गए, लेकिन इस राशि को सरकारी राजस्व खाते में जमा ही नहीं कराया गया और पूरी रकम हड़प ली गई।
जांच में सामने आया कि आरोपियों द्वारा ठेकेदारों को ऑनलाइन चालान की मूल (ओरिजिनल) रसीदें दी ही नहीं जाती थीं। इसके स्थान पर, एक्सएन (XEN) द्वारा सामग्री जांच के लिए भेजे जाने वाले जॉब मिक्स लेटर की फोटोकॉपी ठेकेदारों को थमा दी जाती थी।
इस फोटोकॉपी पर फर्जी सरकारी रसीद नंबर (GRN नंबर) और टेस्टिंग की राशि अपने मनमुताबिक अंकित कर दी जाती थी, जिसे बाद में ATO विनय सक्सेना स्वयं अपने सील और हस्ताक्षरों से अटेस्टेड (सत्यापित) कर देते थे ताकि ठेकेदारों को कोई शक न हो।
नयापुरा थाने में दर्ज हुआ आपराधिक मुकदमा
नयापुरा थाने के एएसआई (ASI) जल सिंह ने बताया कि PWD के अधिशासी अभियंता की लिखित शिकायत पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की है। 15 लाख रुपए की इस ऑनलाइन और ऑफलाइन धोखाधड़ी के मामले में मुख्य आरोपी अधिकारी विनय सक्सेना और एक निजी व्यक्ति (विभाग में कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटर) कुलदीप पंवार को नामजद किया गया है।
पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318 (4) [धोखाधड़ी], 316 (4) [विश्वासघात व आपराधिक गबन] और धारा 61 (2) [आपराधिक साजिश] के तहत मुकदमा दर्ज कर कानूनी तफ्तीश शुरू कर दी है।
मीडिया के हस्तक्षेप के बाद जागा प्रशासन
इस पूरे मामले में एक गंभीर प्रशासनिक लापरवाही भी सामने आई थी कि विभाग के उच्च अधिकारी गबन की भनक लगने के बाद भी जांच के नाम पर कई दिनों तक इस पूरे मामले को दबाए रखने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन मीडिया द्वारा इस वित्तीय घोटाले को प्रमुखता से उजागर किए जाने के बाद विभाग हरकत में आया।
इसके तुरंत बाद जयपुर मुख्यालय से दो सदस्यीय उच्च स्तरीय टीम दो दिन के लिए कोटा पहुंची, विभाग की लैब में कार्यरत सरकारी और निजी कर्मचारियों से कड़ी पूछताछ की, पीड़ित ठेकेदारों के बयान कलमबद्ध किए और अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपी, जिसके बाद यह निलंबन और एफआईआर की बड़ी कार्रवाई मुमकिन हो सकी।
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