एजुकेशन सिस्टम बच्चों को दबाता है, हमें लड़ना होगा, कोटा में बोले राहुल
समझें क्या है पूरा मामला
- राहुल गांधी ने कोटा में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में छात्रों से संवाद किया।
- उन्होंने कहा- शिक्षा प्रणाली सिर्फ पैसे वसूलने का सिस्टम बन चुका है।
- NEET, JEE, SSC, RRB, UPSC की तैयारी पर 5 लाख करोड़ रुपए खर्च होते हैं।
- 100 में से 80 इंजीनियर बेरोजगार हैं, 1000 में से 12 को जॉब मिलती है।
- कार्यक्रम में सिर्फ चुनिंदा 5 छात्रों से बात की गई, बाकी निराश रहे।
Kota: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को कोचिंग नगरी कोटा में छात्रों के साथ संवाद किया। इस दौरान उन्होंने देश की वर्तमान शिक्षा व्यवस्था पर प्रहार कर एक तरह से मोदी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान का मौजूदा एजुकेशन सिस्टम अपने ही बच्चों को गहरे दबाव (प्रेशराइज) में रखता है। हमें इसके खिलाफ मिलकर लड़ना होगा।
छात्रों की गूंज नाम से आयोजित इस कार्यक्रम के शुरुआत में राहुल यह स्पष्ट किया कि यह कोई राजनीतिक आयोजन नहीं है, बल्कि देश के युवाओं और छात्रों की आवाज को उठाने का एक सशक्त मंच है।
यहां केवल उनके भविष्य, संघर्ष और प्राथमिकताओं पर खुलकर बात की जाएगी। यह कार्यक्रम कोटा के के दशहरा मैदान में रखा गया।
एजुकेशन सिस्टम देता है स्ट्रेस
राहुल ने देश की वर्तमान शिक्षा व्यवस्था पर प्रहार करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि कहा, यह मौजूदा एजुकेशन सिस्टम छात्रों को लगातार स्ट्रेस देती है। यह बच्चों की सोच को दबाने और कुचलने का काम करती है, जो किसी भी देश के सुनहरे भविष्य के लिए बिल्कुल भी सही नहीं है।
कोटा में छात्रों के बढ़ते मानसिक तनाव और सुसाइड जैसे गंभीर मामलों की ओर इशारा करते हुए राहुल गांधी ने भावुक अपील की।
उन्होंने कहा कि मैं चाहता हूं कि हम सब मिलकर इस दोषपूर्ण और दबाव बनाने वाली व्यवस्था के खिलाफ एक सामूहिक लड़ाई लड़ें, ताकि भविष्य में आगे से किसी भी मासूम बच्चे को सुसाइड जैसा कोई आत्मघाती और दर्दनाक कदम न उठाना पड़े।
पांच ही विकल्प क्यों सीमित
शिक्षा और करियर के सीमित विकल्पों पर सवाल उठाते हुए राहुल ने कहा कि देश के युवाओं के पास एजुकेशन में सिर्फ पांच ही विकल्प क्यों सीमित कर दिए गए हैं? हर कोई केवल डॉक्टर या इंजीनियर बनने की दौड़ में ही क्यों शामिल होना चाहता है, जबकि दुनिया में अन्य कई बेहतरीन अवसर भी मौजूद हैं।
उन्होंने छात्रों को अपनी रुचि के अनुसार करियर चुनने और किसी भी स्थिति में मानसिक रूप से मजबूत रहने का संदेश दिया। उन्होंनेे कहा कि यह कार्यक्रम आपके और आपके भविष्य के बारे में है। आप किन हालात से गुजर रहे हैं और रोजाना किन चुनौतियों का सामना करते हैं, इस बारे में है।
पांच परीक्षाओं में 5 लाख करोड़ खर्च
राहुल गांधी ने कहा- पांच प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में आपके परिवारों की जेब से उतना पैसा छीन लिया जाता है जितना पांच मंत्रालयों का बजट है। नीट, जेईई सहित 5 परीक्षाओं की तैयारी पर परिवारों की जेब से 5 लाख करोड़ चले जाते हैं।
उन्होंने आंकड़े पेश करते हुए कहा22 लाख स्टूडेंट नीट देते हैं, तैयारी पर 1.32 लाख करोड़ रुपए खर्च होते हैं।15 लाख बच्चे जेईई देते हैं, तैयारी पर 1.3 लाख करोड़ खर्च होते हैं।नीट, जेईई, एसएससी, आरआरबी और यूपीएससी को मिलाकर 5 लाख करोड़ रुपए खर्च होते हैं।
आंकड़े बताते हैं बेरोजगारी का कहर
राहुल गांधी ने कहा- यह सिस्टम सिर्फ पैसे वसूलने का सिस्टम बन चुका है। एक हजार लोगों में से केवल 12 को रोजगार मिलता है, बाकी लोग क्या करेंगे? कोई कुली बनेगा, तो कोई ओला-उबर चलाएगा । हिंदुस्तान में आज 100 में से 80 इंजीनियर बेरोजगार हैं।
स्टूडेंट्स से बातचीत के अंश
राहुल गांधी ने मंच पर पांच स्टूडेंट्स को बुलाकर उनसे बातचीत की । उन्होंने पूछा कि डॉक्टर या इंजीनियर ही क्यों बनना चाहते हो? अगर आपको अपने मन की करने दी जाए, तो क्या करना चाहोगे?
