​8 करोड़ दबाए बैठी सरकार, CS और खान सचिव को अवमानना नोटिस

Mukesh Sharma | Jul 16, 2026, 20:40 IST
सरकार ने हड़पे 8 करोड़
​राजस्थान हाई कोर्ट ने मुख्य सचिव और खान सचिव को अवमानना नोटिस जारी किया हैं। मामला चार जिलों की बजरी नीलामी रद्द होने के बाद भी 8 करोड़ नहीं लौटाने से जुड़ा है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • कोर्ट का आदेश हवा,नीलामी रद्द होने के बावजूद कारोबारी को नहीं लौटाए 8 करोड़ रुपए ।
  • मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास,खान सचिव अपर्णा अरोड़ा व निदेशक खान एम.पी.मीणा से जवाब तलब।
  • नदी के पुनर्भरण को नजरअंदाज कर सरकार ने फिर से कर दी थी बजरी नीलामी।
  • अवमानना याचिका पर हाईकोर्ट में होगी अगली सुनवाई 28 जुलाई को

राजस्थान हाई कोर्ट ने मुख्य सचिव वी.श्रीनिवास,खान विभाग की प्रमुख सचिव अपर्णा अरोड़ा तथा निदेशक खान एम.पी.मीणा को नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों ना उनके खिलाफ अवमानना कार्रवाई शुरु की जाए ? जस्टिस इंद्रजीत सिंह व जस्टिस संदीप तनेजा ने यह अंतरिम आदेश कुलदीप स्टोन ट्रेडिंग कंपनी की याचिका पर दिए।



एडवोकेट अरविंद सोनी ने बताया कि हाईकोर्ट ने जनवरी 2026 में एक जनहित याचिका में दिए फैसले में चार जिलों की बजरी खनन की नीलामी रद्ध कर दी थी। कोर्ट ने नीलामी में सफल रहने वालों को उनके जमा करवाई गई राशि बिना ब्याज के लौटाने को भी कहा था। याचिकाकर्ता ने 20 करोड़ में एक खान की नीलामी छुड़वाई थी।



जून 2025 में सरकार में 8 करोड़ रुपए जमा करवाए थे। कोर्ट के आदेश के अनुसार यह पैसे उसे वापिस मिलने चाहिए । लेकिन सरकार ने नोटिस व डिमांड करने के बावजूद भी उक्त राशि वापिस नहीं दी है। इस पर दोषी अधिकारियों के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की है। मामले में अगली सुनवाई 28 जुलाई को होगी।



यह था हाईकोर्ट का आदेश

डॉ.बृजमोहन सपूत कला संस्कृति सेवा संस्थान की जनहित याचिका में कहा था कि राजस्थान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट और केन्द्रीय एंपावरमेंट कमेटी की सिफारिश की अवहेलना करते हुए इन खनन पट्टों की ई-नीलामी निकाली है।



सुप्रीम कोर्ट ने साल 2021 में सीईसी की रिपोर्ट को मंजूरी दी थी। इसमें स्पष्ट प्रावधान था कि एक बार खनन अवधि पूरी होने के बाद वहां अगले पांच साल के लिए खनन कार्य नहीं किया जाएगा। इससे इस अवधि में नदी में प्राकृतिक रूप से बजरी का पुनर्भरण हो सकेगा।



इसके बावजूद राज्य सरकार ने 12 से 100 हेक्टेयर तक के छोटे ब्लॉक बनाकर पुराने खनन क्षेत्रों को फिर नीलाम कर दिया। ऐसे में एक खनन क्षेत्र में बीते एक दशक से बजरी खनन हो रहा है। इससे नदी का तल गहरा हो रहा है और भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है।नदी किनारे की जमीन बंजर हो रही है।



प्रदेश में 12 मासी नदियां नहीं है। इससे मानसून में इनका पूरी तरह पुनर्भरण नहीं होता। अत्यधिक खनन से मछली पालन स्थल भी समाप्त हो रहे हैं।



रद्ध कर दी थी नीलामी..

हाईकोर्ट ने जनहित याचिका को स्वीकार करते हुए प्रदेश के चार जिलों (भीलवाड़ा, बाडमेर, टोंक एवं सिरोही) के करीब 93 बजरी खनन पट्टों के ई-नीलामी आदेश रद्द कर दिए। अदालत ने राज्य सरकार को रिपोर्ट तैयार करने को कहा,जहां से बजरी निकाली जाएगी और वहां बजरी का पुनर्भरण कैसे होगा।



राज्य सरकार यह रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश करे और चाहे तो मामले में सुप्रीम कोर्ट में लंबित याचिका में इस रिपोर्ट को रखे। नियम से एक बार खनन की अवधि पूरी होने के बाद वहां अगले पांच साल खनन नहीं होता है। कोर्ट सफल निविदादाताओं केा उनके जमा करवाए गई राशि बिना ब्याज के वापिस लौटाने केा कहा था।



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