एक छात्रा ने कहा कि उसकी डांसिंग में रुचि है। एक स्टूडेंट ने कहा कि वह शुरू से ही डॉक्टर बनना चाहता था क्योंकि उसके चाचा की इलाज नहीं मिलने पर हार्ट अटैक से मौत हो गई थी।
सिस्टम रिजेक्शन वाला, सिलेक्शन वाला नहीं
राहुल गांधी ने कहा- हमारा एजुकेशन सिस्टम क्रूर है, यह रिजेक्शन सिस्टम है, सिलेक्शन सिस्टम नहीं। यह सिस्टम इंसल्ट करता है। आप लोग बहादुर हो। इस कार्यक्रम में 3000 स्टूडेंट हैं, इनमें से यूपीएससी में केवल एक का सिलेक्शन होगा। आईआईटी में केवल एक का सिलेक्शन होगा। 3000 में से केवल 180 लोगों का सिलेक्शन नीट में होगा, बाकी के बच्चों का क्या होगा?
राहुल गांधी ने यूपीएससी की तैयारी कर रही भावना महावर के पिता नरेश महावर और मां पार्वती महावर के अनुभव पूछे। भावना की मां पार्वती ने कहा- आजकल सिस्टम बहुत खराब हो गया है। बच्चे तनाव में हैं, बच्चा जब रात को पढ़ता है तो हम दो से तीन बार जागकर देखते हैं कि सब ठीक तो है।
छात्राओं की निराशा
कार्यक्रम के बाद कुछ स्टूडेंट्स निराश नजर आए। छात्रा आकांक्षा ने कहा- हम लोग सोच कर आए थे कि कोई हमारी आवाज उठाने आया है, लेकिन यहां सिर्फ सिलेक्टेड पांच बच्चों से बात की गई। वे बच्चे पहले से ही बातचीत के लिए प्रिपेयर थे। जो बच्चे भीड़ में खड़े थे, उनका संघर्ष और उनकी परेशानियां भी पूछनी चाहिए थी।
हवाई पट्टी पर किया स्वागत
इससे पहले चार्टर विमान से राहुल के कोटा पहुंचने पर हवाई पट्टी पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने उनका स्वागत किया।
पूर्व सीएम अशोक गहलोत, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और कांग्रेस नेता सचिन पायलट समेत कई नेताओं ने उनका अभिनंदन किया।
उनका पहले ट्रेन से कोटा पहुंचने का कार्यक्रम था। लेकिन, बाद में उन्होंने इसमें बदलाव कर दिया। वे चार्टर विमान से कोटा पहुंचे।
क्यों चुना शिक्षा का मुद्दा?
कांग्रेस के आंतरिक सर्वे में यह बात सामने आई है कि 18 से 30 वर्ष के युवाओं के बीच शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दे सबसे ज्यादा असरदार हैं।
पार्टी अब इसी नब्ज को पकड़ना चाहती है। इससे पहले राहुल ने संवैधानिक संस्थानों पर कब्जे, क्रोनी कैपिटलिज्म (पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाना) और वोट चोरी जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरा था, लेकिन चुनाव में उनका उतना फायदा नहीं मिला। पार्टी सूत्रों का कहना है कि नेता प्रतिपक्ष का मानना है कि शिक्षा एक ऐसा मुद्दा है, जो देश के हर घर को छूता है।
देश के 4 बड़े शहरों में छात्र सम्मेलन
कांग्रेस पहले ही एलान कर चुकी है कि राहुल गांधी कोटा, प्रयागराज, पटना और दिल्ली में छात्र सम्मेलन करेंगे।
इसका मकसद पेपर लीक, परीक्षा फॉर्मों की बढ़ती फीस और एक निष्पक्ष-पारदर्शी भर्ती प्रणाली बनाने में सरकार की नाकामी के कारण युवाओं को हो रही दिक्कतों को उजागर करना है।
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